अमेरिका और ईरान के बीच 40 दिनों के खूनी संघर्ष के बाद भले ही दो हफ्तों के सीजफायर पर सहमति बन गई है, लेकिन शांति की यह उम्मीद फिर से डगमगाती नजर आ रही है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ’ पर एक कड़ा रुख अपनाते हुए ईरान को साफ चेतावनी दी है.
साथ ही ट्रंप ने स्पष्ट किया कि यह सीजफायर केवल एक ‘मौका’ है और अगर ईरान ने ‘वास्तविक समझौते’ (Real Deal) की शर्तों में ज़रा भी हेरफेर की, तो अगली सैन्य कार्रवाई पहले से कहीं ज्यादा विनाशकारी होगी. ट्रंप के इस बयान ने दुनिया भर में यह चिंता पैदा कर दी है कि क्या यह महज युद्ध का एक छोटा सा ‘ब्रेक’ है.
ईरान को सख्त चेतावनी देते हुए क्या बोले ट्रंप?
डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखते हुए कहा कि अमेरिकी बेड़े, एयरक्राफ्ट और भारी गोला-बारूद ईरान के आसपास तब तक तैनात रहेंगे, जब तक कि स्थायी शांति का रोडमैप पूरी तरह लागू नहीं हो जाता. ट्रंप ने आक्रामक लहजे में लिखा कि अगर किसी भी कारण से सीजफायर का उल्लंघन होता है तो गोलियां फिर से चलेंगी. यह कार्रवाई ऐसी होगी जिसे दुनिया ने पहले कभी नहीं देखा होगा. उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि होर्मुज स्ट्रेट का खुला रहना और ईरान का परमाणु मुक्त होना गैर-परक्राम्य (Non-negotiable) शर्तें हैं.
लेबनान पर छिड़ा नया विवाद
ईरान के साथ सीजफायर के ऐलान के कुछ ही घंटों बाद इजराइल ने लेबनान की राजधानी बेरूत पर अब तक का सबसे भीषण हमला बोल दिया. मध्य बेरूत के घनी आबादी वाले इलाकों में हुई इस बमबारी में 182 लोगों की जान चली गई, जिसने पूरी दुनिया को झकझोर दिया है.
इस हमले के बाद एक नया कूटनीतिक विवाद खड़ा हो गया है. ईरान का दावा है कि युद्धविराम समझौते में लेबनान भी शामिल था, जबकि इजराइल और अमेरिका का साफ कहना है कि ईरान के साथ हुई डील का हिजबुल्ला और लेबनान की लड़ाई से कोई लेना-देना नहीं है. ट्रंप ने भी एक इंटरव्यू में दो टूक कहा कि लेबनान की लड़ाई एक अलग विषय है.
ईरान ने क्या जवाबी कदम उठाया?
लेबनान पर इजराइली हमलों और अमेरिका के कड़े रुख से नाराज होकर ईरान ने एक बड़ा कदम उठाया है. ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, तेहरान ने लेबनान में हुई मौतों के विरोध में होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को एक बार फिर से बंद कर दिया है.
यह कदम सीधे तौर पर सीजफायर की सबसे बड़ी शर्त का उल्लंघन माना जा रहा है. होर्मुज के दोबारा बंद होने से वैश्विक तेल बाजार में फिर से हड़कंप मच गया है. पाकिस्तान द्वारा कराई गई इस मध्यस्थता के अब ‘टूटने’ का खतरा मंडरा रहा है, क्योंकि एक तरफ ट्रंप की धमकियां हैं और दूसरी तरफ ईरान का आक्रामक प्रतिरोध.
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-भारत एक्सप्रेस
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