पाकिस्तान बना दुनिया का सबसे प्रदूषित देश.
IQAir World Report: दुनिया का सबसे प्रदूषित देश आज की तारीख में पाकिस्तान है. स्विस कंपनी IQAir की वर्ल्ड एयर क्वालिटी रिपोर्ट 2025 के अनुसार, वहां औसत PM2.5 स्तर 67.3 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रहा. दूसरे नंबर पर बांग्लादेश (66.1) है, फिर ताजिकिस्तान (57.3), चाड (53.6) और कांगो (50.2). भारत छठे स्थान पर है, जहां PM2.5 का स्तर 48.9 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया.
ये आंकड़े बताते हैं कि दक्षिण एशिया अभी भी दुनिया का सबसे प्रदूषित इलाका बना हुआ है. रिपोर्ट में 143 देशों के 9,446 शहरों का विश्लेषण किया गया. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की सुरक्षित सीमा सिर्फ 5 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर है. ज्यादातर देश इस सीमा से कई गुना ज्यादा प्रदूषण झेल रहे हैं.
दुनिया के 10 सबसे प्रदूषित देश
| क्रमांक | देश | PM2.5 स्तर (µg/m³) |
|---|---|---|
| 1 | पाकिस्तान | 67.3 |
| 2 | बांग्लादेश | 66.1 |
| 3 | ताजिकिस्तान | 57.3 |
| 4 | चाड | 53.6 |
| 5 | कांगो | 50.2 |
| 6 | भारत | 48.9 |
| 7 | कुवैत | 45.7 |
| 8 | युगांडा | 43.0 |
| 9 | मिस्र | 40.6 |
| 10 | उज्बेकिस्तान | 38.1 |
स्रोत: IQAir World Air Quality Report 2025
दुनिया के 10 सबसे प्रदूषित शहर ये रहे
उत्तर प्रदेश का लोनी दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर बन गया है. यहां PM2.5 स्तर 112.5 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर पहुंच गया, जो WHO की गाइडलाइन से 22 गुना ज्यादा है. दूसरे नंबर पर चीन का होटन (109.6) है. तीसरे स्थान पर असम का बर्नीहाट (101.1) है. चौथे नंबर पर नई दिल्ली (99.6) है.
दुनिया के 10 सबसे प्रदूषित शहर
| क्रमांक | शहर | देश | PM2.5 स्तर (µg/m³) |
|---|---|---|---|
| 1 | लोनी | भारत | 112.5 |
| 2 | होटन | चीन | 109.6 |
| 3 | बर्नीहाट | भारत | 101.1 |
| 4 | नई दिल्ली | भारत | 99.6 |
| 5 | फैसलाबाद | पाकिस्तान | 98.8 |
| 6 | रहीम यार खान | पाकिस्तान | 92.6 |
| 7 | गाजियाबाद | भारत | 89.2 |
| 8 | लाहौर | पाकिस्तान | 88.9 |
| 9 | सुक्कुर | पाकिस्तान | 88.6 |
| 10 | उला | भारत | 86.8 |
स्रोत: IQAir World Air Quality Report 2025
आंकड़े माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर (µg/m³) में हैं. WHO की सुरक्षित सीमा सिर्फ 5 µg/m³ है.
दुनिया के टॉप 10 प्रदूषित शहरों में पांच भारतीय शहर शामिल हैं – लोनी, बर्नीहाट, नई दिल्ली, गाजियाबाद (89.2) और पश्चिम बंगाल का उला (86.8).
पाकिस्तान के भी कई शहर जैसे फैसलाबाद (98.8) और रहीम यार खान (92.6) इस लिस्ट में हैं.
ये आंकड़े दिखाते हैं कि उत्तर भारत और पड़ोसी देशों में वाहनों का धुआं, फैक्टरियों से निकलने वाला प्रदूषण और कचरा जलाने से समस्या बढ़ रही है.
- भारत के 5 शहर टॉप-10 में शामिल हैं.
- लोनी का प्रदूषण WHO की सीमा से 22 गुना ज्यादा है.
- पाकिस्तान, भारत और चीन के शहरों में प्रदूषण सबसे ज्यादा है.
भारत में वायु प्रदूषण की स्थिति कैसी?
2024 में भारत पांचवें स्थान पर था, लेकिन 2025 में छठे स्थान पर आ गया. फिर भी स्थिति चिंताजनक है. रिपोर्ट कहती है कि 54 देशों में PM2.5 बढ़ा है, जबकि 75 में कम हुआ है. भारत में लोनी के अलावा कई शहरों में प्रदूषण WHO की सीमा से 10-20 गुना ज्यादा है.
PM2.5 के मुख्य स्रोत वाहनों का धुआं, फैक्टरियां और पावर प्लांट, लकड़ी या कोयला जलाना, कचरा जलाना और निर्माण कार्य हैं. ये छोटे कण सीधे फेफड़ों और खून तक पहुंचकर स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाते हैं. आम लोगों में सांस की तकलीफ, बच्चों में अस्थमा और बुजुर्गों में दिल की बीमारियां बढ़ रही हैं.

