Bharat Express DD Free Dish

बेगाने युद्ध में पाकिस्तान दिवाना! ईरान संकट के बीच पाकिस्तान की नई चाल, सऊदी-तुर्की संग अब मिस्र को भी साथ जोड़ने की कोशिश

US Israel Iran conflict: सऊदी अरब में हुई बैठक में तुर्की, मिस्र, पाकिस्तान और सऊदी अरब ने रक्षा सहयोग पर चर्चा की. ईरान और अमेरिका-इजरायल तनाव के बीच मुस्लिम देशों में नई एकजुटता दिख रही है.

US Israel Iran conflict: पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष अब सिर्फ युद्ध तक सीमित नहीं रहा, बल्कि नए गठबंधन और रणनीतिक समीकरण भी सामने आ रहे हैं. ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच बढ़ते तनाव के बीच मुस्लिम देशों में एक नई एकजुटता की तस्वीर उभर रही है. इसी कड़ी में सऊदी अरब की राजधानी रियाद में एक अहम बैठक हुई, जिसमें तुर्की, मिस्र, पाकिस्तान और सऊदी अरब के विदेश मंत्रियों ने मिलकर रक्षा सहयोग पर गंभीर चर्चा की.

बैठक का मकसद

इस बैठक में यह समझने की कोशिश की गई कि क्षेत्रीय देश अपनी ताकतों को कैसे जोड़ सकते हैं ताकि सुरक्षा का जिम्मा खुद उठा सकें. तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने साफ कहा कि अब वक्त आ गया है कि क्षेत्र के देश खुद मिलकर समस्याओं का समाधान करें, वरना बाहरी ताकतें अपने हितों के हिसाब से फैसले थोपेंगी.

तुर्की की पहल

तुर्की पिछले एक साल से पाकिस्तान और सऊदी अरब के साथ रक्षा समझौते की कोशिश कर रहा है. अब मिस्र को भी इसमें शामिल करने की पहल की गई है. यह गठबंधन नाटो जैसा नहीं होगा, बल्कि एक ऐसा प्लेटफॉर्म होगा जहां रक्षा उद्योग, टेक्नोलॉजी और सैन्य सहयोग को बढ़ावा दिया जाएगा.

हर देश की खासियत

इस संभावित गठबंधन में हर देश अपनी विशेष ताकत लेकर आ रहा है. तुर्की एडवांस ड्रोन और डिफेंस टेक्नोलॉजी में आगे है, पाकिस्तान के पास परमाणु क्षमता है, सऊदी अरब तेजी से टेक्नोलॉजी हब बन रहा है और मिस्र अपनी बड़ी सेना और रणनीतिक स्थिति के कारण अहम भूमिका निभा सकता है.

ईरान पर चर्चा

बैठक में ईरान की भूमिका पर भी चर्चा हुई. जहां तुर्की लगातार इजरायल को संघर्ष का मुख्य कारण बताता रहा है, वहीं इस बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में ईरान की आलोचना ज्यादा तीखी रही. खासकर खाड़ी देशों पर उसके हमलों को लेकर चिंता जताई गई. इससे साफ है कि मुस्लिम देशों के बीच पूरी तरह एक राय नहीं है, लेकिन फिर भी वे साझा मंच बनाने की कोशिश कर रहे हैं.

हाल का घटना

तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन के मिस्र दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच रक्षा समझौता हुआ था, जिसमें हथियारों की सप्लाई और उत्पादन को लेकर बड़ी डील साइन की गई. यह संकेत है कि क्षेत्रीय देश अब भविष्य की रणनीति खुद तय करना चाहते हैं.

ये भी पढ़ें-पद्मा नदी में बड़ा हादसा: दौलतदिया फेरी टर्मिनल पर बस नदी में गिरी, 23 की मौत

मिडिल ईस्ट की जंग ने एक नई दिशा दे दी है. अब देश सिर्फ लड़ाई नहीं लड़ रहे, बल्कि आने वाले समय की राजनीति और सुरक्षा समीकरण भी तय कर रहे हैं. अगर यह गठबंधन बनता है, तो यह बाहरी ताकतों के प्रभाव को चुनौती देगा और खासतौर पर अमेरिका के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है. दूसरी ओर, ईरान भी खाड़ी देशों के साथ एकता बनाने की कोशिश कर रहा है.

Also Follow Bharat Express on Youtube

-भारत एक्सप्रेस



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read