Bharat Express DD Free Dish

होर्मुज में हमले से गुस्से में ट्रंप: खामेनेई के जनाजे के बीच ईरान पर बरसाए बम, तेल पर भी दिया तगड़ा झटका

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच सैन्य कार्रवाई और आर्थिक प्रतिबंधों ने पश्चिम एशिया में अनिश्चितता बढ़ा दी है. इस घटनाक्रम के बाद वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं तेज हो गई हैं…

पश्चिम एशिया यानी मिडिल ईस्ट से इस वक्त की सबसे बड़ी और खौफनाक खबर (us strike on iran) आ रही है, जिसने पूरी दुनिया को तीसरे विश्व युद्ध के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है. अमेरिका और ईरान के बीच पिछले महीने हुआ नाजुक युद्धविराम पूरी तरह से तार-तार हो चुका है और दोनों देशों के बीच जंग की आग एक बार फिर भयंकर रूप से धधक उठी है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश पर अमेरिकी सेना ने ईरान को एक साथ दो ऐसे विनाशकारी झटके दिए हैं जिससे पूरे खाड़ी देशों में हड़कंप मच गया है.

अमेरिका ने न सिर्फ ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर भीषण हवाई हमले करके सब कुछ धुआं-धुआं कर दिया, बल्कि लगे हाथ ईरान की रीढ़ कहे जाने वाले तेल कारोबार पर भी सबसे बड़ा प्रहार कर दिया है. यह कार्रवाई ऐसे संवेदनशील समय पर हुई है जब पूरे ईरान में पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई का अंतिम संस्कार और शोक समारोह चल रहा है.

बंदर अब्बास और क़ेश्म द्वीप पर अमेरिकी बमबारी(us strike on iran)

इस पूरे विवाद की शुरुआत स्ट्रेट ऑफ होर्मुज यानी होर्मुज जलडमरूमध्य में तीन बड़े व्यावसायिक तेल टैंकरों पर हुए ड्रोन हमलों (oil tanker attack hormuz) के बाद हुई. इन जहाजों में कतर का एलएनजी टैंकर अल रेकय्यात और ओमान के पास मौजूद एक सऊदी अरब का तेल टैंकर शामिल था, जिन पर हुए हमलों के बाद जहाजों के इंजन रूम में भीषण आग लग गई थी. इस हिमाकत से भड़के अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तुरंत सैन्य कार्रवाई के आदेश दे दिए. मंगलवार 7 जुलाई 2026 को अमेरिकी सेंट्रल कमान यानी सेंटकॉम ने दक्षिण-पश्चिमी ईरान के तटीय इलाकों पर चौतरफा हवाई हमले शुरू कर दिए.

अमेरिकी लड़ाकू विमानों और मिसाइलों ने ईरान के प्रमुख सैन्य गढ़ों जैसे बंदर अब्बास, सीरिक और क़ेश्म द्वीप को अपना निशाना बनाया. इस भीषण बमबारी में ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम, तटीय निगरानी केंद्र, मिसाइल सिस्टम और ड्रोन लॉन्च साइटों को पूरी तरह नेस्तनाबूद कर दिया गया है.

खामेनेई के अंतिम संस्कार के बीच अमेरिका का एक्शन

अमेरिका का यह आक्रामक एक्शन रणनीतिक रूप से ईरान के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है. ईरान में 4 से 9 जुलाई तक पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई के अंतिम संस्कार और राष्ट्रीय शोक से जुड़े कार्यक्रम चल रहे हैं. तेहरान, क़ोम और मशहद जैसे बड़े शहरों की सड़कों पर लाखों की संख्या में ईरानी नागरिक जुटे हुए हैं और 9 जुलाई को मशहद की पवित्र इमाम रज़ा दरगाह में उन्हें सुपुर्द-ए-खाक करने की तैयारी है.

ईरान ने पहले ही चेतावनी दी थी कि शोक समारोह के दौरान अगर किसी ने सैन्य कार्रवाई की तो उसका अंजाम बुरा होगा, लेकिन अमेरिका ने इस चेतावनी को हवा में उड़ाते हुए आधी रात को बम बरसा दिए. ईरान ने अब अमेरिकी कार्रवाई को युद्धविराम समझौते का खुला उल्लंघन बताते हुए बेहद सख्त लहजे में अंजाम भुगतने की धमकी दी है.

तेल बेचने की छूट खत्म

सैन्य हमलों से इतर अमेरिका ने ईरान को आर्थिक रूप से पूरी तरह कंगाल करने के लिए उसका ‘लाइफलाइन लाइसेंस’ रद्द कर दिया है. अमेरिकी वित्त मंत्रालय के विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय यानी ओएफएसी ने 7 जुलाई 2026 को तत्काल प्रभाव से जनरल लाइसेंस एक्स को पूरी तरह सस्पेंड कर दिया.

इस विशेष लाइसेंस के तहत अमेरिका ने ईरान को 21 जून 2026 से 21 अगस्त 2026 तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल, पेट्रोकेमिकल और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों को बेचने की सीमित राहत दी थी, जिससे ईरान अमेरिकी डॉलर में लेनदेन कर पा रहा था. अब अमेरिका ने सख्त आदेश जारी किया है कि ईरान को आगामी 17 जुलाई तक अपने सारे अंतरराष्ट्रीय तेल सौदे हर हाल में बंद करने होंगे, वरना उस पर और कड़े वैश्विक प्रतिबंध मढ़ दिए जाएंगे.

ये भी पढ़ें: पीएम मोदी का बड़ा ऐलान: इंडोनेशिया में खुलेगा IIM बेंगलुरु का पहला विदेशी कैंपस

कच्चे तेल की कीमतों में भयंकर उछाल

अमेरिका के इस दोहरे प्रहार के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में हड़कंप मच गया है और ग्लोबल इकोनॉमी पर इसका सीधा असर दिखने लगा है. होर्मुज में जहाजों पर हुए हमले और ईरान के तेल निर्यात पर लगी रोक के बाद दुनिया भर में कच्चे तेल यानी क्रूड ऑयल की कीमतों में तीन फीसदी से ज्यादा का भयंकर उछाल आ चुका है. होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का वो सबसे संवेदनशील समुद्री रास्ता है जहां से पूरी दुनिया का 25 फीसदी और अकेले चीन का 80 फीसदी तेल सप्लाई होता है.

इस रास्ते पर युद्ध के बादल मंडराने से आने वाले दिनों में भारत सहित पूरी दुनिया में पेट्रोल-डीजल और गैस की कीमतें आसमान छू सकती हैं. रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ईरान ने पलटवार किया तो यह टकराव एक भीषण क्षेत्रीय युद्ध में बदल सकता है.

-भारत एक्सप्रेस

 



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read

Latest