ईरान की सड़कों पर आज नजारा कुछ ऐसा है जिसे देखकर शायद ही कोई यकीन कर पाए. सालों से जिस देश में डर और सख्ती का साया था, आज वहीं की गलियों में आतिशबाजी हो रही है, लोग सड़कों पर नाच रहे हैं और गाड़ियां के हॉर्न बजाकर अपनी खुशी जाहिर कर रहे हैं. ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन की खबर के बाद से ही देश के अलग-अलग हिस्सों में जश्न का माहौल है, जो पूरी दुनिया को चौंका रहा है.
पहली बार ‘अच्छी खबर
इस जश्न के पीछे का दर्द और जज्बात को समझना बहुत जरूरी है. तेहरान से लेकर इस्फहान तक, सड़कों पर उतरे युवाओं और उन लोगों के लिए यह सिर्फ एक नेता की मौत नहीं है, बल्कि उस व्यवस्था के अंत की शुरुआत है जिसने उन्हें दशकों तक दबाकर रखा था. ईरानी पत्रकार और एक्टिविस्ट मसीह अलीनेजाद का सोशल मीडिया पर आया एक वीडियो इस पूरे माहौल को बयां करता है. वे कहती हैं कि सालों से वे हर सुबह इस खौफ के साथ उठती थीं कि उनके अपनों को मारा जा रहा है, लेकिन आज पहली बार उन्हें कोई ‘अच्छी खबर’ मिली है. वे खुशी से झूम उठीं और इसे अपने जीवन की एक नई शुरुआत मान रही हैं. यह चिल्लाने और हंसने का मौका उन लोगों के लिए है, जो लंबे समय से आजादी के लिए तड़प रहे थे.
सिक्के का दूसरा पहलू
हालांकि, सिक्के का दूसरा पहलू भी है. जहां एक ओर सड़कों पर लोग खुशियां मना रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सरकार समर्थकों और सरकारी मीडिया का चेहरा बिल्कुल अलग है. वहां के टीवी एंकर रोते हुए खबरें पढ़ रहे हैं और देश में 40 दिनों के राजकीय शोक का ऐलान किया गया है. लेकिन आम जनता, खासकर नई पीढ़ी के लिए, खामेनेई का 37 साल का शासन केवल दमन का प्रतीक रहा है. साल 2022 का ‘महिला-जीवन-आजादी’ आंदोलन हो या आर्थिक बर्बादी और अंतरराष्ट्रीय अलगाव, आम ईरानी खुद को उस शासन से कटा हुआ महसूस करते रहे हैं.
क्या है प्रिंस रेजा पहलवी की अपील
इस उथल-पुथल के बीच ईरान के निर्वासित क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी ने भी मोर्चा संभाल लिया है. उन्होंने देश के लोगों से अपील की है कि वे इस मौके पर एकजुट हों. उनका कहना है कि अब समय आ गया है कि एक स्थिर बदलाव की ओर कदम बढ़ाया जाए ताकि एक आजाद और खुशहाल भविष्य का सपना सच हो सके. उन्होंने सरकार को चेतावनी भी दी कि किसी भी उत्तराधिकारी को थोपने की कोशिश नाकाम ही रहेगी.
तानाशाही के अंत की दबी गूंज
सड़कों पर मच रही यह हलचल तानाशाही के अंत की एक दबी हुई गूंज है. एक तरफ गम है तो दूसरी तरफ उम्मीदों का सैलाब. फिलहाल, दुनिया की नजरें ईरान के इन बदलते रास्तों पर टिकी हैं, क्योंकि यह सिर्फ एक व्यक्ति के जाने का मामला नहीं है, बल्कि एक पूरे सिस्टम के बदलने का संकेत है.
ये भी पढ़ें: ‘वंशवाद’ के लिए राजशाही से लड़े..! ईरान के नए ‘बॉस’ का डिकोड, सवालों में क्यों ‘सुप्रीम लीडर’ का चुनाव?
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.


