सीजफायर के सवाल पर विदेश मंत्री जयशंकर की दो टूक, कहा- भारत-पाक के DGMO के बीच बातचीत के बाद हुआ था सीजफायर, ट्रंप की नहीं है कोई भूमिका
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिका के बड़बोले पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे को एक बार फिर खारिज कर दिया है, जिसमें वह लगातार कहते रहे हैं कि भारत और पाकिस्तान के बीच हुए संघर्ष में सीज़फायर उन्होंने कराया था.
जयशंकर ने इस पर स्पष्ट और दो टूक शब्दों में कहा,
“उस समय जो कुछ हुआ, उसका रिकॉर्ड पूरी तरह स्पष्ट है. युद्धविराम दोनों देशों के DGMO (डायरेक्टर जनरल मिलिट्री ऑपरेशंस) के बीच बातचीत के बाद हुआ था.”
क्वाड समिट में शामिल होने अमेरिकी दौरे पर हैं विदेश मंत्री
दरअसल, विदेश मंत्री एस. जयशंकर इस समय क्वाड समिट में शामिल होने के लिए अमेरिकी दौरे पर हैं. अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन में क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों के सम्मेलन के बाद एक प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया, जहां पत्रकारों ने भारतीय विदेश मंत्री से भारत-पाक संघर्ष और सीज़फायर में डोनाल्ड ट्रंप की भूमिका को लेकर सवाल किए. इस पर विदेश मंत्री ने साफ शब्दों में ट्रंप के दावों को खारिज कर दिया.
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ट्रंप ने युद्धविराम कराने का किया था दावा
गौरतलब है कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पीओके और पाकिस्तान की सरज़मीन पर मौजूद आतंकी ठिकानों पर बमबारी की थी. जवाब में पाकिस्तान ने भी भारत पर हमले किए. करीब तीन दिनों तक चले इस संघर्ष के बाद हुए सीज़फायर का क्रेडिट ट्रंप ने लेते हुए कहा था कि अमेरिका ने ट्रेड का हवाला देकर दोनों देशों के बीच युद्धविराम कराया.
भारत ने हर बार ट्रंप के बयान को नकारा
हालांकि भारत ने डोनाल्ड ट्रंप के इस बयान को पहले ही नकार दिया था. बावजूद इसके, ट्रंप बार-बार इस सीज़फायर का श्रेय खुद को देने से पीछे नहीं हटते. जहां भी उन्हें मौका मिलता है, वह कहते हैं कि भारत और पाकिस्तान जैसे दो परमाणु देशों के बीच युद्धविराम कराने में उनकी भूमिका रही है.
हमारे अंदर आत्मविश्वास होना स्वाभाविक है
प्रेस कॉन्फ्रेंस में जयशंकर ने यह भी कहा, “भारत-अमेरिका संबंधों में आज दोनों देश ही केंद्रीय भूमिका में हैं. हम दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था हैं. हमारी जनसंख्या सबसे अधिक है और हमारा वैश्विक प्रभाव लगातार बढ़ रहा है. ऐसे में हमारे अंदर आत्मविश्वास होना स्वाभाविक है.”
उन्होंने आगे कहा, “यह सीज़फायर भारत और पाकिस्तान के डीजीएमओ द्वारा तय किया गया था. इसलिए इस मसले को मैं यहीं छोड़ता हूं.”
वहीं आतंकवाद के सवाल पर जयशंकर ने कहा, “यह एक तथ्य है कि कई देश आतंकवाद के मुद्दे पर वह नजरिया नहीं रखते, जो तब रखते हैं जब दूसरे देश शिकार होते हैं. लेकिन जब वे खुद आतंकवाद का शिकार बनते हैं, तो उनका रुख पूरी तरह बदल जाता है.”
– भारत एक्सप्रेस
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