PM Modi In G7 Summit 2026
PM Modi In G7 Summit 2026: फ्रांस के एवियन में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विभिन्न वैश्विक नेताओं के साथ हुई द्विपक्षीय मुलाकातों ने यह स्पष्ट संकेत दिया है कि भारत की बहु-संतुलित (Multi-Alignment) विदेश नीति अब केवल कूटनीतिक रणनीति भर नहीं रह गई है, बल्कि इसके प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ भी सामने आने लगे हैं. भारत एक साथ कई प्रमुख वैश्विक शक्तियों के साथ अपने संबंधों को मजबूत कर रहा है और इसका असर व्यापार, निवेश तथा आर्थिक साझेदारी के रूप में दिखाई दे रहा है.
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के साथ प्रधानमंत्री मोदी की वार्ता के बाद यह महत्वपूर्ण निर्णय सामने आया कि भारत-ब्रिटेन व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (Comprehensive Economic and Trade Agreement) 15 जुलाई 2026 से प्रभावी होगा. इस समझौते से दोनों देशों के बीच व्यापारिक गतिविधियों को नई गति मिलने की उम्मीद है. साथ ही निवेश, सेवाओं, विनिर्माण और रोजगार सृजन के क्षेत्र में भी नए अवसर खुलेंगे. यह समझौता भारत और ब्रिटेन के आर्थिक संबंधों को एक नई ऊंचाई पर ले जाने वाला कदम माना जा रहा है.
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के साथ हुई चर्चा के बाद जारी संयुक्त वक्तव्य में भी सकारात्मक प्रगति का उल्लेख किया गया. दोनों नेताओं ने व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) पर चल रही वार्ताओं में हुई प्रगति पर संतोष व्यक्त किया और वर्ष 2026 के भीतर इस समझौते को अंतिम रूप देने की साझा प्रतिबद्धता दोहराई. यदि यह समझौता तय समय पर संपन्न होता है तो ऊर्जा, शिक्षा, नवाचार, कृषि और निवेश जैसे क्षेत्रों में भारत-कनाडा सहयोग को नया आयाम मिलेगा.
यूरोपीय संघ के साथ बातचीत में आर्थिक सहयोग रहा एजेंडा
वहीं यूरोपीय संघ के शीर्ष नेतृत्व के साथ प्रधानमंत्री मोदी की बातचीत में भी आर्थिक सहयोग प्रमुख एजेंडा रहा. यूरोपीय आयोग और यूरोपीय परिषद के नेताओं ने संकेत दिया कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौते को लेकर तेजी से काम आगे बढ़ रहा है और वर्ष के अंत तक इस पर हस्ताक्षर किए जाने की संभावना है. दुनिया के सबसे बड़े आर्थिक समूहों में से एक यूरोपीय संघ के साथ यह समझौता भारत के निर्यात, प्रौद्योगिकी सहयोग और निवेश प्रवाह को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है.
विदेश नीति को आर्थिक प्रगति से जोड़ना पीएम मोदी की नीति
इन तीनों घटनाक्रमों को एक साथ देखें तो यह स्पष्ट होता है कि प्रधानमंत्री मोदी की विदेश नीति का केंद्र केवल रणनीतिक संतुलन बनाना नहीं है, बल्कि उस संतुलन को भारत की आर्थिक प्रगति से जोड़ना भी है. भारत आज अमेरिका, यूरोप, ब्रिटेन, कनाडा, खाड़ी देशों और अन्य प्रमुख साझेदारों के साथ समानांतर रूप से संबंधों को आगे बढ़ा रहा है. इसका परिणाम यह है कि भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं, निवेश प्रवाह और व्यापारिक अवसरों का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभर रहा है.
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जी-7 शिखर सम्मेलन के इतर हुई ये बैठकें इस बात का प्रमाण हैं कि भारत की बहु-संतुलित कूटनीति अब ठोस आर्थिक उपलब्धियों में परिवर्तित हो रही है. ब्रिटेन के साथ व्यापार समझौते का क्रियान्वयन, कनाडा के साथ सीईपीए वार्ता में प्रगति और यूरोपीय संघ के साथ मुक्त व्यापार समझौते की दिशा में बढ़ते कदम इस बात को रेखांकित करते हैं कि भारत वैश्विक मंच पर अपनी कूटनीतिक सक्रियता को आर्थिक विकास के अवसरों में बदलने में सफल हो रहा है.
-भारत एक्सप्रेस
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