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‘समस्या और भी बदतर होती जा रही है’…समुद्री आतंकवाद-लुटेरों पर भारत और संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने जताई चिंता

भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी हरीश ने कहा कि समुद्र में आतंकवाद का मुकाबला करना और समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करना भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक हितों के लिए महत्वपूर्ण है.

भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी हरीश ने कहा कि समुद्र में आतंकवाद का मुकाबला करना और समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करना भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक हितों के लिए महत्वपूर्ण है. हरीश ने कहा, “भारत समुद्री सुरक्षा और आतंकवाद का मुकाबला करना अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक हितों के लिए महत्वपूर्ण मानता है.”

उन्होंने आगे कहा, ” लेकिन भारत की समुद्री सुरक्षा रणनीति व्यापक और बहुआयामी है”, जो पारंपरिक और गैर-पारंपरिक खतरों—आतंकवाद, समुद्री डकैती, तस्करी, मानव तस्करी और अवैध मछली पकड़ने—का सामना करती है.

आतंकवाद और समुद्री डकैती से होने वाले खतरे अन्य लोगों के लिए भी चिंता का विषय थे, जिन्होंने समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने पर सुरक्षा परिषद की खुली बहस में बात की.

समस्या और भी बदतर होती जा रही है

महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने कहा कि कोई भी देश “समुद्री डकैती, सशस्त्र डकैती, तस्करी और संगठित अपराध से लेकर शिपिंग, अपतटीय प्रतिष्ठानों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे के खिलाफ विनाशकारी कृत्यों और समुद्री क्षेत्र में आतंकवाद” के संकटों से अछूता नहीं है. उन्होंने चेताते हुए कहा कि समस्या और भी बदतर होती जा रही है.

सत्र की अध्यक्षता करते हुए ग्रीस के प्रधानमंत्री किरियाकोस मित्सोटाकिस (जो इस महीने परिषद की अध्यक्षता कर रहे हैं) ने तस्करी, आतंकवाद, समुद्री डकैती जैसे विषम समुद्री खतरों के बारे में इसी तरह की चेतावनी दी.

पी हरीश ने कहा, “भारत की समुद्री सुरक्षा रणनीति अपने लंबे समुद्र तट और समुद्री मार्गों की सुरक्षा के लिए मजबूत निगरानी, ​​प्रभावी समन्वय और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमताओं पर केंद्रित है.” साथ ही, उन्होंने कहा कि नई दिल्ली का दृष्टिकोण “मजबूत रक्षा क्षमताओं, क्षेत्रीय कूटनीति, अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और घरेलू बुनियादी ढांचे के विकास को संतुलित करता है”.

उन्होंने कहा कि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘महासागर’ के दृष्टिकोण पर आधारित है, जो क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास के लिए पारस्परिक और समग्र उन्नति का संक्षिप्त नाम है.

भारतीय नौसेना ने 35 से अधिक जहाजों की तैनाती की

पी हरिश ने कहा कि यह समुद्र में सुरक्षा और सहयोग को बढ़ावा देता है और इसे वैश्विक स्तर पर लागू किया जा सकता है. उदाहरण के तौर पर, उन्होंने पश्चिमी अरब सागर में शिपिंग हमलों और समुद्री डकैती के लिए भारतीय नौसेना की प्रतिक्रिया का हवाला दिया. बताया कि भारतीय नौसेना ने पश्चिमी अरब सागर में 35 से अधिक जहाजों की तैनाती की, 30 घटनाओं का जवाब दिया और 1,000 से अधिक बोर्डिंग ऑपरेशन किए, जिससे सैकड़ों नाविकों और करोड़ों डॉलर के व्यापारिक जहाजों को बचाया गया.

उन्होंने कहा कि इनसे लगभग 520 चालक दल के सदस्यों और विभिन्न लोगों की जान बच गई और 312 व्यापारी जहाजों की रक्षा हुई, जिनमें 11.9 मिलियन टन से अधिक माल था, जिसका मूल्य 5.3 बिलियन डॉलर से अधिक था.

टाइफून यागी के समय भारत ने चलाए राहत अभियान

भारत की नौसेना हूती विद्रोहियों के हमलों से जहाजों की रक्षा करने और लाल सागर क्षेत्र में प्रभावित जहाजों के चालक दल को बचाने के साथ-साथ समुद्री डाकुओं से सुरक्षा करने में सक्रिय थी. उन्होंने कहा कि पिछले साल जब टाइफून यागी तूफान ने हमला किया था, तब भारत ने म्यांमार, लाओस और वियतनाम में राहत अभियान चलाए थे.

हरीश ने कहा कि भारत समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अन्य देशों के साथ भी काम करता है, क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर संयुक्त नौसैनिक अभ्यासों में भाग लेता है. उन्होंने कहा कि इनमें से एक पिछले महीने दस अफ्रीकी देशों के साथ एक बड़े पैमाने पर अभ्यास था, ‘ऐक्यम्’, एकता के लिए संस्कृत शब्द, जो “अफ्रीका भारत प्रमुख समुद्री जुड़ाव” के संक्षिप्त रूप से बना है.

तंजानिया द्वारा सह-आयोजित छह दिवसीय अभ्यास उसके तट पर आयोजित किया गया था, और जिबूती से दक्षिण अफ्रीका तक नौ अफ्रीकी देशों ने इसमें भाग लिया था.


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-भारत एक्सप्रेस



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