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“…तो हम इस गेम को हार जाएंगे”, ट्रंप के सबसे पक्के दोस्त ने भी टैरिफ पर नहीं दिया साथ, जमकर सुनाई खरी-खोटी, भारत के लिए कही ये बात

राष्ट्रपति एलेक्जेंडर स्टब (Alexander Stubb) ने ट्रंप से ग्लोबल साउथ, खासकर भारत के लिए विदेश मामलों में ज्यादा गरिमापूर्ण नजरिया अपनाने को कहा है.

Alexander Stubb

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और फिनलैंड के प्रेसीडेंट एलेक्जेंडर स्टब.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपनी टैरिफ नीति को लेकर दुनिया भर में आलोचनाओं के शिकार हो रहे हैं. अमेरिका के अर्थशास्त्रियों से लेकर पहले टर्म में उनकी सरकार का हिस्सा रहे कई अफसर भारत पर लगाए गए 50 फीसदी टैरिफ पर तीखी प्रतिक्रिया दे रहे हैं. इसी बीच ट्रंप के सबसे करीबी दोस्तों में शुमार फिनलैंड के राष्ट्रपति एलेक्जेंडर स्टब (Alexander Stubb) ने भी उन्हें नसीहत देते हुए अपना नजरिया बदलने को कहा है.

Alexander Stubb ने ट्रंप को दी नसीहत

फिनलैंड के राष्ट्रपति एलेक्जेंडर स्टब (Alexander Stubb) ने ट्रंप से ग्लोबल साउथ, खासकर भारत के लिए विदेश मामलों में ज्यादा गरिमापूर्ण नजरिया अपनाने को कहा है. उन्होंने कहा कि अगर विदेश नीति सहयोगी नहीं रही, तो पश्चिमी देश, खासकर अमेरिका अपना खेल हार जाएंगे.

उन्होंने (Alexander Stubb) अपने संदेश को लेकर कहा कि “मेरा संदेश सिर्फ यूरोपीय सहयोगियों के लिए ही नहीं है, बल्कि विशेष तौर पर अमेरिका के लिए ये है कि अगर हम भारत जैसे ग्लोबल साउथ के प्रति सम्मानजनक और सहयोगी विदेश नीति नहीं बनाते हैं, तो हम ये खेल हार जाएंगे.”

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बता दें कि राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत पर पहले 25 फीसदी टैरिफ लगाया था, उसके बाद उन्होंने भारत से रूस से तेल न खरीदने के लिए कहा था, लेकिन जब भारत ने उनकी इस बात को नहीं माना, तो उन्होंने अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ लगा दिया. हालांकि तब भी भारत ने अमेरिका से किसी भी तरह से समझौता न करने की बात कही.

भारत ने दिया करारा जवाब

भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने अपने एक बयान में साफ कर दिया था कि “भारत अपने किसानों और उद्यमियों के हितों के साथ कोई भी समझौता नहीं करेगा. उसे जहां भी अच्छा और सस्ता तेल मिलेगा, वहीं से खरीदेगा. इतना ही नहीं, जयशंकर ने अमेरिका के उन आरोपों पर भी करारा जवाब दिया, जिसमें अमेरिका ने कहा था कि भारत रूस से तेल खरीद कर रूस-यूक्रेन युद्ध को फंडिंग कर रहा रहै.

विदेश मंत्री ने इसपर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि चीन और यूरोपीय देश भी रूस से तेल खरीद रहे हैं, तो क्या वे पुतिन का खजाना नहीं भर रहे हैं.

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-भारत एक्सप्रेस



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