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पाकिस्तान में फिर निशाने पर आए अल्पसंख्यक स्थल: 100 साल पुराना मंदिर जमींदोज, अल्पसंख्यक समुदायों में बढ़ी चिंता

Pakistan Hindu Temple Demolished: पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के नारोवाल में 100 साल से अधिक पुराने एक हिंदू मंदिर के ढहने के बाद देश के अल्पसंख्यक समुदायों में चिंता बढ़ गई है. एक रिपोर्ट के अनुसार, विभिन्न पक्षों के अलग-अलग दावों ने इस मामले को और विवादित बना दिया है.

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पाकिस्तान में 100 साल पुराना मंदिर जमींदोज (इमेज-IANS)

Pakistan Hindu Temple Demolished: पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के नारोवाल में 100 साल से अधिक पुराने एक हिंदू मंदिर के ढहने के बाद देश के अल्पसंख्यक समुदायों में चिंता बढ़ गई है. एक रिपोर्ट के अनुसार, विभिन्न पक्षों के अलग-अलग दावों ने इस मामले को और विवादित बना दिया है.

अल्पसंख्यक अधिकारों के लिए काम करने वाले संगठन पाकिस्तान मसीहा मिल्लत पार्टी ने आरोप लगाया है कि मंदिर को जानबूझकर गिराया गया, ताकि पास स्थित एक मदरसे के लिए अधिक जगह बनाई जा सके.

भारी बारिश के चलते मंदिर ढहने का दावा

वहीं, पाकिस्तान के इवैक्यूई ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड (जो विभाजन के बाद भारत चले गए हिंदू और सिख समुदाय की संपत्तियों का प्रबंधन करता है) का कहना है कि मंदिर भारी बारिश के कारण ढह गया. पंजाब सरकार ने भी ईटीपीबी के इस दावे का समर्थन किया है.

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पाकिस्तान में 100 साल पुराना मंदिर जमींदोज (इमेज-IANS)

पीएमएमपी के अध्यक्ष असलम परवेज साहोत्रा ने कहा कि उन्होंने और स्थानीय लोगों ने पंजाब के अतिरिक्त गृह सचिव को लिखित शिकायत देकर मंदिर गिराने के लिए जिम्मेदार लोगों और इसकी सुरक्षा में विफल अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है.

मंदिर में चल रहा था अवैध मदरसा

उन्होंने कहा कि जनवरी में सियालकोट स्थित ईटीपीबी के उप निदेशक ने मदरसे का पट्टा रद्द करने, अवैध कब्जाधारियों को संपत्ति खाली करने और परिसर को सील करने का आदेश दिया था, लेकिन इस आदेश को कभी लागू नहीं किया गया.

पीएमएमपी का आरोप है कि मंदिर को धीरे-धीरे तोड़कर उसकी ईंटें और लोहे जैसी सामग्री वहां से हटा दी गई थी. संगठन का कहना है कि यदि मंदिर केवल बारिश से ढहा होता तो निर्माण सामग्री के गायब होने का कोई कारण नहीं होता. उन्होंने मंदिर को उसके मूल स्वरूप में फिर से बनाने और पंजाब सरकार से हिंदू मंदिरों, सिख गुरुद्वारों और ईसाई चर्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है.

अल्पसंख्यकों के साथ हो रहा उत्पीड़न

रिपोर्ट में कहा गया है कि इस मामले ने अल्पसंख्यक समुदायों की पुरानी चिंताओं को फिर से जगा दिया है. उनका कहना है कि इससे पहले भी कई धार्मिक और विरासत स्थलों को विवादित परिस्थितियों में नुकसान पहुंचा है.

रिपोर्ट के अनुसार, जून महीने में फारूकाबाद स्थित 125 साल पुराने गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा साहिब के कुछ हिस्सों को मलबे में बदल दिया गया था. आरोप था कि एक स्थानीय कारोबारी ने बिना कानूनी अनुमति और अदालत के आदेश के वहां ध्वस्तीकरण का काम कराया.

रात में प्रशासन ने तोड़ा था गुरुद्वारा

इस घटना के बाद सिख समुदाय के लोगों ने सड़कों पर प्रदर्शन किया, तब जाकर प्रशासन ने मामले को स्वीकार किया. रिपोर्ट में कहा गया कि 24 जून की रात मशीनों ने उस इमारत को नुकसान पहुंचाया, जिसे पीढ़ियों से पवित्र माना जाता था.

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बाद में अधिकारियों ने माना कि विभाग ने समय रहते इस मामले पर ध्यान नहीं दिया और केवल सिख समुदाय के विरोध के बाद कार्रवाई की गई. साथ ही गुरुद्वारे के पुनर्निर्माण का आश्वासन भी दिया गया.

(IANS की रिपोर्ट पर आधारित)



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