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थाईलैंड-कंबोडिया जंग के केंद्र में शिव मंदिर, जानें युद्ध की असली वजह और इतिहास?

Thailand Cambodia War: थाईलैंड और कंबोडिया फिर आमने-सामने आ गए हैं. सीमा पर तनाव है और गोलियां चल रही हैं. लेकिन, क्या आपको पता इस जंग के पीछे एक शिव मंदिर है. आइये जानें इसकी इतिहास क्या है?

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थाईलैंड और कंबोडिया फिर आमने-सामने

Thailand Cambodia War: जब इतिहास की राख में छुपे विवाद अंगारे बनकर सुलगने लगें तो सीमाएं सिर्फ नक्शों से इतर वे जज्बातों के बीच खींची एक लकीर बन जाती हैं. दक्षिण-पूर्व एशिया के दो पड़ोसी थाईलैंड और कंबोडिया एक बार फिर उसी लाइन पर एक दूसरे के आमने सामने आ गए हैं. एक तरफ धार्मिक धरोहर पर अधिकार का घाव बारूदी हो गया है. वहीं दूसरी ओर शांति की बात संप्रभुता के उग्र नारों में बदल गई है. क्योंकि, इस नई जंग के केंद्र में है एक मंदिर जिसके कारण इतिहास को दोहराते हुए कंबोडिया और थाईलैंड एक बार फिर से जंग के मैदान में कूद गए हैं. आइये जानें इस युद्ध का असल कारण क्या है और इसका इतिहास कितना गहरा है.

थाईलैंड कंबोडिया जंग का अपडेट

थाईलैंड और कंबोडिया के बीच सीमा पर गुरुवार सुबह से ही भीषण गोलीबारी (Thailand Cambodia Border Dispute) हो रही है. इससे ठीक एक दिन पहले बॉर्डर पर एक लैंडमाइन धमाके में पांच थाई सैनिक घायल हो गए थे, जिससे नाराज थाईलैंड ने कंबोडिया से अपने राजदूत को बुला लिया था और कंबोडियाई राजदूत को देश से निष्कासित कर दिया था. गोलीबारी की शुरुआत गुरुवार सुबह 7:35 बजे हुई, जब कंबोडियाई ड्रोन को थाई सैन्य अड्डे के पास देखा गया. इसके बाद कंबोडियाई सैनिकों ने थाई सैन्य अड्डे पर गोलीबारी शुरू कर दी, जिसमें एक थाई सैनिक घायल हो गया.

थाई सेना ने आरोप लगाया कि कंबोडियाई सेना ने आस-पास के रिहायशी इलाकों में अपनी तोपें रख दी हैं और नागरिकों को मानव ढाल की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है. वहीं, कंबोडिया का कहना है कि हमला पहले थाईलैंड की तरफ से हुआ था और कंबोडियाई सैनिकों ने अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए जवाबी हमले के अपने अधिकार का इस्तेमाल किया. गोलीबारी के कारण नागरिकों को एहतियात के तौर पर इलाके से निकाला जा रहा है. थाई अधिकारियों ने बताया कि गोलीबारी में कम से कम तीन नागरिक घायल हुए हैं.

विवाद का असल कारण मंदिर

थाईलैंड और कंबोडिया दक्षिण-पूर्व एशिया में स्थित दो पड़ोसी देश हैं जिनके बीच ऐतिहासिक रूप से विवाद चलता आ रहा है. बौद्ध धर्म को मानने वाले देशों का रहन-सहन और खान-पान करीब करीब समान है. दोनों देशों के बीच सीमा विवाद का मुद्दा है, साथ ही दोनों देश सीमा पर पड़ने वाले मंदिरों पर अधिकार को लेकर भी एक-दूसरे से लड़ते रहे हैं. थाईलैंड का कहना है कि मंदिर के आसपास के इलाके पर उसका अधिकार है, जबकि कंबोडिया का कहना है कि यह इलाका उसका है.

1907 से शुरू हुआ विवाद

दोनों देश 817 किलोमीटर की सीमा शेयर करते हैं. इसे फ्रांस ने तय किया था. क्योंकि, साल 1863 से लेकर 1963 तक कंबोडिया पर फ्रांस का कब्जा था. इस दौरान उसने थाईलैंड के साथ सीमा निर्धारित की थी. साल 1907 के सीमा निर्धारण में प्रीह विहार मंदिर या शिव मंदिर को कंबोडिया का हिस्सा बताया गया. हालांकि, थाईलैंड ने इसे मानने से साफ इनकार कर दिया था. इसके बाद से ही दोनों के बीच मंदिरों का मुद्दा संवेदनशील हो गया.

सीमाओं पर पड़े वाला प्रीह विहार मंदिर विवाद (Thailand Cambodia Dispute For Shiva Temple) के केंद्र में है. दोनों देशों के बीच विवाद साल 2008 में यूनेस्को के फैसले के बाद बढ़ गया. 2008 में यूनेस्को ने प्रीह विहार मंदिर को अपनी हेरिटेज लिस्ट में शामिल कर लिया. इसके बाद विवाद गहराने लगा.  थाईलैंड को लगने लगा कि एक ऐतिहासिक धरोहर उसके इतिहास से छिन रही है, और दोनों देशों का तनाव फिर से बढ़ गया.

प्रीह विहार मंदिर का इतिहास और कोर्ट

प्रीह विहार मंदिर 11वीं सदी में बना था जो भगवान शिव को समर्पित है. यह मंदिर कंबोडिया में स्थित है, लेकिन थाईलैंड ने इसके अधिकार को लेकर भारी विरोध किया था. 1962 में इंटरनेशनल कोर्ट ने फैसला कंबोडिया के पक्ष में सुनाया. हालांकि, मंदिर के आसपास के इलाकों को लेकर विवाद बना रहा. क्योंकि, कोर्ट ने विवादित 4.6 वर्ग किमी जमीन पर कोई फैसला नहीं दिया था. ऐसे में थाईलैंड इस जमीन पर अपना दावा करने लगा.

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2025 में शुरू हो गई जंग (Thailand Cambodia War Update)

2011 में हुए व्यापक संघर्ष में कम से कम 18 लोग मारे गए और हजारों की संख्या में लोग विस्थापित हुए. इसके बाद 2013 में भी इंटरनेशनल कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि मंदिर के आसपास वाली जमीन पर भी कंबोडिया का अधिकार होना चाहिए. पहली नजर में तो थाईलैंड ने भी इस फैसले को मान लिया लेकिन विवाद जारी रहा. मई 2025 में एक बार फिर तनाव शुरू हुई जो जुलाई आते आते जंग में बदल गया.



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