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ईरान का पाताल लोक हो जाएगा धुआं-धुआं! पहली बार ब्रिटिश एयरबेस पर 3 महाविनाशक B-1B बमवर्षक तैनात, मोजतबा खामेनेई की बढ़ी धड़कनें

Iran US Conflict: ट्रंप ने ईरान को गंभीर चोट देने की तैयारी कर दी है. ब्रिटेन के RAF फेयरफोर्ड एयर बेस पर अमेरिका ने तीन B-1B लांसर बमवर्षक विमान को हमले के लिए तैयार कर रखा है. जल्द ही इससे ईरान पर हमला कर सकता है.

Iran US Conflict

Iran US Conflict: ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने अमेरिका को अंजाम भुगतने की धमकी दी है. उन्होंने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को भी खोलने से मना कर दिया है. जिसपर अब अमेरिका भड़क गया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को गंभीर चोट देने की तैयारी कर दी है. ईरान पर हमले को लेकर वह पहली बार ब्रिटिश एयरबेस का इस्तेमाल करने जा रहा है. ब्रिटेन के RAF फेयरफोर्ड एयर बेस पर अमेरिका ने तीन B-1B लांसर बमवर्षक विमान को हमले के लिए तैयार कर रखा है. बताया जा रहा है कि अमेरिका जल्द ही इससे ईरान पर हमला कर सकता है. बता दें कि, B-1B लांसर बमवर्षक विमान लंबी दूरी तक बम गिरा सकते हैं.

अल जजीरा के मुताबिक ब्रिटिश एयरबेस पर क्रू को विमान के अंदर बंकर बस्टर बमों को लोड करते हुए देखा गया है. ये बम JDAM किट से लैस हैं जो सामान्य बमों को भी एकदम सटीक हथियार में बदल देता है. इनमें 500 पाउंड के Mk-82 से लेकर 2000 पाउंड के Mk-84 बमों पर लगाया गया है. जो जमीन के अंदर मौजूद किसी भी स्ट्रक्चर को नेस्तनाबूत कर सकते हैं.

इससे पहले अमेरिका ने पिछले साल ईरान-इजरायल संघर्ष के दौरान बंकर बस्टर बमों का उपयोग कर पहाड़ी के अंदर मौजूद ईरान के परमाणु ढांचे को पूरी तरह नष्ट कर दिया था.

संहारक है B-1B लांसस

B-1B लांसर (B-1B Lancer) बमवर्षक विमान अमेरिकी वायु सेना (US Air Force) का एक अत्यधिक शक्तिशाली, सुपरसोनिक स्ट्रैटेजिक बमवर्षक है. इसे “Bone” (B-One से) भी कहा जाता है. यह मूल रूप से सोवियत संघ के खिलाफ न्यूक्लियर हमले के लिए डिज़ाइन किया गया था, लेकिन अब मुख्य रूप से कन्वेंशनल (पारंपरिक) हमलों में इस्तेमाल होता है. इस विमान की लंबाई 44.5 मीटर, पंखों का फैलाव 147 फीट और ऊंचाई 34 फीट होती है. यह 34 टन वजन रखकर उड़ सकते हैं. ये विमान एक बार फ्यूल होने के बाद लगभग 9500 किलोमीटर तक उड़ान भर सकते हैं. इनकी टॉप स्पीड 1300 किलीमीटर तक है.

क्या होते हैं बंकर बस्टर बम?

बंकर बस्टर बमों को मुख्य रूप से जमीन के अंदर मौजूद दुश्मन के ठिकानों, सुरंगों और कंक्रीट के बंकरों को बर्बाद करने के लिए बनाया गया है. ये बम काफी फोर्स के साथ गिरते हैं और सामने पड़ने वाले कठोर से कठोर चीज में छेद कर घुसते चले जाते हैं. इनपर स्टील का आवरण होता है, जो इन्हें कठोर से कठोर सतह को भेदने में मदद करता है. ये 60 मीटर से अधिक गहराई तक जमीन को छेद कर घुस सकते हैं और ढांचे को नष्ट कर सकते हैं.

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बता दें कि, अमेरिका और इजरायल के संयुक्त रूप से ईरान पर हमले के बाद ब्रिटेन ने भी इस युद्ध में अमेरिका की मदद का ऐलान कर दिया है. ब्रिटेन ने पूर्वी भूमध्यसागर में अपनी गतिविधि बढ़ा दी है. वह लगातार ईरानी मिसाइल और ड्रोन हमलों को रोकने के लिए ऑपरेशन चला रहा है.

-भारत एक्सप्रेस



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