Bharat Express DD Free Dish
Pension Mission Shakti Digital
Pension Mission Shakti Digital

एवियन में भारत-यूरोपीय संघ नेतृत्व की मुलाकात, आर्थिक साझेदारी को नई गति देने पर जोर

PM Modi EU Meeting: एवियन में भारत-यूरोपीय संघ नेतृत्व की मुलाकात में आर्थिक संबंधों को और व्यापक बनाने पर चर्चा हुई. हाल के वर्षों में दोनों पक्षों के बीच व्यापार, निवेश, हरित प्रौद्योगिकी, डिजिटल नवाचार, स्वच्छ ऊर्जा, आपूर्ति श्रृंखला और उन्नत विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में सहयोग लगातार बढ़ा है.

PM Modi EU Meeting

PM Modi EU Meeting

PM Modi EU Meeting: फ्रांस के एवियन में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुलाकात यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा (António Costa) और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला गर्ट्रूड वॉन डेर लेयेन (Ursula von der Leyen) से हुई. यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब भारत और यूरोपीय संघ (EU) के संबंध नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहे हैं और दोनों पक्ष आर्थिक तथा रणनीतिक सहयोग को और मजबूत बनाने के लिए लगातार प्रयासरत हैं.

प्रधानमंत्री मोदी ने बातचीत के दौरान इस बात का उल्लेख किया कि वर्ष की शुरुआत में भारत को यूरोपीय संघ के शीर्ष नेतृत्व की मेजबानी करने का अवसर मिला था, जब वे गणतंत्र दिवस समारोह में विशेष अतिथि के रूप में भारत आए थे. उस यात्रा ने दोनों पक्षों के बीच राजनीतिक विश्वास और रणनीतिक साझेदारी को नई मजबूती प्रदान की थी. अब एवियन में हुई यह मुलाकात उसी संवाद को आगे बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण अवसर बनी.

आर्थिक संबंधों को व्यापक बनाने पर हुई चर्चा

बैठक में मुख्य रूप से भारत और यूरोपीय संघ के बीच आर्थिक संबंधों को और व्यापक बनाने पर चर्चा हुई. हाल के वर्षों में दोनों पक्षों के बीच व्यापार, निवेश, हरित प्रौद्योगिकी, डिजिटल नवाचार, स्वच्छ ऊर्जा, आपूर्ति श्रृंखला और उन्नत विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में सहयोग लगातार बढ़ा है. मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को अंतिम रूप दिए जाने के बाद दोनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच व्यापारिक गतिविधियों और निवेश प्रवाह में और तेजी आने की उम्मीद है. इस समझौते से भारतीय उद्योगों को यूरोपीय बाजारों तक अधिक पहुंच मिलने के साथ-साथ यूरोपीय कंपनियों के लिए भी भारत में निवेश और व्यापार के नए अवसर खुलेंगे.

PM Modi EU Meeting

दोनों पक्षों ने इस बात पर भी सहमति जताई कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में विश्वसनीय और विविधीकृत आपूर्ति श्रृंखलाएं बेहद महत्वपूर्ण हो गई हैं. ऐसे में भारत और यूरोपीय संघ मिलकर वैश्विक आर्थिक स्थिरता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं. स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन, हरित हाइड्रोजन, जलवायु परिवर्तन से निपटने के प्रयास और तकनीकी सहयोग भी चर्चा के प्रमुख विषयों में शामिल रहे.

समझौते की ये है पृष्ठभूमि

भारत और यूरोपीय संघ के संबंध पिछले दो दशकों में लगातार मजबूत हुए हैं. यूरोपीय संघ भारत के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में से एक है और दोनों के बीच वार्षिक व्यापार सैकड़ों अरब डॉलर के स्तर तक पहुंच चुका है. इसके अलावा, यूरोपीय संघ भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) का भी एक प्रमुख स्रोत है. रक्षा, समुद्री सुरक्षा, साइबर सुरक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर, जलवायु कार्रवाई और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग का दायरा बढ़ रहा है.

वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में, जहां भू-राजनीतिक चुनौतियां और आर्थिक अनिश्चितताएं बढ़ रही हैं, भारत और यूरोपीय संघ दोनों लोकतांत्रिक मूल्यों, नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था और खुले एवं संतुलित वैश्विक व्यापार के पक्षधर हैं. यही कारण है कि दोनों के बीच बढ़ती साझेदारी को केवल आर्थिक संबंधों तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे वैश्विक शांति, स्थिरता और समावेशी विकास को बढ़ावा देने वाली एक महत्वपूर्ण रणनीतिक भागीदारी के रूप में देखा जा रहा है.

ये भी पढ़ें- होर्मुज स्ट्रेट पर वापिस खफा हुआ ईरान! अमेरिकी रिपोर्ट के दावे ने मचाई सनसनी, जानें पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर क्या पड़ेगा असर?

एवियन में हुई यह बैठक इस बात का संकेत है कि भारत और यूरोपीय संघ आने वाले वर्षों में व्यापार, निवेश, प्रौद्योगिकी और वैश्विक चुनौतियों से निपटने के क्षेत्रों में और अधिक निकट सहयोग की दिशा में आगे बढ़ेंगे, जिससे दोनों पक्षों के साथ-साथ वैश्विक समुदाय को भी लाभ मिलेगा.

-भारत एक्सप्रेस



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read


Pension Mission Shakti Digital