US Israel Iran conflict: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है. अमेरिकी सेन्ट्रल कमांड (CENTCOM) ने पुष्टि की है कि अमेरिकी वायुसेना ने ईरान की तटरेखा पर मौजूद मिसाइल ठिकानों पर 5,000 पाउंड वजनी ‘बंकर बस्टर’ बम से हमला किया है. ये हमले स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास हुए, जिसे दुनिया का सबसे अहम ऊर्जा मार्ग माना जाता है.
Hours ago, U.S. forces successfully employed multiple 5,000-pound deep penetrator munitions on hardened Iranian missile sites along Iran’s coastline near the Strait of Hormuz. The Iranian anti-ship cruise missiles in these sites posed a risk to international shipping in the… pic.twitter.com/hgCSFH0cqO
— U.S. Central Command (@CENTCOM) March 17, 2026
अमेरिका का क्या कहना है?
CENTCOM के मुताबिक, जिन ठिकानों पर हमला किया गया वहां ईरान के एंटी-शिप क्रूज मिसाइल सिस्टम मौजूद थे. अमेरिका का दावा है कि ये मिसाइलें अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए खतरा बन रही थीं और इन्हें नष्ट करना जरूरी था.
बंकर बस्टर की ताकत
5,000 पाउंड का यह बम साधारण नहीं है. इसे खासतौर पर उन ठिकानों को नष्ट करने के लिए बनाया गया है जो जमीन के गहरे अंदर छिपे होते हैं. यह मोटी कंक्रीट और चट्टानों को भेदकर भीतर पहुंचता है और विस्फोट कर भूमिगत मिसाइल बेस और स्टोरेज को तबाह कर देता है.
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का महत्व
यह समुद्री रास्ता दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम है. तेल और गैस का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है. अमेरिका का कहना है कि ईरान की मिसाइलें इस रूट पर चल रहे जहाजों को निशाना बना सकती थीं. हाल ही में ईरान ने हमलों के बाद इस रास्ते को लगभग बंद कर दिया था.
क्या है अमेरिका की रणनीति?
अमेरिका का मकसद ईरान की तटीय मिसाइल क्षमता को कमजोर करना और अंतरराष्ट्रीय जहाजरानी को सुरक्षित रखना साफ है. ‘फ्रीडम ऑफ नेविगेशन’ यानी समुद्री रास्ते को खुला रखना ही इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य बताया गया है. यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब ईरान, इजरायल और खाड़ी देशों के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है.
तेल की कीमतों पर क्या असर पड़ेगा?
विशेषज्ञों का कहना है कि इस सैन्य कार्रवाई का सीधा असर तेल की कीमतों और ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है. अमेरिका ने इसे जरूरी कदम बताया है, लेकिन कई देशों ने इस अभियान में शामिल होने से इनकार कर दिया है.
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ईरान की जवाबी कार्रवाई की संभावना
जानकारों का मानना है कि ईरान के पास अभी भी मोबाइल लॉन्चर और भूमिगत स्टोरेज मौजूद हैं. ऐसे में जवाबी हमले की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता. होर्मुज के आसपास हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं और दुनिया की निगाहें इस क्षेत्र पर टिकी हैं.
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-भारत एक्सप्रेस
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