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परमाणु युद्ध से बस एक ‘बटन’ दूर थी दुनिया! जब रूस ने अमेरिका की छाती पर तान दी थीं मिसाइलें

Cuban Missile Crisis History: अमेरिका ने वेनेजुएला पर हमला कर वहां के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार कर लिया. जेलेंस्की ने ट्रंप की तारीफ कर रूसी राष्ट्रपति को भी इसी तरह से गिरफ्तार करने का संकेत दिया.

Cuban missile crisis history

अमेरिका ने वेनेजुएला पर हमला कर वहां के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार कर लिया. US के इस हमले को लेकर यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लादिमिर जेलेंस्की ने ट्रंप की तारीफ की और रूसी राष्ट्रपति को भी इसी तरह से प्लान बनाकर गिरफ्तार करने का संकेत दिया था.

जिसके बाद इस बात की चर्चा तेज हो गई है कि क्या अमेरिका रूस के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई कर सकेगा और क्या कभी अमेरिका और रूस की आमने सामने भिड़ंत हुई है?

अमेरिका और रूस में कभी सीधे तौर पर टकराव तो नहीं हुआ है लेकिन इतिहास में एक बार ऐसा मौका आया था जब लगा कि दोनों देशों के बीच परमाणु युद्ध कभी भी शुरू हो सकता है. क्या है पूरा मामला? आइये बताते हैं.

चरम पर था शीत युद्ध

साल था 1959. अमेरिका और रूस के बीच शीत युद्ध अपने खतरनाक और तनावपूर्ण दौर से गुजर रहा था. इसी साल फिदेल कास्त्रो के नेतृत्व में क्यूबा में क्रांति हुई. जिसके बाद अमेरिका क्यूबा के खिलाफ हो गया. अमेरिका ने फिदेल कास्त्रो को गिरफ्तार करने के लिए 1961 में बे ऑफ पिग्स पर हमला कर दिया. जिसे क्यूबाई क्रांति के लड़ाकों ने विफल कर दिया. अमेरिकी हमला विफल होने के बाद क्यूबा ने सोवियत संघ से मदद मांगी.

तत्कालीन सोवियत नेता निकिता ख्रुश्चेव ने अमेरिका के खिलाफ संतुलन बनाने के लिए क्यूबा में सोवियत मिसाइलें तैनात करने का फैसला किया. अमेरिका पहले से ही तुर्की, इटली और ब्रिटेन में अपनी जुपिटर और थोर मिसाइलें लगा चुका था. जिनकी पहुंच सीधे मास्को तक थीं. ख्रुश्चेव इसे असंतुलन मानते थे और क्यूबा में मिसाइलें लगाकर अमेरिका को सीधे जवाब देना चाहते थे. बता दें कि क्यूबा और अमेरिका के बीच की दूरी मात्र 90 किलोमीटर है.

 

अमेरिका अपने पड़ोस में रूसी हथियारों की मौजूदगी कत्तई बर्दाश्त करने के मूड में नहीं था. उसने रूस पर उकसावे का आरोप लगाता रहा.

14 अक्टूबर 1962 में अमेरिका के प्रमुख जासूसी विमान U-2 ने क्यूबा के कुछ हिस्सों की तस्वीरें लेकर क्यूबा में सोवियत मिसाइलों की पुष्टि की. ये तस्वीरें अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के लिये निर्णायक साबित हुईं.

Cuban Missile Crisis

US ने क्यूबा पर बनाया नौसैनिक बैरियर

16 अक्टूबर 1962 को अमेरिकी राष्ट्रपति जॉन एफ. कैनेडी को इसकी सूचना दी गई. जिनके कहने पर अमेरिका ने EXCOMM (Executive Committee) बनाई. कमेटी बनने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति कैनेडी ने राष्ट्र को टीवी पर संबोधित किया और क्यूबा पर एक नौसैनिक बैरियर बनाने की घोषणा की.

Cuban Missile Crisis

उधर फिदेल कास्त्रो की मदद के लिए सोवियत संघ के 4 जंगी पोत क्यूबा के लिए निकल चुके थे. 24 अक्टूबर को सोवियत जहाज क्यूबा की तरफ बढ़े लेकिन अमेरिका के द्वारा बनाये गए बैरियर के पास रुक गए. हालांकि दोनों देशों की सेनाओं के बीच माहौल गर्म होता रहा.

Cuban Missile Crisis

27 अक्टूबर को छिड़ जाता परमाणु युद्ध

इसी बीच 27 अक्टूबर के दिन कुछ ऐसा हुआ कि अमेरिका और सोवियत संघ के बीच परमाणु युद्ध होते-होते रुक गया. दरअसल एक अमेरिकी U-2 जासूसी विमान को रूसी पोतों ने मार गिराया. जिसमें अमेरिकी पायलट रुडोल्फ एंडरसन की मौत हो गई. जिसके बाद अमेरिका ने पलटवार करते हुए सोवियत पनुब्बी B-59 पर हमला कर दिया. जिसके जवाब में सोवियत संघ परमाणु बम से लदा टॉरपीडो लगभग छोड़ने ही वाला था, लेकिन एक सोवियत अधिकारी वासिली आर्किपोव ने इसे रोक दिया. जिसके बाद ख्रुश्चेव ने क्यूबा से सोवियत मिसाइलें हटाने की घोषणा की.

 

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ऐसा क्या हुआ कि सोवियत हटा पीछे?

दरअसल मामला गंभीर होता देख अमेरिका और सोवियत संघ के बीच एक समझौता हुआ. इस समझौते पर दोनों देश इन मामलों पर सहमत हुए-

  • सोवियत संघ क्यूबा से सभी मिसाइलें हटाएगा.
  • अमेरिका क्यूबा पर कभी भी अटैक नहीं करेगा.
  • अमेरिका गुप्त रूप से तुर्की और इटली से अपनी जुपिटर मिसाइलें हटाएगा.

समझौते के तहत नवंबर 1962 में सोवियत संघ ने क्यूबा से अपनी मिसाइलें हटा ली और 20 नवंबर को दोनों महाशक्तियों के बीच गतिरोध खत्म हो गया.

इस प्रकार दुनिया भीषण परमाणु युद्ध से बच गई. हालांकि इस समझौते को लेकर ख्रुश्चेव को राजनीतिक घाटा भी उठाना पड़ा. देश में उनकी छवि खराब हो गई और 1964 में उनकी सत्ता चली गई.

पुतिन से निराश हैं ट्रंप!

डोनाल्ड ट्रंप ने पुतिन को लेकर कहा कि उनका रूस के साथ बहुत अच्छा रिश्ता है, लेकिन मैं उनसे निराश हूं. मुझे लगा था कि रूस-यूक्रेन के युद्ध को सुलझाना आसान होगा, लेकिन मैं निराश हूं कि इसे नहीं सुलझाया जा सका है.

-भारत एक्सप्रेस



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