पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने हूती विद्रोहियों को चेतावनी दी है (इमेज-Bharat Express)
Pakistan Warning To Houthis: यमन में मौजूद हूती विद्रोहियों के सऊदी अरब पर हमले से पाकिस्तान खौफ में आ गया है. उसने हूती विद्रोहियों को गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी है. पाकिस्तान ने यह भी कहा है कि अगर यमन में चल रही लड़ाई सऊदी अरब तक फैली तो वो मक्का डिफेंस पैक्ट शुरू कर देगा. मक्का पैक्ट समझने से पहले हमें यह समझना होगा कि आखिर यमन में हूती और सऊदी अरब के बीच लड़ाई क्यों हो रही है?
दरअसल यमन में करीब 99 प्रतिशत जनसंख्या मुस्लिम है. इनमें से 55-65 प्रतिशत लोग सुन्नी मुस्लिम हैं और 35-45 प्रतिशत लोग शिया हैं. यमन में हजारों सालों तक शिया मुस्लिमों का शासन रहा, लेकिन 1962 में सेना ने विद्रोह कर शिया शासन को उखाड़ फेंका और लोकतंत्र लागू कर दिया. हालांकि साल 2011 में राष्ट्रपति अब्दुल्ला सालेह के खिलाफ लोग सड़कों पर उतर आए और 33 सालों से सत्ता पर कब्जा किये सालेह को उखाड़ फेंका.
इससे यमन के शिया नाराज हो गए और कुछ कट्टरपंथी शियाओं ने मिलकर एक गुट बनाया जिसे, हूती विद्रोही कहा जाता है. हूती विद्रोहियों में अधिकतर शिया मुसलमान हैं. जिन्हें इरान समर्थन देता है, वहीं सऊदी अरब अप्रत्यक्ष रूप से वहां के सुन्नी मुसलमानों को समर्थन देता आया है.
हूतियों के हमले में लहूलुहान हुआ सऊदी
हाल में यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब पर हमले शुरू कर दिए. हूती विद्रोहियों ने मिसाइलों और ड्रोन की मदद से दक्षिणी शहरों में नागरिक और आर्थिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया. जिससे सऊदी अरब के ऊर्जा प्रतिष्ठानों में आग लगी और 73 लोग घायल हो हए.
यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के अन्य प्रमुख सैन्य और सामरिक ठिकानों को भी निशाना बनाया. जिससे मक्का समझौते की प्रासंगिकता पर सवाल खड़े हो गए हैं.
इसके जवाब में पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने हूती विद्रोहियों को चेतावनी दी है. आसिफ ने कहा कि समझौते में शामिल किसी एक देश पर हमला सभी पर हमला माना जाएगा, और मक्का पैक्ट को लेकर कोई अस्पष्टता नहीं है. उन्होंने कहा कि सऊदी अरब पर हूतियों के हमलों के बाद यह समझौता सक्रिय हो सकता है.
युद्ध की आग न भड़काए हूती
ख्वाजा आसिफ ने यह भी कहा कि किसी सदस्य देश के खिलाफ बिना उकसावे की गई आक्रामकता, या यमन संघर्ष के सऊदी अरब तक फैलने की स्थिति में, पिछले महीने मक्का में हुए समझौते के तहत सामूहिक कार्रवाई हो सकती है.
उन्होंने हूती विद्रोहियों को कड़े शब्दों में चेतावनी दी कि वे युद्ध की आग को सीमा पार फैलाने की भारी भूल न करें.
यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब हूथी सेना ने दक्षिणी सऊदी शहरों और एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं, जिससे लड़ाई तेज़ी से बढ़ गई है जो 2022 के युद्धविराम के बाद से काफी हद तक काबू में थी.
क्या है मक्का पैक्ट?
7 अगस्त 2026 को सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान के बीच मक्का पैक्ट हुआ था, जिसे पश्चिम एशिया की भू-राजनीति में एक अहम कदम माना गया. इसकी सबसे बड़ी बात यह बताई गई कि यह नाटो जैसा समझौता है, यानी अगर तीनों में से किसी एक भी देश पर हमला होता है, तो उसे तीनों देशों पर हमला माना जाएगा. तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने इसे NATO के ‘आर्टिकल 5’ (सामूहिक सुरक्षा) जैसा बताया था.
इस डिफेंस पैक्ट का मकसद था सऊदी अरब की आर्थिक ताकत, पाकिस्तान की सैन्य शक्ति और तुर्की की डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को मिलाकर एक नया सुरक्षा ढांचा तैयार करना. जिससे अरब क्षेत्र में ईरान सहित इजरायल और दूसरे आतंकी संगठनों का मुकाबला किया जा सके.
क्या कागजी शेर है मक्का पैक्ट?
अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या पैक्ट सिर्फ कागजी है. रिपोर्ट्स के मुताबिक अभी तक पाकिस्तान या तुर्की की तरफ से कोई ठोस सैन्य कार्रवाई नहीं दिखी है, सिर्फ बयानबाजी हुई है.
सऊदी अरब पर हूती हमलों के बाद बाकी दोनों देश सिर्फ निंदा ही कर रहे हैं. जबकि हूतियों के हमले सऊदी अरब पर लगातार हो रहे हैं.
हूतियों ने भी दी जवाबी कार्रवाई की धमकी
वहीं सऊदी और पाकिस्तान की तरफ से आई चेतावनी का हूति विद्रोहियों ने भी जवाबी कार्रवाई की धमकी दी है.
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रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता अब अपनी पहली बड़ी अग्निपरीक्षा से गुजर रहा है, और यह साफ होना बाकी है कि पाकिस्तान-तुर्की को सीधे हस्तक्षेप करना होगा या नहीं.
-भारत एक्सप्रेस
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