Karachi US Consulate Attack: ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की खबर ने पाकिस्तान के सबसे बड़े शहर कराची को अखाड़े में तब्दील कर दिया है. रविवार को गुस्साए प्रदर्शनकारियों, जिनमें मुख्य रूप से शिया समुदाय के लोग शामिल थे, ने कराची के रेड ज़ोन स्थित अमेरिकी वाणिज्य दूतावास (US Consulate) पर जोरदार हमला बोल दिया. इस दौरान हुई हिंसक झड़पों में अब तक 9 लोगों की मौत हो गई है और दर्जनों घायल हैं.
ऑपरेशन ‘एपिक फ्यूरी’ का असर
28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल ने संयुक्त रूप से ईरान पर ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ शुरू किया था. तेहरान स्थित खामेनेई के कार्यालय पर हुए हमले में उनकी मौत की पुष्टि के बाद पूरी मुस्लिम दुनिया में आक्रोश फैल गया. पाकिस्तान, जहाँ बड़ी संख्या में शिया आबादी है, वहां इस घटना का सबसे उग्र असर देखने को मिला है.
क्या-क्या हुआ Karachi में?
खामेनेई की मौत के विरोध में हजारों लोग ‘ईरान जिंदाबाद’ और ‘अमेरिका-इजरायल मुर्दाबाद’ के नारे लगाते हुए सड़कों पर उतर आए. प्रदर्शनकारी लाठी-डंडों से लैस होकर दूतावास के प्रवेश द्वार तक पहुँच गए. सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में भीड़ को दूतावास की खिड़कियाँ तोड़ते और परिसर के एक हिस्से (गार्ड हाउस) में आग लगाते देखा जा सकता है.
भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने पहले आंसू गैस के गोले दागे और लाठीचार्ज किया. स्थिति बेकाबू होते देख सुरक्षा बलों को हवाई फायरिंग और सीधी गोलीबारी करनी पड़ी. कराची के सिविल अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर के अनुसार, अब तक 9 प्रदर्शनकारियों की मौत की पुष्टि हो चुकी है. मरने वालों में से अधिकांश को गोलियां लगी हैं. घायल अवस्था में कई लोगों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जिनमें से कुछ की हालत गंभीर बनी हुई है.
सुरक्षा घेरा और यातायात ठप
हिंसा को देखते हुए पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने पूरे राजनयिक इलाके (Diplomatic Zone) की घेराबंदी कर दी है. माई कोलाची से सुल्तानाबाद जाने वाले रास्ते पूरी तरह बंद कर दिए गए हैं. जिन्ना ब्रिज से आने वाले ट्रैफिक को I.I. चुंदरीगर रोड की तरफ मोड़ दिया गया है. प्रशासन ने आम जनता से इस संवेदनशील इलाके से दूर रहने की अपील की है.
36 साल के कड़े शासन का अंत
अयातुल्ला अली खामेनेई 1989 से ईरान के सर्वोच्च नेता थे. उन्होंने तीन दशक से अधिक समय तक ईरान की सत्ता पर कठोर नियंत्रण बनाए रखा. उनकी मौत को अमेरिका और इजरायल ने अपनी बड़ी जीत बताया है, जबकि ईरान ने इसे ‘नग्न आक्रामकता’ करार देते हुए 40 दिनों के शोक की घोषणा की है.
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कराची (Karachi) की यह घटना संकेत देती है कि मध्य पूर्व का तनाव अब क्षेत्रीय सीमाओं को लांघकर पड़ोसी देशों तक पहुँच गया है. पाकिस्तान में ईरान समर्थक समूहों का यह उग्र प्रदर्शन आने वाले दिनों में अमेरिकी हितों के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है. फिलहाल कराची में भारी तनाव के बीच अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात हैं.
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