Cyclone Ditwah In Sri Lanka: हिंद महासागर से निकले चक्रवात दित्वाह (Cyclone Ditwah) ने श्रीलंका में भयंकर तबाही मचाई है. शुरुआती आंकड़ों में दर्जनों मौतें बताई गईं, लेकिन अब यह संख्या 627 तक पहुंच गई है. अधिकारी बताते हैं कि सैकड़ों लोग अभी भी लापता हैं. यह चक्रवात 28 नवंबर 2025 को पूर्वी तट पर टकराया था. तब 56 मौतें और 21 लोगों के लापता होने की खबर आई थी. लेकिन लगातार बारिश, बाढ़ और भूस्खलनों ने हालात और बिगाड़ दिए.
देश के डिजास्टर मैनेजमेंट सेंटर के मुताबिक, सभी 25 जिलों में जनजीवन ठप हो गया है. लाखों लोग संकट में फंसे हैं. कई नदियां उफान पर हैं, जिससे कस्बे पानी में डूब गए.
बाढ़ और भूस्खलन ने मचाई भारी उथल-पुथल
चक्रवात दित्वाह (Cyclone Ditwah) के असर से पूर्वी तट सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ. 24 घंटों में 300 मिलीमीटर से ज्यादा बारिश हुई. इससे भूस्खलन और बाढ़ ने हजारों घरों को नुकसान पहुंचाया. हजारों लोग बेघर हो गए. बचाव दल रात-दिन प्रभावित इलाकों में तलाशी ले रहे हैं. राहत सामग्री पहुंचाने का काम चल रहा है. सरकार ने घरों के नुकसान का आकलन शुरू कर दिया है. पीड़ित परिवारों को जल्द मुआवजा देने की योजना है. यह आपदा श्रीलंका की अर्थव्यवस्था पर भी भारी पड़ रही है.
ऑपरेशन सागर बंधु से पीडितों को मिली राहत
इस मुश्किल वक्त में भारत श्रीलंका का साथ दे रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 28 नवंबर को ही ट्वीट कर संवेदना जताई. उन्होंने श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा दिसानायके को टैग किया. भारत ने तुरंत ऑपरेशन सागर बंधु शुरू किया. इसके तहत राहत सामग्री भेजी गई. अब भारतीय सेना की मेडिकल टीम और फील्ड हॉस्पिटल प्रभावितों का इलाज कर रही हैं. जरूरी दवाइयां, भोजन और पानी उपलब्ध कराया जा रहा है. यह मदद श्रीलंका के लोगों के लिए बड़ी तसल्ली है. दोनों देशों के रिश्ते और मजबूत हो रहे हैं.
भविष्य की चुनौतियां, पुनर्वास का सफर लंबा
चक्रवात दित्वाह (Cyclone Ditwah) अब भारत के तटों की ओर बढ़ रहा था, लेकिन श्रीलंका की तबाही ने सबको हिला दिया. बचाव कार्य तेज हैं, लेकिन लापता लोगों की तलाश जारी है. विशेषज्ञ कहते हैं कि जलवायु परिवर्तन से ऐसी आपदाएं बढ़ रही हैं. श्रीलंका को अंतरराष्ट्रीय मदद की जरूरत है. भारत जैसे पड़ोसी देशों की भूमिका अहम है. उम्मीद है कि जल्द हालात सुधरेंगे. पीड़ितों के लिए प्रार्थनाएं की जा रही हैं.
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