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कश्मीरी महिला ने पाकिस्तान की खोली पोल, UN में PoJK को लेकर दिया बड़ा बयान

UNHRC के 63वें सत्र में PoJK में मानवाधिकारों की स्थिति का मुद्दा उठा. कश्मीरी सामाजिक कार्यकर्ता तस्लीमा अख्तर ने प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई, गिरफ्तारियों और इंटरनेट प्रतिबंध के आरोप लगाए.

Tasleema Akhter ON POJK

कश्मीरी सामाजिक कार्यकर्ता तस्लीमा अख्तर ने PoJK को लेकर पाक को घेरा

जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) के 63वें सत्र के दौरान कश्मीर से जुड़ा मुद्दा चर्चा में आया. बारामूला की रहने वाली कश्मीरी सामाजिक कार्यकर्ता तस्लीमा अख्तर ने पाकिस्तान-अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoJK) में मानवाधिकारों की स्थिति को लेकर गंभीर सवाल उठाए. उन्होंने आरोप लगाया कि अपने बुनियादी अधिकारों और शासन से जुड़े मुद्दों को लेकर आवाज उठाने वाले आम नागरिकों के खिलाफ सुरक्षा बलों ने सख्त कार्रवाई की.

22 सितंबर को UNHRC की आम सभा को संबोधित करते हुए तस्लीमा ने कहा कि PoJK में हाल के दिनों में जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी और नागरिक समाज संगठनों के नेतृत्व में शांतिपूर्ण प्रदर्शन हुए. इन प्रदर्शनों में आर्थिक परेशानियों, शासन व्यवस्था और लोगों के अधिकारों से जुड़े मुद्दे उठाए गए. उनके मुताबिक, प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में लोगों को गिरफ्तार किया गया, कुछ प्रमुख नेताओं को हिरासत में लिया गया और इंटरनेट सेवाएं भी बाधित की गईं.

तस्लीमा ने दावा किया कि विरोध प्रदर्शनों के दौरान हिंसक झड़पों में कई लोगों की जान गई. उन्होंने संयुक्त राष्ट्र से अपील की कि नागरिकों की मौत के हर मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा घटनाओं से जुड़ी जानकारी तक पारदर्शी पहुंच सुनिश्चित की जाए. उनका कहना था कि आम लोगों के लिए अभिव्यक्ति, शांतिपूर्ण विरोध और संचार की आजादी जरूरी है.

‘नागरिकों के अधिकार बहाल हों’

अपने संबोधन में तस्लीमा ने पाकिस्तानी प्रशासन से नागरिकों के खिलाफ कार्रवाई रोकने और संचार व्यवस्था बहाल करने की मांग की. उन्होंने कहा कि विवाद का समाधान बल प्रयोग के बजाय बातचीत और जवाबदेही के जरिए होना चाहिए.


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भारत के जम्मू-कश्मीर का भी किया जिक्र

तस्लीमा ने भाषण में भारत के जम्मू-कश्मीर का उदाहरण भी रखा. उन्होंने दावा किया कि 2024 से स्किल डेवलपमेंट कार्यक्रमों के जरिए युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने और स्थानीय कारोबार को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया गया है. उन्होंने स्मार्ट सिटी परियोजनाओं और ग्रामीण बुनियादी ढांचे के विकास का भी उल्लेख किया. उनके बयान में नागरिकों की सुरक्षा, स्वतंत्र जांच और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार पर जोर दिया गया.

-भारत एक्सप्रेस



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