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दक्षिण अफ्रीका की नावी को नोबेल शांति पुरस्कार, रंगभेद के खिलाफ लड़ी मजबूत लड़ाई, जानिये क्या है भारतीय कनेक्शन?

Nobel Peace Prize: महात्मा गांधी के अहिंसा और न्याय के रास्ते पर चलने वाली नवनेथेम ‘नावी’ पिल्लई को साल 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार देने की घोषणा हुई है. दक्षिण अफ्रीका की रहने वाली नावी पिल्लई ने रंगभेद के खिलाफ लड़ाई लड़ने वाले कार्यकर्ताओं का बचाव किया.

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दक्षिण अफ्रीका के नावी को नोबेल शांति पुरस्कार, रंगभेद के खिलाफ लड़ी मजबूत लड़ाई

Nobel Peace Prize: महात्मा गांधी के अहिंसा और न्याय के रास्ते पर चलने वाली नवनेथेम ‘नावी’ पिल्लई को साल 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार देने की घोषणा हुई है. दक्षिण अफ्रीका की रहने वाली नावी पिल्लई ने रंगभेद के खिलाफ लड़ाई लड़ने वाले कार्यकर्ताओं का बचाव किया. आगे चलकर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवाधिकारों के क्षेत्र में अहम भूमिका निभाई.

नावी पिल्लई का जन्म दक्षिण अफ्रीका के डरबन में भारतीय तमिल मूल के एक परिवार में हुआ था. साल 1967 में उन्होंने अपनी खुद की लॉ फर्म शुरू की. 1980 के दशक में उन्होंने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ाई की और 1988 में वहां से डॉक्टर ऑफ ज्यूरिडिकल साइंस (SJD) की डिग्री हासिल की.

साल 1995 में डॉ. पिल्लई को दक्षिण अफ्रीका के हाई कोर्ट में नियुक्त किया गया. इसके चार साल बाद वह रवांडा के लिए बने अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायाधिकरण (ICTR) की जज और अध्यक्ष बनीं. यहां उन्होंने यौन हिंसा, बलात्कार और दुष्प्रचार को मानवता के खिलाफ अपराध और नरसंहार के आरोपों का आधार बनाने में अहम भूमिका निभाई.

फिलिस्तीन से लेकर म्यांमार तक पर नजर

इसके बाद उन्हें अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) में जज नियुक्त किया गया. साल 2008 से 2014 तक उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार उच्चायुक्त (OHCHR) के रूप में काम किया.

नावी पिल्लई ने 2021 से 2025 तक कब्जे वाले फिलिस्तीनी क्षेत्र पर संयुक्त राष्ट्र के स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय जांच आयोग की अध्यक्षता भी की. साल 2019 में वह अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) में एक अस्थायी जज बनीं. उस मामले में म्यांमार पर नरसंहार करने के आरोप लगे थे.

नोबेल समिति ने क्यों किया उनका चयन?

नॉर्वे की नोबेल समिति ने अंतरराष्ट्रीय कानून और व्यवस्था की प्रणाली को विकसित करने में नावी पिल्लई की भूमिका को अहम माना है. समिति ने उनके न्यायिक कार्यों में सख्ती, व्यक्तिगत ईमानदारी और असाधारण साहस को भी रेखांकित किया है.

ऐसे समय में, जब दुनिया में युद्ध और संघर्ष बढ़ रहे हैं और अंतरराष्ट्रीय कानून से जुड़ी अदालतों तथा संस्थानों को राजनीतिक हमलों का सामना करना पड़ रहा है, नोबेल समिति ने एक महत्वपूर्ण संदेश दिया है. समिति के मुताबिक, बिना ताकत या हिंसा का इस्तेमाल किए विवादों को सुलझाने की क्षमता अंतरराष्ट्रीय कानून के शासन पर निर्भर करती है.

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एक ऐसी अंतरराष्ट्रीय कानूनी व्यवस्था, जिसमें युद्ध अपराध करने वालों को उनके किए की सजा मिले और अत्याचार के पीड़ितों को न्याय मिले, शांतिपूर्ण दुनिया के निर्माण के लिए जरूरी है.

-भारत एक्सप्रेस



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