PM Modi Slovakia Visit
PM Modi Slovakia Visit: फ्रांस में जी-7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिवसीय दौरे पर स्लोवाकिया पहुंचे. यह दौरा कई मायनों में खास रहा, क्योंकि स्लोवाकिया की आजादी के बाद पहली बार किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने इस देश का दौरा किया. इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी को स्लोवाकिया के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से भी सम्मानित किया गया.
लेकिन कूटनीतिक बैठकों के बीच सबसे ज्यादा चर्चा उन खास उपहारों की रही, जो प्रधानमंत्री मोदी अपने साथ लेकर गए थे. इन उपहारों में भारत की संस्कृति, कला, शिल्प और ज्ञान की समृद्ध विरासत की झलक साफ दिखाई देती है.
स्पीकर को भेंट कीं सुश्रुत संहिता और चरक संहिता
प्रधानमंत्री मोदी ने स्लोवाकिया की संसद के स्पीकर रिचर्ड रासी को भारत के दो महान आयुर्वेदिक ग्रंथ सुश्रुत संहिता और चरक संहिता भेंट कीं.

सुश्रुत संहिता को दुनिया की सबसे प्राचीन और महत्वपूर्ण चिकित्सा पुस्तकों में गिना जाता है. इसमें सर्जरी, शरीर रचना, औषधि विज्ञान, पोषण और रोगों के उपचार से जुड़ी विस्तृत जानकारी दी गई है. वहीं चरक संहिता आयुर्वेद का एक आधारभूत ग्रंथ है, जिसमें स्वास्थ्य, रोग, शरीर विज्ञान और जीवनशैली को लेकर गहन ज्ञान समाहित है. ये दोनों ग्रंथ भारत की वैज्ञानिक और बौद्धिक विरासत के प्रतीक माने जाते हैं.

राष्ट्रपति को थेवा कफलिंक और डोकरा कला की भेंट
स्लोवाकिया के राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रिनी के लिए प्रधानमंत्री मोदी विशेष भारतीय हस्तशिल्प उपहार लेकर पहुंचे. इनमें राजस्थान की प्रसिद्ध थेवा कला से बने हाथ से तैयार कफलिंक, औरंगाबाद की मशहूर हिमरू सिल्क टाई और पॉकेट स्क्वायर तथा पीतल से बना डोकरा एंटीलोप सेट शामिल था.

थेवा कला राजस्थान के प्रतापगढ़ की सदियों पुरानी शिल्प परंपरा है, जिसमें रंगीन कांच पर सोने की बारीक नक्काशी की जाती है. यह कला अपनी खूबसूरती और जटिल डिजाइन के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है.

वहीं हिमरू सिल्क अपनी खास बुनाई, मुलायम बनावट और शाही अंदाज के लिए जानी जाती है. कभी दक्कन के राजदरबारों की पहचान रही यह कला आज भी भारतीय वस्त्र परंपरा का गौरव मानी जाती है.
डोकरा कला में दिखी आदिवासी भारत की पहचान
राष्ट्रपति को भेंट किए गए पीतल के डोकरा एंटीलोप सेट ने भी खास ध्यान खींचा. डोकरा कला भारत की सबसे पुरानी धातु शिल्प परंपराओं में से एक है, जिसे छत्तीसगढ़, ओडिशा, झारखंड और पश्चिम बंगाल के आदिवासी कारीगर पीढ़ियों से जीवित रखे हुए हैं.

पारंपरिक लॉस्ट-वैक्स तकनीक से बनाई गई ये कलाकृतियां प्रकृति और लोकजीवन की कहानियां बयां करती हैं. हिरण की आकृतियों को फुर्ती, सौम्यता और प्रकृति से जुड़ाव का प्रतीक माना जाता है.

प्रधानमंत्री फिको को भेंट किया कश्मीर का शानदार सिल्क कारपेट
प्रधानमंत्री मोदी ने स्लोवाकिया के प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको को कश्मीरी सिल्क कारपेट भेंट किया. कश्मीर की वादियों में तैयार होने वाला यह हस्तनिर्मित कालीन दुनिया के सबसे उत्कृष्ट कालीनों में गिना जाता है.

बेहतरीन रेशम, महीन बुनाई और आकर्षक फूल-पत्ती वाले डिजाइनों से सजे इन कालीनों को तैयार करने में कारीगरों को कई महीने, बल्कि कई बार वर्षों का समय लग जाता है. यही वजह है कि कश्मीरी सिल्क कारपेट को कला और शाही वैभव का अनूठा संगम माना जाता है.
ये भी पढ़ें- “राम भक्तों पर गोली चलवाने वाले लोग…”, राम मंदिर चंदा चोरी विवाद पर गरजे सीएम योगी, बोले- SIT जांच में सच सामने आएगा

तोहफों के जरिए दिखाई भारत की सांस्कृतिक ताकत
स्लोवाकिया दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी द्वारा दिए गए ये उपहार सिर्फ औपचारिक भेंट नहीं थे, बल्कि भारत की हजारों साल पुरानी ज्ञान परंपरा, हस्तशिल्प, लोककला और सांस्कृतिक विरासत का संदेश भी थे. इन तोहफों के माध्यम से दुनिया को यह दिखाने की कोशिश की गई कि भारत सिर्फ आर्थिक और सामरिक शक्ति ही नहीं, बल्कि संस्कृति और सभ्यता के स्तर पर भी बेहद समृद्ध देश है.
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.


