Nepal communal violence
Nepal Communal Violence: नेपाल में दो समुदायों के बीच शुरू हुई हिंसक झड़प अब कई जिलों तक फैल गई है. हालात को देखते हुए प्रशासन ने धनुषा, सिराहा और सुनसरी के कई इलाकों में कर्फ्यू लगा दिया है. हिंसा और विरोध प्रदर्शन के कारण मधेस और कोशी प्रांत में तनाव बना हुआ है.
सबसे खराब स्थिति सुनसरी जिले में बताई जा रही है. यहां नेपाल पुलिस के साथ आर्म्ड पुलिस फोर्स की अतिरिक्त टुकड़ियां तैनात की गई हैं. प्रशासन का कहना है कि कुछ इलाकों में हालात धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हैं, लेकिन एहतियात के तौर पर सख्ती अभी भी की गई है.
हिंसा में अब तक तीन लोगों की मौत हो चुकी है. मृतकों की पहचान जय प्रकाश मेहता, ओम प्रकाश मेहता और गणेश यादव के रूप में हुई है. बताया जा रहा है कि तीनों की मौत पुलिस की गोली लगने से हुई. बड़ी संख्या में आम लोग और सुरक्षाकर्मी घायल भी हुए हैं.
सिराहा जिले के गोलबाजार में हालात उस समय और बिगड़ गए, जब उपद्रवियों ने 11 मोटरसाइकिलों में आग लगा दी. दमकलकर्मियों ने काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया.
🚨 Tension in Nepal.
Nepal on edge again.Communal tensions have escalated in parts of southern Nepal, with curfews imposed and security forces deployed to contain the violence. Authorities are urging residents to remain indoors as the situation remains tense.#Nepal… pic.twitter.com/cbl7RVA12T
— Sunanda Acharya (@Sunanda_Iam) July 30, 2026
नेपाल सरकार ने मृतकों के परिवारों को दो-दो लाख नेपाली रुपये मुआवजा देने का ऐलान किया है. घायलों को 50-50 हजार नेपाली रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी.
कई इलाकों में आवाजाही पर रोक
हिंसा फैलने के बाद धनुषा जिले के लक्ष्मीनिया हाट बाजार, बेलौनी रोड, नगराइन नगरपालिका, दूधमती पुल और जनकपुरधाम के कुछ हिस्सों में कर्फ्यू लगाया गया है. सिराहा के गोलबाजार और सुनसरी के कई संवेदनशील इलाकों में भी लोगों की आवाजाही पर रोक है.
कर्फ्यू के दौरान धरना, प्रदर्शन और सभा करने की अनुमति नहीं होगी. चार या उससे अधिक लोगों के एक जगह इकट्ठा होने पर भी पाबंदी लगाई गई है.
कांवड़ यात्रा के दौरान शुरू हुआ विवाद
तनाव की शुरुआत 26 जुलाई को सुनसरी जिले के कपतांगंज से हुई थी. वहां कांवड़ यात्रा निकाली जा रही थी. इसी दौरान धार्मिक झंडे लगाने और लाउडस्पीकर बजाने को लेकर दूसरे समुदाय के लोगों ने आपत्ति जताई.
पहले कहासुनी हुई…फिर पथराव शुरू हो गया
भीड़ को काबू करने के लिए पुलिस ने पहले हवाई फायरिंग की, लेकिन हालात नहीं संभले. इसके बाद पुलिस ने गोली चलाई, जिसमें ओम प्रकाश मेहता की मौत हो गई. बाद में घायल जय प्रकाश मेहता ने भी दम तोड़ दिया. गोलबाजार में पुलिस की गोली लगने से गणेश यादव की जान चली गई.
प्रधानमंत्री बलेंद्र शाह ने राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की बैठक कर हालात की समीक्षा की है. उन्होंने हिंसा पर दुख जताते हुए लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की. वहीं विपक्षी दलों ने पुलिस पर जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग करने का आरोप लगाया है.
-भारत एक्सप्रेस
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