सऊदी अरब को क्यों चाहिए भारी-भरकम कर्ज?
Saudi Arabia Loan: भारत में सऊदी अरब को अक्सर अमीर मुल्क के तौर पर देखा जाता है. यहां तेल के कुएं, रियाल की करेंसी, ऊंची इमारतें और लग्जरी कारें को लेकर जाना जाता है लेकिन अब हालात बदल रहे हैं. एक रिपोर्ट के मुताबिक सऊदी अरब करीब 8 अरब डॉलर यानी लगभग 7.6 खरब रुपये का नया कर्ज लेने की तैयारी कर रहा है.
ईरान-अमेरिका युद्ध का असर
ईरान से जुड़े संघर्ष ने सऊदी की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ा दिया है. तेल निर्यात और व्यापार मार्गों पर असर पड़ा है. होर्मुज स्ट्रेट और बाब अल मंदेब जैसे रास्तों पर खतरे की वजह से तेल की बिक्री कम हुई है. हूती विद्रोहियों के हमलों ने लाल सागर में जहाजों की आवाजाही को भी प्रभावित किया है.
विजन 2030 की फंडिंग
क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान का विजन 2030 सऊदी की अर्थव्यवस्था को तेल निर्भरता से बाहर निकालने की कोशिश है. पर्यटन, मनोरंजन, मैन्युफैक्चरिंग और टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने के लिए अरबों डॉलर की जरूरत है. इसी महत्वाकांक्षी योजना को पूरा करने के लिए सऊदी अरब लगातार कर्ज जुटा रहा है.
नेशनल डेट मैनेजमेंट सेंटर की भूमिका
सऊदी का NDMC बैंकों से बातचीत कर रहा है ताकि कम से कम 8 अरब डॉलर का सिंडिकेटेड लोन मिल सके. सरकारी तेल कंपनी अरामको भी फाइनेंसिंग विकल्पों पर चर्चा कर रही है. इससे पहले 2025 में NDMC ने 13 अरब डॉलर का सात साल का लोन जुटाया था.
2026 की पहली तिमाही में सऊदी का बजट घाटा
2026 की पहली तिमाही में सऊदी का बजट घाटा 33.5 अरब डॉलर तक पहुंच गया. वित्त मंत्रालय ने इस साल की उधारी योजना में कुल 58 अरब डॉलर की जरूरत बताई है. इसमें 44 अरब डॉलर बजट घाटे को पूरा करने और 14 अरब डॉलर कर्ज से जुटाने का लक्ष्य है.
गिगा प्रोजेक्ट्स पर खर्च
नेओम, रेड सी प्रोजेक्ट और क़िद्दिया जैसे गिगा प्रोजेक्ट्स पर सैकड़ों अरब डॉलर खर्च हो रहे हैं. कुल निवेश की जरूरत एक ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा आंकी गई है. तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव और उत्पादन कटौती ने इन योजनाओं को और चुनौतीपूर्ण बना दिया है.
सुरक्षा पर भी बड़ा खर्च
सऊदी अरब सुरक्षा पर भी बड़ा खर्च कर रहा है. 2024 में रक्षा बजट 75.8 अरब डॉलर था, जो 2025 में बढ़कर 78 अरब डॉलर हो गया. यह कुल सरकारी खर्च का लगभग 21% और GDP का करीब 7.1% है.
2026 के मध्य तक लगभग 450 अरब डॉलर कर्ज
सऊदी का सार्वजनिक कर्ज 2026 के मध्य तक लगभग 450 अरब डॉलर तक पहुंच गया. हालांकि कर्ज-से-जीडीपी अनुपात 30-40% है, जो अमेरिका और यूरोप से कम है. रेटिंग एजेंसियां अभी भी सऊदी को निवेश ग्रेड में रखती हैं, लेकिन लगातार घाटा और उधारी भविष्य में मुश्किलें पैदा कर सकती हैं.
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एक तरफ सऊदी अरब विकासशील देशों को मदद और कर्ज देता है, दूसरी तरफ खुद भारी-भरकम लोन ले रहा है. यह दिखाता है कि विजन 2030 को पूरा करने के लिए तेल की कमाई काफी नहीं है. क्राउन प्रिंस सलमान का कहना है कि कोई ताकत इस प्रोजेक्ट को विफल नहीं कर सकती, लेकिन हकीकत यह है कि सऊदी को अपने सपनों को पूरा करने के लिए अब बाजारों से पैसा जुटाना पड़ रहा है.
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-भारत एक्सप्रेस
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