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तियानआनमेन स्क्वायर पर ताकत का सबसे बड़ा प्रदर्शन, शी जिनपिंग बोले– दुनिया चुने शांति या युद्ध

बीजिंग का तियानआनमेन स्क्वायर आज शक्ति और राजनीति का गवाह बना. द्वितीय विश्व युद्ध की 80वीं वर्षगांठ पर आयोजित परेड में शी जिनपिंग ने शांति बनाम युद्ध का संदेश दिया. मंच पर पुतिन और किम जोंग उन की मौजूदगी ने नए अंतरराष्ट्रीय समीकरणों को जन्म दिया.

Tiananmen Square Parade 2025: शी, पुतिन और किम जोंग साथ

Tiananmen Square Parade 2025: बीजिंग का तियानआनमेन स्क्वायर आज इतिहास का गवाह बना. द्वितीय विश्व युद्ध (China World War 2) की समाप्ति के 80 साल पूरे होने पर चीन ने दुनिया के सामने ताकत का ऐसा नजारा पेश किया है जिसे नजरअंदाज करना नामुमकिन है. सुबह से ही राजधानी में सुरक्षा के कड़े इंतजाम थे, सड़कों पर आम लोगों की आवाजाही लगभग ना के बराबर कर दी गई थी और लाखों लोग टीवी और सोशल मीडिया के जरिए इस आयोजन को देख रहे थे.

शी जिनपिंग का संदेश

राष्ट्रपति शी जिनपिंग (Xi Jinping) माओ सूट पहनकर और पत्नी पेंग लियुआन के साथ मंच पर पहुंचे. उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि मानवता आज फिर से एक चौराहे पर खड़ी है. हमें तय करना होगा कि रास्ता शांति का होगा या युद्ध का होगा. उन्होंने (Xi Jinping) चीन की जनता के बलिदान को याद करते हुए कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध में चीनी सैनिकों ने भारी कीमत चुकाई और मानव सभ्यता को बचाने में बड़ी भूमिका निभाई.

रेड फ्लैग कार और सैनिकों का जोश

शी जिनपिंग (Xi Jinping) खुले काले लिमोज़ीन ‘रेड फ्लैग’ में सवार होकर सैनिकों का निरीक्षण करते नजर आए. यह वही कार है जो चीन की राजनीतिक शक्ति का प्रतीक मानी जाती है. माओ जेदोंग से लेकर हर बड़े नेता तक इसी कार ने चीन की अहम घटनाओं का हिस्सा बनकर इतिहास रचा है. सैनिकों के सामने खड़े होकर शी ने कहा कि कामरेड्स आपने कड़ी मेहनत की है. इसके जवाब में सैनिकों ने गगनभेदी आवाज में नारा लगाया और कहा कि ‘जनता की सेवा करें.”

मंच पर दुनिया की नजरें

दिन का सबसे अहम पल तब आया जब शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Putin) और उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन (Kim Jong Un) एक साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलते दिखाई दिए. तीनों नेताओं ने द्वितीय विश्व युद्ध के चीनी वेटरन्स से मुलाकात की और फिर मंच के केंद्र में जाकर साथ बैठे. यह तस्वीर सोशल मीडिया पर छा गई और इसे पश्चिमी देशों के खिलाफ नए गठजोड़ का संकेत माना जा रहा है.

चीन और उत्तर कोरिया के रिश्तों में ठंडापन

विशेष बात यह भी रही कि चीन और उत्तर कोरिया के रिश्तों में पिछले कुछ सालों से ठंडापन रहा था लेकिन किम का इस परेड में शामिल होना बताता है कि बीजिंग अब प्योंगयांग को अपने खेमे में मज़बूती से जोड़ना चाहता है. पुतिन और किम के बीच हाल ही में गहरी दोस्ती देखने को मिली है और अब शी की मौजूदगी ने दोस्ती को और मज़बूत कर दिया है.

आम लोगों पर असर

जहां एक ओर बीजिंग ने ताकत और एकता का संदेश पूरी दुनिया को दिखाया वहीं इस परेड का असर आम जनता की जिंदगी पर भी पड़ा. सुरक्षा कारणों से कई पर्यटन स्थल बंद रहे, दफ्तरों में वर्क फ्रॉम होम लागू किया गया और स्कूलों की छुट्टियां बढ़ा दी गईं. करीब 50 हजार लोग स्क्वायर पर मौजूद थे जबकि करोड़ों लोगों ने इसे लाइव देखा.

इसे भी पढ़ें-ट्रंप का बड़ा बयान, पुतिन से नाराजगी, चीन-किम पर साजिश का आरोप

शक्ति प्रदर्शन का मतलब

बीजिंग का यह शक्ति प्रदर्शन सिर्फ़ चीन की सैन्य ताकत का नहीं बल्कि एक नए भू-राजनीतिक संदेश का भी संकेत है. शी जिनपिंग, पुतिन और किम जोंग एक साथ बैठना ये साफ कर दिया है कि पूर्वी एशिया से निकल रही यह तस्वीर आने वाले वक्त की अंतरराष्ट्रीय राजनीति को गहराई से प्रभावित करेगी.

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-भारत एक्सप्रेस


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