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बारूद की गूंज और धुआं-धुआं आसमान! ईरान-अमेरिका युद्ध कैसे बन रहा है दुनिया के लिए क्लाइमेट टाइम बम?

Iran America war Climate Change: वाशिंगटन और तेहरान के बीच चल रहा युद्ध जलवायु परिवर्तन को और भी बदतर बना रहा है. युद्ध में भारी मात्रा में ऐसे उत्सर्जन को जन्म देते हैं जो पृथ्वी को गर्म करते हैं. जो आजीविका को नष्ट करते हैं, जलवायु परिवर्तन को बढ़ाते हैं.

Iran America war Climate Change

Iran America war Climate Change: ईरान-अमेरिका युद्ध अपने 17वें दिन में प्रवेश कर चुका है. अमेरिका और इजरायल लगातार इस मध्य पूर्वी देश में बमों की बरसात कर रहे हैं. जिसमें अबतक हजारों लोग मारे जा चुके हैं. वहीं ईरान भी पलटवार कर रहा है. लगातार मिसाइल और ड्रोन अटैक से अरब क्षेत्र के देशों में हाहाकार मचा हुआ है. बड़े औद्योगिक प्लांट बंद हैं, रिफाइनरी पर ताले लटक गए हैं. इसके अलावा ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को भी बंद कर दिया है. जहां से दुनिया का 20 प्रतिशत तेल व्यापार होता है. अब यह युद्ध एक कदम और आगे निकल चुका है.

वाशिंगटन और तेहरान के बीच चल रहा युद्ध जलवायु परिवर्तन को और भी बदतर बना रहा है. अमेरिका और इजरायल के इस हमले में जानमाल का काफी नुकसान हुआ है जिसमें ईरान के एक स्कूल पर मिसाइल गिरने से 150 से अधिक बच्चों की हत्या भी शामिल है. अब यह युद्ध एक त्रासदी की तरफ बढ़ रहा है. जिसमें जलवायु परिवर्तन भी जुड़ गया है.

कैसे जलवायु पर बढ़ रहा दबाव?

न्यू रिपब्लिक वेबसाइट में लिखे अपने आर्टिकल में मार्क हर्ट्सगार्ड औऱ गाइल्स ट्रेंडल लिखते हैं, किसी भी युद्ध में भारी मात्रा में ऐसे उत्सर्जन को जन्म देते हैं जो पृथ्वी को गर्म करते हैं.

उन्होंने आगे बताया कि यूक्रेन में रूस के युद्ध से उतना उत्सर्जन हुआ है, जितना फ्रांस एक साल में उत्सर्जित करता है. युद्ध से निकले उत्सर्जन भीषण गर्मी, सूखा और तूफान जैसे प्रभावों को जन्म देते हैं. जो आजीविका को नष्ट करते हैं, जलवायु परिवर्तन को बढ़ाते हैं. जिससे फसलें बर्बाद और संक्रामक रोगों में बढ़ोतरी होती है.

लेख में आगे बताया गया है कि कोई भी युद्ध बिना तेल के नहीं लड़ा जाता. युद्ध में भारी मात्रा में जीवाश्म ईंधन का उपोग होता है. जिससे वैश्विक स्तर पर ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन होता है.

ईरान-अमेरिका युद्ध का जलवायु पर प्रभाव

इजरायल ने हाल ही में ईरान के सबसे बड़े तेल भंडारण पर हमला कर दिया था. जिससे करीब 30 करोड़ लीटर तेल धू-धू कर जलने लगा. इस आगजनी से पूरे तेहरान के ऊपर काले बादल छा गए. जिसके बाद हुई बारिश ने स्थिति को और बदतर कर दिया. जलवायु वैज्ञानिकों ने तेजाबी वर्षा की चेतावनी दी है.

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ईरान पर किए गए दो परमाणु संपन्न देशों के हमले में जलवायु को काफी नुकसान हुआ है. तेहरान से उठे काले धुएं का प्रकोप भारत पर भी देखने को मिल सकता है.

-भारत एक्सप्रेस



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