Donald Trump In Davos: दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूरोप को जमकर सुनाया. उन्होंने ग्रीनलैंड को लेकर यूरोप की खूब बेइज्जती की. ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने नाटो को लेकर क्या कुछ नहीं किया. हमने नाटो को अपना 100 प्रतिशत दिया. बदले में हमें यूरोप से कुछ नहीं मिला. इस दौरान ट्रंप ने यूरोप को चीन और रूस का भी डर दिखाने की कोशिश की.
ट्रंप ने कहा कि पिछले 200 सालों से हम डेनमार्क से ग्रीनलैंड को खरीदना चाहते हैं. वो डेनमार्क और ग्रीनलैंड का बहुत सम्मान करते हैं. उन्होंने कहा कि हम ग्रीनलैंड की रक्षा करने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं. आखिर यूरोप ने भी कई देशों पर कब्जा किया है. हमारी बातचीत का यूरोप को हिस्सा बनना चाहिये. इसमें कोई गलत बात भी नहीं है.
डोनाल्ड ट्रंप ने आगे कहा कि ग्रीनलैंड बर्फ का एक टुकड़ा है और वो ही अमेरिका को आने वाले खतरों से बचा सकता है. अगर यूरोप पर कोई भी खतरा आता है तो अमेरिका ही रक्षा के लिए खड़ा रहेगा. अगर आप हमा करेंगे तो हम इसे याद रखेंगे.
Until I talked about Iceland (greenland), they (NATO) used to call me daddy – Trump 😭🤣 pic.twitter.com/lBv3tQBuVU
— Mr Sinha (@Mrsinha) January 21, 2026
द्वितीय विश्वयुद्ध का किया जिक्र
अमेरिकी राष्ट्रपति ने दावोस में द्वितीय विश्वयुद्ध का भी जिक्र कर यूरोप पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि द्वितीय विश्वयुद्ध में डेनमार्क, जर्मनी, इटली और जापान के आगे घुटने टेक दिया था. उस समय कोई भी देश डेनमार्क को बचाने नहीं आया. सिर्फ अमेरिका ही मोर्चा संभाला और ग्रीनलैंड में जीत दर्ज की. लेकिन देखो अमेरिका कितना मूर्ख था कि उसने जीती हुई जमीन को वापस डेनमार्क को सौंप दिया. अमेरिका को चाहिये था कि वो ग्रीनलैंड को अपने पास ही रखे.
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ग्रीनलैंड को सिर्फ अमेरिका ही बचा पाएगा
डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड में नाटो सेना की तैनाती पर भी चुटकी ली. उन्होंने कहा कि ग्रीनलैंड की रक्षा करना नाटो में मौजूद सभी देशों का दायित्व है. लेकिन अमेरिका के अलावा कोई भी इसे बचा नहीं पाएगा. चाहे यूरोपीय देश अकेले आएं या साथ मिलकर आएं. यूरोप जितना समझता है हम उससे भी ज्यादा ताकतवर हैं.
ट्रंप ने आगे कहा कि ग्रीनलैंड को लेकर पूरा अमेरिका एकमत है. हमें बस ग्रीनलैंड चाहिये, क्योंकि हम इसके ट्रस्टी हैं. हमारी फोर्स काफी ताकतवर है. हम अपनी सेना पर 1.5 ट्रिलियन डॉलर खर्च करने की क्षमता रखते हैं. हमारे पास एक से एक ताकतवर शिप हैं. जिनका मुकाबला नाटो के पास नहीं है.
-भारत एक्सप्रेस
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