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मुफ्ती से खूंखार कमांडर तक! 10,000 फीट की ऊंचाई से बम गिराकर मारने की हुई कोशिश, कौन है TTP सरगना नूर वली महसूद, पढ़ें EXPLAINER

TTP Chief Noor Wali Mehsud: जून 2018 में मौलाना फजलुल्लाह के अमेरिकी ड्रोन स्ट्राइक में मारे जाने के बाद नूर वली महसूद TTP का लीडर बना. उसे टीटीपी का ‘अमीर’ (सरगना) चुना गया. उसका जन्म खैबर पख्तूनख्वा के दक्षिण वजीरिस्तान के एक छोटे से गांव तियारजा में हुआ था.

TTP Chief Noor Wali Mehsud

TTP Chief Noor Wali Mehsud: पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव इस वक्त अपने चरम पर है. यह तल्खी एक बार फिर तब दुनिया के सामने आई, जब बीते 9 अक्टूबर 2025 को पाकिस्तान ने काबुल में हवाई हमला (Air Strike) किया. इस हमले का निशाना कोई और नहीं, बल्कि तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) का सरगना नूर वली महसूद था. हमले के बाद कुछ पाकिस्तानी रिपोर्ट्स ने महसूद की मौत का दावा किया, तो कुछ ने इन खबरों को अफवाह करार दिया. लेकिन सवाल है कि आखिर यह नूर वली महसूद कौन है? जिसे खत्म करने के लिए इस्लामाबाद को काबुल में घुसकर वार करना पड़ रहा है.

कौन है नूर वली महसूद?

पाकिस्तान के सुदूर उत्तर में अफगानिस्तान की सीमा से लगता एक प्रांत है, नाम है खैबर पख्तूनख्वा. खैबर पख्तूनख्वा के दक्षिण वजीरिस्तान के एक छोटे से गांव तियारजा में 26 जून 1978 को एक पश्तून पख्तून जनजाति के घर एक बच्चा पैदा हुआ. जिसका नाम उसके मां-बाप ने नूर वली महसूद रखा. वह पश्तून जनजाति के मेहसूद कबीले के मेचीखेल उप-कबीले से ताल्लुक रखता था. यहीं बच्चा आगे चलकर मुफ्ती बना.

पश्तूनों जनजाति में कई कबीले हैं. जिनमें से महसूद भी एक है. इसी तरह से एक कबिला है अफरीदी. जी हां वहीं अफरीदी जिस कबिले से पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर शाहिद अफरिदी ताल्लुक रखते हैं. वो भी पश्तून जनजाति से हैं. अब खबर पर वापस आते हैं.

एक मौलवी जो बना खूंखार कमांडर

खैबर पख्तूनख्वा में 26 जून 1978 में जन्में इस बच्चे की शुरुआती पढ़ाई मदरसा सिद्दीकिया उस्पास में हुई, बाद में 1990 के दशक में वो फैसलाबाद, गुजरांवाला और कराची के मदरसों में घूमता रहा, लेकिन 1996-97 में उसने मदरसों को छोड़ दिया और अफगानिस्तान चला गया. अफगानिस्तान में उसने बंदूकें और अन्य हथियार चलाने की ट्रेनिंग ली. उस समय अफगानिस्तान पर तालिबान की हुकूमत थी, लेकिन अहमद शाह मसूद अपने इलाके में अपना अलग राज चला रहे थे. जहां उसने अफगान तालिबान की तरफ से अहमद शाह मसूद की नॉर्दर्न अलायंस के खिलाफ जंग लड़ी. नूर वली महसूद मजार-ए-शरीफ और काबुल के पास की लड़ाइयों का भी हिस्सा रह चुका है.

हालांकि पिता हाजी गुल शाह खान की सलाह पर 1999 में वह पाकिस्तान लौट आया और इस्लामी थियोलॉजी में ‘मुफ्ती’ की डिग्री हासिल की. 1999 से 2001 तक उसने दक्षिण वजीरिस्तान में धार्मिक शिक्षा भी दी.

टीटीपी में एंट्री और सरगना बनने का सफर

साल 2003 में नूर वली ने पाकिस्तानी तालिबान (TTP) की मेहसूद शाखा का दामन थाम लिया. उस समय मेहसूद शाखा का कमांडर बैतुल्लाह मेहसूद था. उसका कहना था कि पाकिस्तानी सेना का फेडरली एडमिनिस्टर्ड ट्राइबल एरियाज (FATA) में चलाया जा रहा ऑपरेशन, पश्तूनों की परंपराओं (पश्तूनवाली) का उल्लंघन था. नूर वली महसूद ने इसे अमेरिकी साम्राज्यवाद के खिलाफ ‘रक्षात्मक जिहाद’ करार दिया.