PM2.5 क्या है, यह क्यों खतरनाक है?
PM2.5 हवा में बहुत छोटे कण होते हैं, जिनका व्यास 2.5 माइक्रोमीटर या उससे कम होता है. ये इतने सूक्ष्म होते हैं कि आंखों से दिखाई नहीं देते. ये धूल, धुआं, केमिकल और कारखानों से निकलने वाले कणों से बनते हैं. एक इंसानी बाल की मोटाई लगभग 70 माइक्रोमीटर होती है, यानी PM2.5 उससे करीब 30 गुना छोटा है. ये कण सीधे फेफड़ों और खून में पहुंच जाते हैं, जिससे सांस लेने में दिक्कत, फेफड़ों की बीमारी, दिल की समस्या और लंबे समय में कैंसर का खतरा बढ़ जाता है.
ऐसे समझें प्रदूषण की गंभीरता
- PM2.5 कण फेफड़ों और खून में घुसकर ऑक्सीजन लेने की क्षमता कम करते हैं और सूजन पैदा करते हैं.
- WHO की 5 µg/m³ सीमा से लोनी 22 गुना ज्यादा प्रदूषित है, जो लंबे समय में फेफड़ों के कैंसर और हृदय रोग का खतरा दोगुना कर सकता है.
- दक्षिण एशिया में वाहन, उद्योग और कृषि अवशेष जलाने से सालाना लाखों मौतें होती हैं.
- रिपोर्ट में 91% देश WHO मानक से बाहर हैं, जो बताता है कि समस्या वैश्विक है लेकिन एशिया सबसे बुरी स्थिति में है.

वैश्विक प्रदूषण: 2025 में क्या नया हुआ?
रिपोर्ट के मुताबिक जलवायु परिवर्तन के कारण जंगलों की आग ने वैश्विक प्रदूषण बढ़ाया. यूरोप और कनाडा में रिकॉर्ड बायोमास जलने से 1,380 मेगाटन कार्बन निकला. अमेरिका में PM2.5 बढ़कर 7.3 हो गया. यूरोप के 23 देशों में प्रदूषण बढ़ा.
मार्च 2025 में अमेरिका का ग्लोबल एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग प्रोग्राम बंद होने से कई देशों में डेटा की कमी हुई. CREA के अनुसार 44 देशों में मॉनिटरिंग कमजोर हो गई और 6 देश बिना किसी मॉनिटरिंग के रह गए. दुनिया के सिर्फ 14 प्रतिशत शहर ही WHO के मानकों पर खरे उतरे.

लोगों के स्वास्थ्य पर असर और सलाह
PM2.5 के कारण सांस लेने में दिक्कत, फेफड़ों की बीमारी, दिल की समस्या और कैंसर का खतरा बढ़ता है. खासकर बच्चे, बुजुर्ग और बीमार लोग ज्यादा प्रभावित होते हैं. डॉक्टरों का कहना है कि सुबह-शाम बाहर कम निकलें, मास्क लगाएं और घर में एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करें.
सरकारों को चाहिए कि वाहनों के उत्सर्जन पर सख्ती करें, साफ ईंधन को बढ़ावा दें, कचरा जलाने पर रोक लगाएं और पेड़ लगाएं. IQAir की रिपोर्ट बताती है कि अगर हम अभी कदम नहीं उठाए तो आने वाले सालों में स्वास्थ्य और पर्यावरण की स्थिति और बिगड़ सकती है.
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हवा में आगे क्या सुधार हो सकता है?
पिछले सालों में कुछ देशों ने प्रदूषण कम किया है. भारत में भी कुछ शहरों में सुधार दिखा, लेकिन अभी बहुत काम बाकी है. रिपोर्ट कहती है कि अगर हम कारखानों को साफ तकनीक अपनाने को मजबूर करें, पब्लिक ट्रांसपोर्ट बढ़ाएं और नवीकरणीय ऊर्जा पर जोर दें तो स्थिति बेहतर हो सकती है. आम नागरिक भी छोटे-छोटे बदलाव जैसे कम प्लास्टिक जलाना और पेड़ लगाना कर सकते हैं.
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