Bharat Express DD Free Dish

ईरान में गृहयुद्ध जैसे हालात: पश्चिमी देशों की मीडिया ने किया 12 हजार मौतों का दावा, जर्मनी बोला- सरकार खत्म, रियाल की वैल्यू जीरो हुई

ईरान में आर्थिक संकट से शुरू हुआ विरोध अब सत्ता विरोधी आंदोलन बन गया है. सरकार पर दमन और इंटरनेट बंद कर सच्चाई छुपाने का आरोप लग रहा हैं.

ईरान में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन के बीच व्‍यापक हिंसा की खबरें सामने आ रही हैं. ब्रिटिश वेबसाइट ईरान इंटरनेशनल ने दावा किया है कि पिछले कुछ दिनों में कम से कम 12 हजार लोग मारे गए हैं. यह ईरान के आधुनिक इतिहास का सबसे बड़ा हत्याकांड बताया जा रहा है.

ईरान इंटरनेशनल ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि ये मौतें ज्यादातर 8 और 9 जनवरी की रातों में हुईं. ज्यादातर मारे गए लोग 30 साल से कम उम्र के युवा थे. वेबसाइट का कहना है कि यह आंकड़ा कई विश्वसनीय स्रोतों से लिया गया है. इनमें ईरान की सुरक्षा एजेंसियों के करीबी लोग, मेडिकल सेंटर और परिवारों के बयान शामिल हैं.

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि रिवोल्यूशनरी गार्ड्स और बसीज फोर्स ने सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के आदेश पर गोली चलाई. सरकार ने इंटरनेट और फोन सेवाएं बंद करके इन घटनाओं को छुपाने की कोशिश की है.

रॉयटर्स जैसी अन्य एजेंसियों ने मौतों की संख्या 2000 के आसपास बताई है, लेकिन ईरान इंटरनेशनल का दावा बहुत ज्यादा है. यह संख्या अभी भी विवादास्पद बनी हुई है.

जर्मनी के चांसलर का बड़ा बयान

भारत दौरे पर आए जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ट्ज ने मंगलवार को कहा कि ईरान में सरकार का खेल खत्म हो चुका है. उन्होंने कहा, “अगर कोई सरकार सिर्फ हिंसा से सत्ता में बनी रह सकती है, तो वह असल में खत्म हो चुकी है. हम अब इस शासन के अंतिम दिनों और हफ्तों को देख रहे हैं.” मर्ट्ज ने उम्मीद जताई कि ईरान में शांतिपूर्ण बदलाव हो सकता है. उनका यह बयान विरोध प्रदर्शनों के बीच अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ाने वाला है.

ट्रम्प ने मिलिट्री एक्शन रोका, लेकिन टैरिफ लगाया

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई का प्लान फिलहाल रोक दिया है. उन्होंने अमेरिकी सेना को तैयार रहने के आदेश दिए हैं, ताकि जरूरत पड़ते ही तुरंत एक्शन लिया जा सके. ट्रम्प ने सोमवार रात ट्रुथ सोशल पर पोस्ट किया कि ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाया जाएगा. यह फैसला तुरंत प्रभाव से लागू हो गया है.

व्हाइट हाउस से इस टैरिफ पर अभी कोई आधिकारिक दस्तावेज जारी नहीं हुआ है. यह कदम ईरान में जारी विरोध प्रदर्शनों और हिंसा के जवाब में उठाया गया है. चीन, संयुक्त अरब अमीरात और भारत ईरान के प्रमुख व्यापारिक साझेदार हैं. इन देशों पर इसका असर पड़ सकता है.

ईरान की करेंसी रियाल लगभग बेकार

ईरान की मुद्रा रियाल की कीमत अब बहुत गिर चुकी है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, 1 रियाल की कीमत भारतीय रुपए में सिर्फ 0.000079 रुपए रह गई है. यह स्थिति देश की आर्थिक बदहाली को दिखाती है. अमेरिका पहले से ही ईरान पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगा चुका है.

वर्ल्ड बैंक के 2022 के डेटा के अनुसार, ईरान का सबसे ज्यादा व्यापार चीन, UAE और भारत के साथ होता है. ईरान मुख्य रूप से तेल, पेट्रोकेमिकल्स और औद्योगिक उत्पाद निर्यात करता है. कुल व्यापार करीब 140 अरब डॉलर का था, जिसमें निर्यात 80.9 अरब और आयात 58.7 अरब डॉलर रहा.

ईरान में ये विरोध प्रदर्शन आर्थिक संकट, महंगाई और बेरोजगारी से शुरू हुए थे, लेकिन अब ये सरकार के खिलाफ बड़ा आंदोलन बन चुके हैं. अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर इस पर टिकी है.

ये भी पढ़ें: फ्रेंच प्रेसिडेंट के एडवाइजर Emmanuel Bonne दिल्‍ली में PM मोदी से मिले, जल्‍द भारत आएंगे इमैनुएल मैक्रों

-भारत एक्सप्रेस



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read