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नेपाल के लिए ‘संजीवनी’ लेकर पहुंची इंडियन एयरफोर्स, चौथी खेप भेजकर क्या बोला विदेश मंत्रालय?

नेपाल में भीषण बाढ़ और भूस्खलन के बाद भारत ने राहत अभियान तेज कर दिया है. भारतीय वायुसेना का C-130J विमान 11 टन राहत सामग्री लेकर नेपाल पहुंचा.

Nepal Flood I

नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन के बीच भारत ने भेजी राहत सामग्री

Nepal Flood India Relief: नेपाल और चीन की सीमा पर आई भीषण तबाही, प्रलयंकारी बाढ़ और विनाशकारी भूस्खलन के बाद स्थिति बेहद चिंताजनक और दर्दनाक हो चुकी है. इस कुदरती आफत में अब तक मरने वालों का आंकड़ा 600 के पार पहुंच चुका है, जबकि लगभग 3,000 लोग अभी भी मलबे और कीचड़ के नीचे लापता बताए जा रहे हैं. लापता लोगों में 275 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं, जिनकी सलामती के लिए भारत में उनके परिजन लगातार दुआएं कर रहे हैं.

इस संकट की घड़ी में भारत अपने पड़ोसी देश नेपाल के लिए एक बार फिर सच्चा मित्र और ‘पालनहार’ साबित हुआ है. भारतीय वायुसेना का विशेष सैन्य परिवहन विमान C-130J राहत सामग्री और जीवन रक्षक उपकरणों की चौथी बड़ी खेप लेकर नेपाल पहुंच चुका है, जो इस त्रासदी से जूझ रहे लोगों के लिए किसी ‘संजीवनी’ से कम नहीं है.

विदेश मंत्री एस. जयशंकर का बड़ा ऐलान(Nepal Flood India Relief)

भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने सोशल मीडिया पर इस ‘ऑपरेशन राहत’ की जानकारी साझा करते हुए बताया कि नई दिल्ली ने नेपाल के लिए राहत और बचाव कार्य को तीव्र गति दे दी है. भारतीय वायुसेना के C-130J विमान से 11 टन खाद्य पदार्थ, दवाइयां और आपातकालीन राहत सामग्री की चौथी खेप काठमांडू भेजी गई है.

इसके साथ ही, मलबे में दबे जीवित लोगों की तलाश के लिए अत्याधुनिक खोज एवं बचाव उपकरण, तकनीकी विशेषज्ञों का दल और शवों की पहचान के लिए डीएनए विश्लेषण हेतु विशेष फॉरेंसिक डॉक्टरों और लैब उपकरणों की टीम को भी नेपाल रवाना किया गया है. भारत का यह कदम नेपाल में स्थानीय प्रशासन और राहत एजेंसियों पर भारी दबाव को कम करने में मील का पत्थर साबित हो रहा है.

 

600 से ज्यादा लोग की मौत

तबाही का मंजर इतना खौफनाक है कि कई हंसते-खेलते गांव और सड़कें ताश के पत्तों की तरह ढहकर मलबे में तब्दील हो चुके हैं. नेपाल के अलावा चीन के प्रभावित इलाकों में भी 7 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि वहां किसी के जीवित मिलने की उम्मीद लगभग खत्म हो चुकी है. नेपाल के मुर्दाघरों और अस्पतालों के बाहर भारत, अमेरिका और दुनिया भर के परेशान परिजन अपनों की तस्वीर हाथ में लिए बिलख रहे हैं.

हालांकि, तबाही के इस भयावह माहौल के बीच एक मासूम नेपाली बच्ची को मलबे से सुरक्षित बाहर निकालने का नाटकीय दृश्य आशा की नई किरण बना हुआ है. वहीं, बॉर्डर पर मिला बच्चों का खिलौना उजड़ चुके परिवारों के दर्द की दास्तान बयां कर रहा है.

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अमेरिका ने भी दिया 3.6 मिलियन डॉलर का पैकेज

नेपाल में आई इस आपदा से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मदद के हाथ उठने लगे हैं. अमेरिका ने बाढ़ पीड़ितों के लिए 3.6 मिलियन डॉलर (लगभग 30 करोड़ रुपये) की मानवीय सहायता देने की घोषणा की है, जिससे 10,000 परिवारों को 3 महीने तक राशन मुहैया कराया जाएगा.

लेकिन भू-भौगोलिक निकटता और भावनात्मक रिश्तों के कारण भारत सबसे अग्रिम पंक्ति में खड़ा होकर बचाव अभियान चला रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘नेबरहुड फर्स्ट’ विजन के तहत भारतीय वायुसेना और राहत दल नेपाल में फंसे भारतीयों और नेपाली नागरिकों को हर संभव सहायता पहुंचाने के लिए दिन-रात एक किए हुए हैं.

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-भारत एक्सप्रेस



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