Bharat Express DD Free Dish

ट्रंप के छूटेंगे पसीने! 4.5 अरब डॉलर की विदेशी फंडिंग को रोकने पर खुद की पार्टी के सांसदों ने लगाई लताड़

Donald Trump Tariff: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 4.9 अरब डॉलर की विदेशी मदद रोक दी है। कांग्रेस को बायपास करते हुए लिए गए इस फैसले पर रिपब्लिकन सांसदों तक ने सवाल उठाए हैं. जानें क्यों यह मुद्दा अमेरिकी संविधान और राजनीति में बड़ा विवाद बन गया है.

donald trump

Donald Trump Tariff: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार देर रात अचानक ऐसा कदम उठाया, जिसने वॉशिंगटन की राजनीति में भूचाल ला दिया है. ट्रंप ने कांग्रेस द्वारा पहले ही मंजूर की गई 4.9 बिलियन डॉलर की विदेशी मदद को रोकने का फैसला किया है. यह रकम संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों से लेकर लोकतंत्र को बढ़ावा देने वाले कई अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों पर खर्च होनी थी.

मामला सिर्फ रकम का नहीं है, बल्कि अमेरिकी संविधान की उस व्यवस्था का भी है, जिसके मुताबिक सरकारी खर्च पर अंतिम नियंत्रण कांग्रेस के पास होता है. परंपरा यह है कि व्हाइट हाउस किसी भी फंडिंग को रोकने के लिए कांग्रेस की अनुमति लेता है. लेकिन इस बार राष्ट्रपति ट्रंप ने एक तकनीकी प्रावधान ‘पॉकेट रिसेशन’ का इस्तेमाल किया है, जो उन्हें कांग्रेस को बायपास करने की शक्ति देता है.

रिपब्लिकन सांसदों ने भी उठाए सवाल

ट्रंप का यह कदम न केवल डेमोक्रेट्स बल्कि उनकी अपनी रिपब्लिकन पार्टी में भी विवाद का कारण बन गया है. सीनेट अप्रॉप्रीएशंस कमेटी की चेयर सुसान कॉलिन्स ने इसे ‘गैरकानूनी’ करार दिया. उनका कहना है कि सरकारी खर्च में कटौती का सही तरीका द्विदलीय प्रक्रिया है, न कि संविधान को किनारे करना.

कई रिपब्लिकन सांसद भले ही खर्चों में कटौती का समर्थन कर रहे हों, लेकिन इस तरीके पर सवाल उठा रहे हैं. वहीं डेमोक्रेट्स ने आरोप लगाया है कि प्रशासन अब तक 425 बिलियन डॉलर से ज्यादा की राशि रोक चुका है.

45 दिनों के लिए फंडिंग रोके जाने का प्रावधान

व्हाइट हाउस के बजट डायरेक्टर रसेल वॉट का दावा है कि राष्ट्रपति के पास कानूनन 45 दिनों तक फंडिंग रोकने का अधिकार है. दिलचस्प बात यह है कि यह प्रावधान पिछली बार 1977 में इस्तेमाल हुआ था. इसके बाद से किसी भी राष्ट्रपति ने इसे हाथ नहीं लगाया था. इस बार भी, यदि 45 दिनों तक फंड जारी नहीं हुआ तो 30 सितंबर को वित्तीय वर्ष समाप्त हो जाएगा और रकम अपने आप खर्च से बाहर हो जाएगी.

संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने कहा कि इस फैसले का सीधा असर यूएन के बजट और लिक्विडिटी पर पड़ेगा. हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि वे इस बारे में अमेरिकी अधिकारियों से और जानकारी लेने की कोशिश कर रहे हैं.

ट्रंप का फैसला सीधे-सीधे संविधान उठा सवाल

अमेरिका में राष्ट्रपति और कांग्रेस के बीच ताकत की खींचतान कोई नई बात नहीं है. लेकिन इस बार मामला और गंभीर इसलिए हो गया है क्योंकि ट्रंप का फैसला सीधे-सीधे संविधान की उस मूल भावना को चुनौती देता है, जो कांग्रेस को वित्तीय नियंत्रण का अधिकार देती है.

जहां एक ओर ट्रंप खर्चों पर लगाम कसने की अपनी राजनीतिक छवि को मजबूत करना चाहते हैं, वहीं दूसरी ओर विपक्ष और उनके ही दल के वरिष्ठ सांसद मानते हैं कि यह कदम शासन की पारंपरिक सीमाओं को तोड़ने वाला है. आने वाले हफ्तों में यह मुद्दा न केवल अदालतों तक जा सकता है, बल्कि अमेरिकी चुनावी राजनीति में भी बड़ा बहस का विषय बन सकता है.

ये भी पढ़ें: ट्रम्प सरकार में भारतीयों की मुश्किलें बढ़ीं, वीजा से लेकर नौकरी तक हर मोर्चे पर संकट

Also Follow Bharat Express on Youtube

-भारत एक्सप्रेस 



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read