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इजरायल-अमेरिका के हमलों से थर्राए ईरान ने अब कतर में अमेरिकी एयरबेस पर मिसाइलें दागीं; ईराक पर भी हमला

Iran Attacks US Base: ईरान ने कतर के अल-उदीद अमेरिकी एयरबेस और इराक पर मिसाइल हमले किए हैं. उसने कहा- ईरानी परमाणु ठिकानों पर हमले के जवाब में हमने ऐसा किया है. इन हमलों से मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ गया है.

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ईरान ने कतर में अमेरिकी एयरबेस पर दागी मिसाइलें, मध्य पूर्व में तनाव बढ़ा

इजरायल और अमेरिका के हमलों से थर्राए ईरान ने अरब प्रायद्वीप के देश कतर और ईराक में अमेरिकी एयरबेस पर हमले किए हैं. ईरानी बलों ने बीती रात कतर में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर छह मिसाइलें दागीं, जिससे मिडिल ईस्ट रीजन (मध्य पूर्व) में तनाव और बढ़ गया.

बता दें कि कतर के अल-उदीद एयरबेस, जो अमेरिका का इस क्षेत्र में सबसे बड़ा सैन्य अड्डा है, को ईरान की ओर से निशाना बनाया गया. इस बेस पर 8,000 से 10,000 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं. ईरान ने यह हमला 21 जून की रात को अमेरिका द्वारा ईरान के तीन परमाणु ठिकानों—फोर्डो, नतांज और इस्फहान—पर B-2 बॉम्बर से 13,608 किलो के बंकर बस्टर बम गिराए जाने के जवाब में किया.

iran missile city
ईरान की मिसाइलों की फोटो

कतर की ईरान के प्रति कड़ी प्रतिक्रिया

वहीं, ईरानी हमले को कतर ने अपनी संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया है. कतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माजिद अल अंसारी ने कहा, “हम इस हमले की कड़ी निंदा करते हैं. कतर अपने हवाई क्षेत्र की रक्षा और जवाबी कार्रवाई का अधिकार सुरक्षित रखता है.” उन्होंने यह भी दावा किया कि कतर की वायु रक्षा प्रणाली ने मिसाइलों को सफलतापूर्वक रोक लिया, जिससे कोई हताहत नहीं हुआ. कतर ने क्षेत्र में शांति के लिए सभी पक्षों से सैन्य कार्रवाइयां रोककर बातचीत शुरू करने की अपील की.

Airplanes
कई देशों में अब एयरस्पेस क्लोज कर दिया गया है.

हमलों का हवाई यातायात पर पड़ा असर

ईरानी हमले के बाद कतर ने एहतियाती कदम उठाते हुए अपने हवाई क्षेत्र में हवाई यातायात को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया. विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा, “नागरिकों और निवासियों की सुरक्षा के लिए यह कदम उठाया गया है.” वहीं, कुवैत और इजरायल भी अपना एयरस्‍पेस बंद कर चुके हैं.

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कमजोर हो सकती है क्षेत्रीय स्थिरता

कतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माजिद अल अंसारी ने चेतावनी दी है कि जो ईरान ने किया, वैसी सैन्य कार्रवाइयां क्षेत्रीय स्थिरता को कमजोर कर सकती हैं और उसके वैश्विक शांति पर गंभीर परिणाम हो सकते हैं. उन्होंने इजरायल की बढ़ती आक्रामकता को भी तनाव का कारण बताया. कतर ने पहले ही क्षेत्र में बढ़ते संघर्ष के खतरों की ओर ध्यान दिलाया था और अब भी बातचीत को एकमात्र समाधान मानता है.

अमेरिका-ईरान तनाव की पृष्ठभूमि

ईरान और अमेरिका के बीच यह तनाव तब शुरू हुआ, जब अमेरिका ने इजरायल के साथ मिलकर ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले किए. ईरान ने इसे अपनी संप्रभुता पर हमला माना और जवाबी कार्रवाई की बात कही. विशेषज्ञों का मानना है कि यह संघर्ष मध्य पूर्व में व्यापक युद्ध का रूप ले सकता है, जिसमें अन्य देश भी शामिल हो सकते हैं. कतर ने इस संकट में तटस्थ रहने की कोशिश की है, लेकिन अमेरिकी बेस पर हमले ने उसे भी जवाबी रूख अपनाने पर मजबूर किया.

कतर ने सभी पक्षों से संयम बरतने और कूटनीतिक रास्ते अपनाने की मांग की है. क्षेत्र में तनाव को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर इस घटनाक्रम पर टिकी है. क्या यह तनाव युद्ध में बदलेगा या बातचीत से सुलझेगा, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा.

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