Nepal GenZ Protests: सितंबर की उमस भरी सुबह, नेपाल की सड़कों पर अचानक एक ऐसा नज़ारा दिखा जिसकी गूंज पूरी दुनिया में सुनाई दी. हजारों की संख्या में छात्र-छात्राएं हाथों में तिरंगा और बैनर लिए निकल पड़े. ये सिर्फ एक विरोध-प्रदर्शन नहीं था, बल्कि युवाओं का गुस्सा था जो भ्रष्टाचार, असमानता और कुप्रशासन के खिलाफ फट पड़ा. आग में घी तब डला जब सरकार ने 26 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बैन लगा दिया. फेसबुक, इंस्टा और यूट्यूब पर सपने देखने वाली जेन-जी के लिए यह कदम असहनीय साबित हुआ.
कौन है आंदोलन का मास्टरमाइंड?
इस क्रांति के पीछे सबसे अहम नाम है, सुदन गुरुंग. 36 साल के इस एक्टिविस्ट ने सही समय पर युवाओं की नब्ज़ पकड़ ली. उन्होंने न सिर्फ गुस्से को दिशा दी बल्कि उसे एक संगठित आंदोलन का रूप दिया. सुदन का संगठन ‘हामी नेपाल’ 2015 में अनौपचारिक रूप से शुरू हुआ था और 2020 में आधिकारिक रूप से रजिस्टर हुआ.
सोशल मीडिया पर बेहद एक्टिव रहने वाले सुदन ने भूकंप, बाढ़ और आपातकालीन स्थितियों में राहत कार्यों से अपनी पहचान बनाई. वह अंतरराष्ट्रीय फंडिंग और दान से नेपाल के दूर-दराज़ इलाकों में मदद पहुंचाते रहे हैं.
“अब बस काफी हो गया”
आंदोलन से ठीक पहले, 27 अगस्त को सुदन गुरुंग ने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट डाली थी— “अगर हम खुद को बदलें, तो देश खुद बदल जाएगा.”
इस मैसेज ने युवाओं में बिजली-सी भर दी. फिर 8 सितंबर को उन्होंने इंस्टा और डिस्कॉर्ड पर जोश से भरा आह्वान किया— “भाइयों और बहनों, ये हमारी लड़ाई है. अब वक्त आ गया है कि हम कहें– अब पर्याप्त हो गया.”
उनके संदेश वायरल हुए और देखते ही देखते नेपाल के हजारों छात्र-छात्राएं काठमांडू से लेकर पोखरा तक सड़कों पर उमड़ पड़े.
आंदोलन की रणनीति
दिलचस्प बात यह है कि सुदन गुरुंग एक्टिविस्ट बनने से पहले इवेंट मैनेजमेंट में काम करते थे. वही स्किल उन्होंने आंदोलन में लगाया मैसेजिंग, नेटवर्किंग और भीड़ को संगठित करने का तरीका. उन्होंने वीपीएन, डिस्कॉर्ड और गुप्त चैट ग्रुप्स का इस्तेमाल करके युवाओं को जोड़ दिया.
उन्होंने आंदोलन को सिर्फ “सोशल मीडिया बैन” तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे भ्रष्टाचार और राजनीतिक अभिजात वर्ग के खिलाफ युद्ध का रूप दिया. उन्होंने सीधे ‘नेपो बेबीज़’ और राजनेताओं को टारगेट किया, जिससे आंदोलन का दायरा और बड़ा हो गया.
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खून-खराबा और इस्तीफा
लेकिन ये विरोध जल्द ही हिंसक हो गया. संसद भवन में घुसे छात्रों ने नारेबाजी और तोड़फोड़ शुरू कर दी. हालात काबू से बाहर होते देख पुलिस ने फायरिंग कर दी. 20 लोगों की मौत हो गई और 300 से ज्यादा घायल हुए. कर्फ्यू लगाना पड़ा और राजधानी काठमांडू सहित कई शहरों में इंटरनेट बंद कर दिया गया.
हंगामे के बाद सरकार को सोशल मीडिया पर लगाया गया प्रतिबंध वापस लेना पड़ा. वहीं, गृह मंत्री रमेश लेखक ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दे दिया.
सुदन गुरुंग अब नेपाल की जेन-जी क्रांति का चेहरा बन चुके हैं. कभी पार्टियों और इवेंट्स से जुड़ा रहने वाला यह शख्स आज युवाओं के लिए रोल मॉडल बन गया है. उनके लिए ये आंदोलन सिर्फ एक विरोध नहीं, बल्कि “नए नेपाल” की शुरुआत है.
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-भारत एक्सप्रेस
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