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बांग्लादेश में चुनाव से पहले न्यायिक हिरासत में हिंदू नेता की मौत, विपक्ष ने उठाए सवाल; राजनीतिक माहौल तनावपूर्ण

बांग्लादेश में चुनाव से कुछ दिन पहले हिंदू नेता रमेश चंद्र सेन की दिनाजपुर जिला जेल में रहस्यमय मौत हो गई. 85 वर्षीय सेन पिछले साल अगस्त में गिरफ्तारी के बाद जेल में थे. उनके परिवार और विपक्ष ने हिरासत और चिकित्सा देखभाल पर सवाल उठाए हैं.

Bangladesh Hindu Leader Dies

बांग्लादेश में चुनाव से कुछ दिन पहले एक गंभीर और विवादित घटना सामने आई है. हिंदू नेता रमेश चंद्र सेन, जो हसीना कैबिनेट में पूर्व जल संसाधन मंत्री और बांग्लादेश अवामी लीग के वरिष्ठ नेता रहे हैं. उनकी जेल में रहस्यमय मौत हो गई. यह घटना शनिवार (7 फरवरी) को दिनाजपुर जिला जेल में हुई. रमेश चंद्र सेन 85 वर्ष के थे.

जेल प्रशासन का कहना है कि उनकी तबीयत अचानक बिगड़ने के बाद मौत हुई, लेकिन पार्टी के लोग इसे संदिग्ध मान रहे हैं. इसे बाग्लादेश में राजनीतिक गहमागहमी बढ़ गई है.

आंदोलन में हुए थे गिरफ्तार

रमेश चंद्र सेन को पिछले साल 16 अगस्त को गिरफ्तार किया गया था. वे उस समय हसीना सरकार के खिलाफ आंदोलन में शामिल थे. गिरफ्तारी के बाद उन्हें दिनाजपुर जिला जेल में स्थानांतरित किया गया, जहां वे तीन मामलों में हिरासत में थे, जिनमें हत्या का मामला भी शामिल था. घटना के दिन उनकी अचानक तबीयत बिगड़ गई और उन्हें दिनाजपुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया, जहां ड्यूटी पर मौजूद चिकित्सक ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. दिनाजपुर जिला जेल के सुपरिंटेंडेंट फरहाद सरकार ने इस मौत की पुष्टि की और कहा कि कानूनी प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया जाएगा.

पांच बार सांसद रहें

रमेश चंद्र सेन का राजनीतिक करियर भी उल्लेखनीय रहा. उनका जन्म 30 अप्रैल 1940 को ठाकुरगांव जिले के रुहिया यूनियन के काशलगांव गांव में हुआ. उन्होंने रंगपुर के कार्माइकल कॉलेज से शिक्षा प्राप्त की. वे पांच बार सांसद चुने गए, और सबसे हालिया बार 2024 में अवामी लीग से ठाकुरगांव-1 सीट से सांसद बने, हालांकि बाद में पार्टी की राजनीतिक गतिविधियों पर उन्हें प्रतिबंधित कर दिया गया. उन्होंने पार्टी के प्रेसिडियम सदस्य के रूप में भी कार्य किया. 2024 में छात्र-जन विद्रोह और अवामी लीग सरकार के पतन के बाद राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने संसद भंग कर दी, जिससे सेन अपनी संसदीय सीट खो बैठे.


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चुनाव से पहले राजनीतिक माहौल तेज

12 फरवरी को होने वाले आम चुनावों से महज कुछ दिन पहले हिरासत में 83 वर्षीय सेन की मौत ने हिरासत में लिए गए अन्य राजनेताओं के साथ होने वाले व्यवहार और चिकित्सा देखभाल के मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

अंतरिम सरकार और चुनावी माहौल पर प्रभाव नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार को पहले से ही मानवाधिकारों और हिरासत में मौतों को लेकर अंतरराष्ट्रीय और घरेलू आलोचना का सामना करना पड़ रहा है. विपक्ष का आरोप है कि अवामी लीग के नेताओं की हिरासत में मौतें व्यवस्थागत समस्याओं और राजनीतिक प्रतिशोध की ओर इशारा करती हैं.

-भारत एक्सप्रेस



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