Israel Vs Palestinian State: इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने वेस्ट बैंक के माले अदुमिम सेटलमेंट में एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर करते हुए अपने इरादे जाहिर कर दिए. नेतन्याहू ने कहा कि फिलिस्तीनी देश का गठन कभी नहीं होगा. उन्होंने जोर देकर कहा, “यह जमीन हमारी है. हम अपनी विरासत और जमीन की रक्षा करेंगे.”
यह बयान E1 (ईस्ट 1) सेटलमेंट प्रोजेक्ट की मंजूरी के संदर्भ में आया, जो पूर्वी यरुशलम के पास 12 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में हजारों नए घर, सड़कें और बुनियादी ढांचे का निर्माण करेगा. अनुमानित लागत लगभग 1 अरब अमेरिकी डॉलर (करीब 8,400 करोड़ रुपये) है. अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, नेतन्याहू ने कहा, “हम वेस्ट बैंक को दो हिस्सों में बांटने का वादा पूरा करेंगे, इससे फिलिस्तीनी राज्य असंभव हो जाएगा.”
E1 प्रोजेक्ट की मंजूरी: दो दशकों का इंतजार खत्म
इजरायल की रक्षा मंत्रालय की योजना समिति ने अगस्त 2025 में E1 प्रोजेक्ट को अंतिम मंजूरी दी, जो 2012 और 2020 में अमेरिका व यूरोपीय देशों के विरोध के कारण रुका था. न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, यह प्रोजेक्ट माले अदुमिम सेटलमेंट को यरुशलम से जोड़ेगा, जिसमें करीब 3,500 अपार्टमेंट बनेंगे. निर्माण अगले कुछ महीनों में शुरू हो सकता है. बीबीसी ने बताया कि वित्त मंत्री बेजलेल स्मोट्रिच ने इसे “फिलिस्तीनी राज्य की कब्र” करार दिया. यह कदम इजरायल की दक्षिणपंथी गठबंधन सरकार की नीति का हिस्सा है, जो गाजा युद्ध के बाद सेटलमेंट विस्तार को तेज कर रही है.

अंतरराष्ट्रीय विवाद: कानूनी उल्लंघन की आशंका
E1 प्रोजेक्ट को लेकर वैश्विक स्तर पर तीखा विरोध हो रहा है. संयुक्त राष्ट्र और कई देशों का मानना है कि यह वेस्ट बैंक को उत्तर-दक्षिण में बांट देगा, रामल्लाह और बेथलेहम के बीच अंतिम भौगोलिक कड़ी तोड़ देगा. अल जजीरा ने उद्धृत किया कि फिलिस्तीनी विदेश मंत्रालय ने इसे “फिलिस्तीनी एकता पर हमला” बताया. न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में विशेषज्ञों ने कहा कि इससे पूर्वी यरुशलम, जिसे फिलिस्तीनी अपनी राजधानी मानते हैं, बाकी वेस्ट बैंक से अलग हो जाएगा. ब्रिटेन ने इसे “अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन” कहा, जबकि जर्मनी और तुर्की ने निंदा की. यूएई ने चेतावनी दी कि वेस्ट बैंक का विलय “लाल रेखा” पार करना होगा.
कानूनी पृष्ठभूमि: चौथा जेनेवा कन्वेंशन का मुद्दा
अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत वेस्ट बैंक में सभी इजरायली सेटलमेंट अवैध हैं. चौथा जेनेवा कन्वेंशन स्पष्ट करता है कि कब्जा करने वाली शक्ति अपनी नागरिक आबादी को कब्जे वाले क्षेत्र में स्थानांतरित नहीं कर सकती. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के कई प्रस्तावों ने इसे दोहराया है. हालांकि, इजरायल इसे खारिज करता है. उसका दावा है कि 1967 के छह-दिवसीय युद्ध से पहले वेस्ट बैंक किसी मान्यता प्राप्त राज्य का हिस्सा नहीं था, इसलिए कन्वेंशन लागू नहीं होता. साथ ही, इजरायल का कहना है कि सेटलमेंट में लोग स्वेच्छा से बसते हैं, न कि जबरन. बीबीसी के अनुसार, पीस नाउ संगठन ने इसे “वेस्ट बैंक पर कब्जे की साजिश” बताया.

फिलिस्तीनी प्रभाव: राज्य निर्माण की राह में बाधा
यह प्रोजेक्ट फिलिस्तीनी राज्य की संभावनाओं को चकनाचूर कर देगा. विशेषज्ञों का अनुमान है कि इससे लगभग 5 लाख इजरायली सेटलर और 30 लाख फिलिस्तीनियों के बीच तनाव बढ़ेगा. अल जजीरा ने बताया कि ब्रेकिंग द साइलेंस जैसे संगठन इसे “अपार्टहाइड को मजबूत करने” वाला कदम मानते हैं. नेतन्याहू की सरकार का यह फैसला गाजा युद्ध के बाद इजरायल को अंतरराष्ट्रीय रूप से अलग-थलग कर सकता है, खासकर जब कई यूरोपीय देश फिलिस्तीनी राज्य को मान्यता देने की तैयारी कर रहे हैं.
फिलिस्तीनी प्राधिकरण ने अमेरिका से हस्तक्षेप की मांग की है. कुल मिलाकर, E1 प्रोजेक्ट इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष को नई जटिलता दे रहा है, जहां शांति की उम्मीदें और फीकी पड़ रही हैं.
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