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भारतीय मूल की नवी पिल्ले ने मारी बाजी, रह गए ट्रंप! नोबेल के लिए फड़फड़ा रहे US प्रेसीडेंट ने कैसे रोया दुखड़ा?

डोनाल्ड ट्रंप ने नोबेल शांति पुरस्कार न मिलने पर नाराजगी जताई और पुरस्कार चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाए. भारतीय मूल की नवी पिल्ले के मानवाधिकार संबंधी योगदान और ट्रंप के शांति पुरस्कार से जुड़े दावों ने इस मुद्दे को चर्चा में ला दिया है.

Donald Trump

Donald Trump on Nobel Peace Prize: दुनिया का सबसे ताकतवर पद संभालने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर नोबेल शांति पुरस्कार (Nobel Peace Prize) न मिलने पर बच्चों की तरह बिलख पड़े हैं. इस साल का नोबेल शांति पुरस्कार दक्षिण अफ्रीका की पूर्व UN मानवाधिकार प्रमुख और इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट यानि ICC की पूर्व जज नवी पिल्लै को मिलने की घोषणा के बाद ट्रंप की बौखलाहट सातवें आसमान पर पहुंच गई है.

बता दें ट्रंप ने इस फैसले को शर्मनाक और अपमानजनक बताते हुए नॉर्वे की नोबेल कमेटी पर सीधा हमला बोला है और दावा किया है कि उन्होंने इतिहास में सबसे ज्यादा लोगों की जान बचाई है.

‘एक अज्ञात लिबरल को दे दिया पुरस्कार’: ट्रंप का तंज

पुरस्कार न मिलने से तिलमिलाए डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को मीडिया के सामने अपना दर्द बयां करते हुए नवी पिल्लै के चयन पर सवाल उठाए. ट्रंप ने भड़कते हुए कहा कि यह पुरस्कार आज एक ऐसी लिबरल महिला को दे दिया गया, जो संयुक्त राष्ट्र (UN) में काम करती हैं और जिनके बारे में दुनिया में किसी ने सुना तक नहीं है. नॉर्वे की कमेटी ने यह फैसला लेकर अपने चेहरे पर ऐसा दाग लगा लिया है, जो इतिहास में कभी नहीं मिटेगा.

युद्ध रुकवाने का ट्रंप का हैरतअंगेज दावा(Donald Trump on Nobel Peace Prize)

ट्रंप ने खुद को शांति का सबसे बड़ा मसीहा बताते हुए कहा कि वे हर जंग को रोकने के लिए अकेले काफी हैं. उन्होंने दावा किया कि मैंने अब तक 8 बड़े अंतरराष्ट्रीय युद्धों को रोका है. कायदे से तो मुझे एक नहीं, बल्कि हर युद्ध रोकने के लिए अलग-अलग 8 नोबेल शांति पुरस्कार मिलने चाहिए थे. उन्होंने यह भी कहा कि वे रूस-यूक्रेन युद्ध और ईरान संकट को भी टालने में लगे हैं, फिर भी अमेरिका की अनदेखी की जा रही है, जिसे देश कभी नहीं भूलेगा.

भारत-पाकिस्तान पर क्या बोले?

अपनी शेखी बघारने में आगे रहते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति ने एक बार फिर भारत और पाकिस्तान का नाम घसीटा. ट्रंप ने दावा किया कि जब परमाणु हथियारों से लैस भारत और पाकिस्तान जंग के मुहाने पर खड़े थे, तब उन्होंने बीच में पड़कर युद्ध रुकवाया और कम से कम 5 करोड़ बेकसूर लोगों की जान बचाई. इसके अलावा ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने ईरान को परमाणु बम बनाने से रोका, वरना पूरा मिडिल ईस्ट, यूरोप और अमेरिका जलकर खाक हो जाता.

2018 से नोबेल के लिए ‘फड़फड़ा’ रहे हैं ट्रंप

यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप ने नोबेल प्राइज के लिए रोना रोया हो.

अक्टूबर 2018: कोरिया और सीरिया में शांति का दावा कर पहली बार नोबेल की इच्छा जताई थी.

फरवरी 2019: दावा किया कि जापान के तत्कालीन पीएम शिंजो आबे ने उनका नाम नोबेल के लिए भेजा है.

2020 चुनाव: पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा पर तंज कसते हुए कहा था कि अगर बिना कुछ किए ओबामा को नोबेल मिल सकता है, तो उन्हें क्यों नहीं?

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जानिए क्यों नोबेल कमेटी ने ट्रंप को दरकिनार किया?

डोनाल्ड ट्रंप भले ही नवी पिल्लै को ‘अज्ञात’ बताकर खारिज कर रहे हों, लेकिन मानवाधिकारों की दुनिया में नवी पिल्लै एक बेहद बड़ा नाम हैं. दक्षिण अफ्रीकी मूल की पिल्लै 1999 से 2003 तक ‘इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट’ (ICC) की प्रेसिडेंट रह चुकी हैं और संयुक्त राष्ट्र (UN) की हाई कमिश्नर फॉर ह्यूमन राइट्स के रूप में उन्होंने रंगभेद, युद्ध अपराधों और मानवाधिकार हनन के खिलाफ ऐतिहासिक काम किया है.

नोबेल कमेटी ने उनके इसी निष्पक्ष और निस्वार्थ जीवनकाल के योगदान को सम्मान दिया है, जिससे ट्रंप के नोबेल जीतने के अरमानों (Donald Trump on Nobel Peace Prize) पर पानी फिर गया.

-भारत एक्सप्रेस



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