नूर वली महसूद के अनसुने किस्से

2004 में वाना की जंग से शुरू हुए उत्तर-पश्चिम पाकिस्तान के संघर्ष में नूर वली ने पाकिस्तानी सेना पर कई हमले किए. बाद में उसे काजी (जज) बना दिया गया. यहां एक दिलचस्प घटना घटी. एक बार किसी बात को लेकर नूर वली ने कमांडर बैतुल्लाह मेहसूद को ही तीन दिन की सजा सुना दी थी. बता दें कि, कमांडर बैतुल्लाह मेहसूद, TTP के मेहसूद कबिले का मुखिया था. अपनी इमानदारी और साफ नियत से वह जल्द ही बैतुल्लाह का डिप्टी बन गया. बैतुल्लाह की मौत के बाद, 2009 में, उसने टीटीपी का ट्रेनिंग कैंप संभाला. उस वक्त उस पर 20 लाख रुपये का इनाम था.

साल 2013 में, वह टीटीपी की कराची इकाई का प्रमुख बना, जहां फिरौती, अपहरण, बैंक डकैती और हत्याएं चरम पर थीं. पाकिस्तानी सेना ने TTP के खिलाफ जबरदस्त कार्रवाई की. जिसकी वजह से नूर वली का नेटवर्क तो जरूर कमजोर हो गया, लेकिन नूर वली का कद बढ़ता गया. 2018 में खालिद मेहसूद की ड्रोन हमले में मौत के बाद वह मेहसूद तालिबान का लीडर बना.

2018 में बना टीटीपी का सरगना

आखिरकार, जून 2018 में मौलाना फजलुल्लाह के अमेरिकी ड्रोन स्ट्राइक में मारे जाने के बाद नूर वली TTP का लीडर बना. उसे टीटीपी का ‘अमीर’ (सरगना) चुना गया.

नूर वली महसूद ने जब TTP की कमान संभाली उस समय संगठन बहुत कमजोर था और कई गुटों में बंटा हुआ था. नूर वली सिर्फ एक मुफ्ती ही नहीं था वह एक बेहतरीन रणनीतिकार भी था. उसने सभी गुटों को फिर से संगठित किया और अपनी रणनीति में आमूलचूल परिवर्तन किया. उसने अपने हमले की रणनीति को भी बदला. पहले जहां TTP आम लोगों को भी निशाना बनाता था. वहीं नूर वली महसूद ने आम लोगों को निशाना बनाना बंद कर दिया और सिर्फ पाकिस्तानी सुरक्षा बलों पर हमलों को केंद्रित किया.

TTP की बदली रणनीति

नूर वली महसूद की इस रणनीति ने दो परिवर्तन लाए. पहला लोगों के मन में यह बैठ गया कि TTP की लड़ाई पाकिस्तानी सेना से है और ये पश्तूनों के हकों के लिए लड़ रहे हैं. वहीं दूसरा यह कि खैबर पख्तूनख्वा में पाक फौज के लिए लोगों के जेहन में हमदर्दी कम हो गई. जिसकी वजह से फौज को खुफिया जानकारी सीमित हो गई.

अमेरिका ने 10 सितंबर 2019 को नूर वली महसूद पर कड़ा प्रतिबंध लगाते हुए ‘ग्लोबल टेररिस्ट’ घोषित कर दिया. साल 2020 में संयुक्त राष्ट्र ने भी महसूद पर कार्रवाई करते हुए उसे अपनी आतंकी सूची में डाल दिया.

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अफगानिस्तान में तालिबान की वापसी और TTP के हमले

2021 में अफगानिस्तान में तालिबान की वापसी के बाद TTP की ताकत में जबरदस्त इजाफा हुआ है. उसने पाकिस्तानी सेना पर अपने हमले तेज कर दिये हैं. खैबर पख्तूनख्वा की सीमा पर पाकिस्तानी सैनिकों पर हमलों की तीव्रता काफी बढ़ गई है. 9 अक्टूबर 2025 को पाकिस्तान फौज पर हमले में 11 जवान मारे गए थे. ये हमले टीटीपी ने ही किये थे.

जिसके जवाब में पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के काबुल, जलालाबाद और पक्तिका पर एयरस्ट्राइक किये. जिसमें दर्जनों लोग मारे गए. पाकिस्तान ने इस हमले में नूर वली महसूद को निशाना बनाया था.

एयरस्ट्राइक के बाद कई रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया कि नूर वली महसूद पाक फौज के इन हमलों में मारा गया है. हालांकि तालिबान और टीटीपी ने महसूद के सुरक्षित होने की बात कही है. टीटीपी ने तो बकायदा उसकी आवाज का नोट जारी कर उसे जिंदा बताया है.

-भारत एक्सप्रेस



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