Bharat Express DD Free Dish

क्या है इजरायल का अचूक हथियार आयरन बीम? जो लेबनान में बना हिजबुल्लाह का काल

इजरायल ने लेजर-आधारित एयर डिफेंस सिस्टम ‘आयरन बीम’ का पहली बार युद्ध में इस्तेमाल कर हिज्बुल्लाह के रॉकेट हवा में ही नष्ट कर दिए. कम लागत और हाई-टेक क्षमता वाली इस तकनीक पर अब भारत भी नजर बनाए हुए है…

Israel Iron Beam laser defense system: इजरायल ने इतिहास रचते हुए युद्ध के मैदान में पहली बार अपने लेजर-आधारित एयर डिफेंस सिस्टम आयरन बीम को सक्रिय किया है. हिज्बुल्लाह ने लेबनान से इजरायल पर भीषण रॉकेट और मिसाइल हमला किया था, जिसके जवाब में आयरन बीम ने कई रॉकेटों को आसमान में ही लेजर लाइट से नष्ट कर दिया. इजरायल ने इस कार्रवाई का एक वीडियो भी जारी किया है, जो इसकी तकनीकी श्रेष्ठता को साबित करता है.

इजरायल ने आयरन बीम को मैदान में उतारा

खामेनेई की मौत के बाद लेबनान(lebanon) में मौजूद हिज्बुल्लाह ने गुस्से में इजरायल पर बड़े पैमाने पर रॉकेट और मिसाइल हमले शुरू किए. इन हमलों को रोकने के लिए इजरायल ने आयरन बीम को पहली बार युद्ध में उतारा. वीडियो में दिखाया गया है कि रात के आसमान में हिज्बुल्लाह के रॉकेट रोशनी करते हुए आगे बढ़ रहे थे, लेकिन आयरन बीम ने उन्हें लेजर बीम से पलक झपकते ही नष्ट कर दिया. इजरायली वॉर रूम ने इसे “युद्ध के नए दौर” का डिफेंस सिस्टम बताया है.

आयरन बीम कैसे करता है काम?(Iron Beam)

आयरन बीम फाइबर लेजर टेक्नोलॉजी पर आधारित है. यह बिजली की ऊर्जा से लेजर बीम निकालता है और रॉकेट, मिसाइल, ड्रोन या मोर्टार जैसे छोटे हवाई खतरों को नष्ट करता है. जब तक बिजली सप्लाई है, यह लगातार काम कर सकता है. एक रॉकेट को रोकने की लागत सिर्फ 2 डॉलर से कम है, जबकि आयरन डोम जैसे मिसाइल-आधारित सिस्टम में लाखों डॉलर खर्च होते हैं.

इजरायल ने राफेल एडवांस्ड डिफेंस सिस्टम्स और एल्बिट सिस्टम्स के साथ 500 मिलियन डॉलर से ज्यादा का कॉन्ट्रैक्ट किया है ताकि आयरन बीम का उत्पादन तेज किया जा सके. इसे सितंबर 2025 में ऑपरेशनल घोषित किया गया था और दिसंबर में सेना को सौंपा गया.

यह भी पढ़ें: खामेनेई की हत्या के पीछे किसकी बड़ी साजिश? सऊदी कनेक्शन पर वाशिंगटन पोस्ट का सनसनीखेज दावा

भारत की भी नजर इस तकनीक पर

भारत इस तकनीक(Iron Beam) को लेकर काफी दिलचस्पी रखता है. DRDO (रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन) पहले से ही लेजर-आधारित एयर डिफेंस सिस्टम पर काम कर रहा है. आयरन बीम की सफलता भारत के लिए एक बड़ा संकेत है. भारत ने पहले ही इजरायल से आयरन डोम जैसी तकनीक में सहयोग किया है. विशेषज्ञों का मानना है कि भारत जल्द ही आयरन बीम जैसी लेजर तकनीक को अपने डिफेंस सिस्टम में शामिल कर सकता है, खासकर पाकिस्तान और चीन से आने वाले ड्रोन और रॉकेट खतरों से निपटने के लिए.

Also Follow Bharat Express on Youtube

-भारत एक्सप्रेस



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read

Latest