अमेरिकी और रूसी सरकारी अधिकारियों ने इस महीने अलास्का में हुई वार्ता (Alaska Summit) के दौरान यूक्रेन में शांति स्थापित करने के उद्देश्य से कई ऊर्जा सौदों पर चर्चा की. इस वार्ता से परिचित पांच सूत्रों ने ये जानकारी दी है. किसी भी सूत्र का नाम नहीं लिया जा सका क्योंकि उन्हें वार्ता पर सार्वजनिक रूप से बोलने का अधिकार नहीं था.
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने बताया कि ये सौदे रूस को यूक्रेन में शांति के लिए सहमत होने और अमेरिका द्वारा रूस पर प्रतिबंधों में ढील देने के लिए प्रोत्साहन के रूप में पेश किए गए थे.
फरवरी 2022 में शुरू हुए रूस-यूक्रेन जंग के बाद लगे प्रतिबंधों के कारण रूस अपने ऊर्जा क्षेत्र में अधिकांश अंतर्राष्ट्रीय निवेश और प्रमुख सौदे करने से वंचित रह गया है.
वार्ता से जुड़े तीन सूत्रों ने बताया कि अधिकारियों ने एक्सॉन मोबिल (XOM.N) के रूस की सखालिन-1 तेल और गैस परियोजना में फिर से प्रवेश करने की संभावना पर चर्चा की. चार सूत्रों ने बताया कि उन्होंने रूस द्वारा अपनी एलएनजी परियोजनाओं, जैसे आर्कटिक एलएनजी 2, जो पश्चिमी प्रतिबंधों के अधीन है, के लिए अमेरिकी उपकरण खरीदने की संभावना भी जताई.
इससे पहले रॉयटर्स ने 15 अगस्त को बताया कि एक और विचार यह था कि अमेरिका रूस से परमाणु ऊर्जा से चलने वाले आइसब्रेकर जहाज़ खरीदे.
व्हाइट हाउस में भी सौदों पर हुई चर्चा
वहीं तीन सूत्रों ने बताया कि ये बातचीत इस महीने की शुरुआत में अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ की मॉस्को यात्रा के दौरान हुई थी, जब उन्होंने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और उनके निवेश दूत किरिल दिमित्रिएव से मुलाकात की थी. दो सूत्रों ने बताया कि व्हाइट हाउस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ भी इन सौदों पर चर्चा हुई थी.
एक सूत्र ने बताया कि 15 अगस्त को अलास्का शिखर सम्मेलन में भी इन सौदों पर संक्षिप्त चर्चा हुई थी. एक सूत्र ने कहा, “असल में व्हाइट हाउस अलास्का शिखर सम्मेलन के बाद एक बड़े निवेश सौदे की घोषणा करते हुए एक हेडलाइन बनाना चाहता था. जिससे ट्रंप को लगे कि उन्होंने कुछ हासिल कर लिया है.”
व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने इन सौदों के बारे में पूछे गए सवालों के जवाब में कहा कि ट्रंप और उनकी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम रूसी और यूक्रेनी अधिकारियों के साथ द्विपक्षीय बैठक के लिए बातचीत जारी रखे हुए हैं ताकि जंग को समाप्त किया जा सके. अधिकारी ने कहा कि इन मुद्दों पर आगे सार्वजनिक रूप से बातचीत करना राष्ट्रीय हित में नहीं है.
इस मामले में दिमित्रिएव के प्रवक्ता ने और एक्सॉन मोबिल ने कमेंट करने से इनकार कर दिया. रोसनेफ्ट और नोवाटेक ने भी कोई जवाब नहीं दिया.
अगर शांति वार्ता आगे नहीं बढ़ी तो और प्रतिबंध लगाएंगे
ट्रंप ने धमकी दी है कि अगर शांति वार्ता आगे नहीं बढ़ी तो वे रूस पर और प्रतिबंध लगाएंगे और रूसी तेल के प्रमुख खरीदार भारत पर कड़े टैरिफ लगाएंगे. इन उपायों से रूस के लिए तेल निर्यात का समान स्तर बनाए रखना मुश्किल हो जाएगा.
अलास्का शिखर सम्मेलन के दिन, पुतिन ने एक ऐसे आदेश पर हस्ताक्षर किए जिससे एक्सॉन मोबिल सहित विदेशी निवेशकों को सखालिन-1 परियोजना में अपनी हिस्सेदारी वापस पाने की अनुमति मिल सकती है. यह इस शर्त पर है कि विदेशी शेयरधारक रूस पर लगे पश्चिमी प्रतिबंधों को हटाने के समर्थन में कार्रवाई करेंगे.
यूक्रेन पर आक्रमण के बाद एक्सॉन ने 2022 में अपने रूसी कारोबार से 4.6 अरब डॉलर का हानि शुल्क लेकर बाहर निकल लिया. रूस के सुदूर पूर्व में स्थित सखालिन-1 परियोजना में इसकी 30% ऑपरेटर हिस्सेदारी उसी वर्ष क्रेमलिन द्वारा जब्त कर ली गई थी.
-भारत एक्सप्रेस
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