प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिनेश भाटिया ने 'देवी पुराण' भेंट किया
Dinesh Bhatia met Pm Modi: देश के नामचीन राजनयिक दिनेश भाटिया ने ब्राजील में बतौर राजदूत कार्यभार संभालने से पहले आज नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की. इस मुलाकात में दिनेश भाटिया ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘देवी पुराण – श्रीमद् देवी भागवतम का एक अनुवाद’ की प्रति भेंट की.
‘Devi Purana – A Rendition of Srimad Devi Bhagavatam’ पुस्तक शक्तिवाद पर केंद्रित एक महत्वपूर्ण सनातन ग्रंथ है, जो देवी को संसार की आधारशिला के रूप में दर्शाता है. आज दिनेश भाटिया ने सोशल मीडिया (X.com @dineshbhatia) पर पीएम मोदी से मुलाकात की तस्वीरें शेयर कीं. उन्होंने एक ट्वीट कर पीएम मोदी के साथ हुई अपनी मुलाकात को सम्मानजनक बताया और ब्राजील में अपनी नई जिम्मेदारी के लिए पीएम का मार्गदर्शन और आशीर्वाद प्राप्त करने पर जोर दिया.
RT @dineshbhatia :
Honrado por receber bênçãos e orientação de @narendramodi, Hon'ble @PMOIndia antes de prosseguir como Embaixador da Índia no Brasil. Também apresentou a ele uma cópia de #DeviPurana – A Rendition of Srimad Devi Bhagavatam https://t.co/sMSbfUq1RT
— India In Brazil (@indiainbrazil) May 27, 2025
राजनयिक भाटिया को विदेश सेवा का खासा अनुभव
दिनेश भाटिया 1992 बैच के भारतीय विदेश सेवा (IFS) अधिकारी, एक अनुभवी राजनयिक हैं, जिन्हें हाल ही में ब्राजील में भारत के राजदूत के रूप में नियुक्त किया गया है. इससे पहले उन्होंने कनाडा के टोरंटो में भारत के महावाणिज्यदूत और कोट डी आइवर, गिनी, और लाइबेरिया में राजदूत के रूप में कार्य किया है.
उन्होंने दक्षिण अमेरिका महाद्वीप के देश अर्जेंटीना में भी भारत के राजदूत के रूप में सेवाएं दी हैं. अर्जेंटीना ब्राजील का ही पड़ोसी देश है. इसके अतिरिक्त, उन्होंने मैड्रिड, काठमांडू और कुवैत सहित विदेशों में भारतीय मिशनों में विभिन्न पदों पर कार्य किया है.
आज राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में उनकी पीएम मोदी से मुलाकात होना भारत और ब्राजील के बीच बढ़ते सांस्कृतिक और कूटनीतिक संबंधों को रेखांकित करती है, खासकर G20 शिखर सम्मेलन के दौरान हाल के सहयोग के संदर्भ में. भाटिया का व्यापक राजनयिक अनुभव और लैटिन अमेरिकी क्षेत्र में उनकी विशेषज्ञता उन्हें ब्राजील में भारत के हितों को मजबूत करने के लिए उपयुक्त बनाती है.

1992 में भारतीय विदेश सेवा में भर्ती हुए दिनेश भाटिया ने लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (LBSNAA), मसूरी और विदेश सेवा संस्थान—नई दिल्ली में प्रशिक्षण प्राप्त किया था. वे राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय (NDC) के छात्र रह चुके हैं और उन्होंने LBSNAA में राष्ट्रीय सुरक्षा पर चौथे संयुक्त नागरिक-सैन्य पाठ्यक्रम में भाग लिया था.
राजनयिक भाटिया ने दिल्ली कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से इलेक्ट्रॉनिक्स और संचार में इंजीनियरिंग की स्नातक की डिग्री प्राप्त की. सिविल सेवा में आने से पहले, उन्होंने निजी क्षेत्र में काम किया. वे इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स के फेलो और इंस्टीट्यूशन ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियर्स के सदस्य हैं.
उन्होंने देवी पुराण – श्रीमद् देवी भागवतम् का एक संस्करण लिखा है, जिसे ब्लूम्सबरी द्वारा 2023 में प्रकाशित किया गया है.

भारत-ब्राजील के संबंध लगातार मजबूत हो रहे
ब्राजील में भारतीय सांस्कृतिक केंद्र आयुर्वेद, योग, और भारतीय नृत्य जैसी गतिविधियों के माध्यम से सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देता है.
ब्राजील क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत से लगभग ढाई गुना बड़ा है. हालांकि, वहां जनसंख्या काफी कम है. जनसंख्या में ब्राजील लगभग उत्तर प्रदेश जितना बड़ा है. क्षेत्रफल की दृष्टि से यह दुनिया का पांचवा सबसे बड़ा देश है.
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श्रीमद् देवी भागवत पुराण
श्रीमद् देवी भागवत पुराण, जिसे देवी भागवतम या देवी पुराण के नाम से भी जाना जाता है, सनातन धर्म के पुराणों में से एक है. यह पुराण विशेष रूप से देवी भगवती (आदिशक्ति/दुर्गा) को समर्पित है और शाक्त सम्प्रदाय के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है.
इसमें देवी के विभिन्न रूपों जैसे दुर्गा, लक्ष्मी, सरस्वती, काली आदि की महिमा, उनकी कथाएँ, और उपासना विधियों का वर्णन है. इस पुराण में 12 स्कंध, 318 अध्याय, और लगभग 18,000 श्लोक हैं, जो सृष्टि, पालन, संहार, भक्ति, और मोक्ष के दार्शनिक पहलुओं को समेटे हुए हैं. यह सर्ग, प्रतिसर्ग, वंश, वंशानुकीर्ति, और मन्वंतर जैसे पाँच लक्षणों से युक्त है.
इस पुराण में देवी को मूल प्रकृति और परम शक्ति के रूप में चित्रित किया गया है. इसमें सती, पार्वती की तपस्या, और दुर्गासप्तशती जैसी कथाएँ शामिल हैं. यह भक्तों को भक्ति, ज्ञान, और वैराग्य की प्रेरणा देता है, साथ ही जीवन के कष्टों, रोगों, और पापों से मुक्ति का मार्ग दिखाता है.

इस पुराण की रचना महर्षि वेदव्यास ने की थी. वे वेदों के विभाजक और 18 पुराणों के रचयिता माने जाते हैं. उन्होंने इसे वेदाध्ययन से वंचित लोगों के लिए धर्म और भक्ति का ज्ञान सरलता से देने हेतु रचा. इस पुराण को कुछ विद्वान उपपुराण भी कहते हैं, हालांकि, शाक्त परंपरा में इसका सर्वोच्च स्थान है.
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