Bharat Express DD Free Dish

6000 KMPH की रफ्तार और 2000 KM की मार! ईरान ने ‘सेजिल’ मिसाइल से शुरू किया महाविनाश का नया अध्याय

iran US War Update: मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध में ईरान ने अपना सबसे घातक हथियार मैदान में उतार दिया है. ईरान ने पहली बार इस युद्ध में बैलिस्टिक मिसाइल ‘सेजिल’ का इस्तेमाल किया है. जिसकी पुष्टि खुद ईरानी अधिकारियों ने की है.

iran US War Update

iran US War Update: मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध में ईरान ने अपना सबसे घातक हथियार मैदान में उतार दिया है. ईरान ने पहली बार इस युद्ध में बैलिस्टिक मिसाइल ‘सेजिल’ का इस्तेमाल किया है. जिसकी पुष्टि खुद ईरानी अधिकारियों ने की है. बता दें कि, सेजिल को डांसिंग मिसाइल भी कहा जाता है.

सेजिल मिसाइल एक मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल है. यह ऊंचाई पर जाकर पैंतरेबाजी की क्षमता रखती है. डिफेंस एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह मिसाइल न केवल अमेरिकी और इजरायली डिफेंस सिस्टम को तबाह करने की क्षमता रखती है, बल्कि किसी भी हमले को इंटरसेप्ट कर चौगुनी तबाही मचाने की भी ताकत है.

इस मिसाइल की विशेषता उसकी हाई एल्टिट्यूड (High-Altitude) पर दिशा बदलने की क्षमता है. दूर से देखने पर यह डांस करते हुए दिखाई देती है. इसलिए इसे डांसिंग मिसाइल कहा जाता है.

ईरान ने सेजिल मिसाइल का इस्तेमाल ऐसे समय किया है जब यरूसलेम की तरफ से अगल तीन हफ्ते तक तेहरान के कई महत्वपूर्ण शहरों पर बमबारी की धमकी दी गई है. माना जा रहा है कि सेजिल मिसाइल इजरायल के आयरन डोम को भी भेदने की ताकत रखती है.

कैसे काम करती है सेजिल मिसाइल?

सेजिल मिसाइल ठोस इंधन आधारित प्रक्षेपास्त्र है. इसकी यहीं डिजाइन इसे रणनीतिक बढ़त दे देता है. ठोस इंधन वाली मिसाइलों को पुराने तरल ईंधन वाले सिस्टम की तुलना में कम समय में तैयार कर लॉन्च किया जा सकता है.

ईरान का ब्रह्मास्त्र है सेजिल

अमेरिकी हमले के बीच ईरान के द्वारा सेजिल मिसाइल का इस्तेमाल उसे रणनीतिक और सामरिक बढ़त दिलाने में बड़ी भूमिका निभा सकता है. इसकी खासियत है-

  • सेजिल को डांसिंग मिसाइल भी कहा जाता है
  • ऊंचाई पर पैंतरेबाजी की क्षमता
  • मारक क्षमता करीब 2000 किलोमीटर
  • सॉलिड-फ्यूल से ऑपरेट होने वाली मिसाइल
  • 700 किलोग्राम तक का पेलोड ले जाने में सक्षम
  • 6000 KMPH स्‍पीड की रफ्तार से अटैक करने में कैपेबल
  • लंबाई करीब 18 मीटर और वजन लगभग 23600 किलोग्राम

ये भी पढ़ें- Rajya Sabha Election 2026: बिहार में महागठबंधन को झटका, 4 विधायकों की गैरहाजिरी से NDA को फायदा; पांचों सीटों पर जीत तय

इस मिसाइल के विकास पर काम 1990 के दशक की शुरुआत में शुरू हुआ था. पहला परीक्षण प्रक्षेपण 2008 में हुआ, जिसमें मिसाइल लगभग 800 किलोमीटर तक गई. इसके बाद मई 2009 में बेहतर गाइडेंस और नेविगेशन सिस्‍टम के ट्रायल के लिए दूसरा प्रक्षेपण किया गया. साल 2009 के बाद चार और फ्लाइट ट्रायल हुए, जिनमें छठे परीक्षण के दौरान मिसाइल लगभग 1,900 किलोमीटर दूर हिंद महासागर तक पहुंची थी.

-भारत एक्सप्रेस



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read