Bharat Express DD Free Dish

“मौत के मुंह से खींच लाया अपना जांबाज!” वो एक कसम, जिसके लिए अमेरिकी सेना ने ईरान में झोंक दी अपनी पूरी ताकत

US Rescue Mission Iran: अमेरिकी सेना ने ईरान में फंसे अपने फाइटर जेट पायलट को जबरदस्त कार्रवाई करके बचा लिया. अमेरिकी डिफेंस डिपार्टमेंट की संस्था जॉइंट पर्सनल रिकवरी एजेंसी युद्ध में फंसे अमेरिकी सैनिकों को वापस लाने का दायित्व निभाती है. इस अमेरिकी एजेंसी की नीति है, “किसी को अमेरिकी सैनिक को दुश्मन के इलाके में नहीं छोड़ा जाएगा.”

US Rescue Mission Iran

US Rescue Mission Iran: दूसरे विश्वयुद्ध के समय जापानी सेना ने हजारों अमेरिकी सैनिकों को बंधक बना लिया था. इन अमेरिकी सैनिकों को जापान ने फिलीपींस के कैबानातुआन कैंप में रखा था. 30 जनवरी 1945 को अमेरिका ने अपने जवानों को बचाने के लिए एक रेस्क्यू मिशन चलाया. अमेरिकी रेंजर्स ने कैबानातुआन कैंप में हमला कर 489 अमेरिकी सैनिकों और 33 नागरिकों सहित कुल 522 लोगों को बचा लिया. इस कार्रवाई में 530 जापानी सैनिक मारे गए. वहीं अमेरिका की तरफ से सिर्फ 4 सैनिक शहीद हुए.

अपने इसी कार्रवाई को अमेरिका ने एक बार फिर दोहराया, बस जगह और समय बदल गया. अमेरिकी सेना ने ईरान में फंसे अपने फाइटर जेट पायलट को जबरदस्त कार्रवाई करके बचा लिया. आखिर अमेरिकी सेना कभी भी अपने जवानों को पीछे क्यों नहीं छोड़ती?

अमेरिकी डिफेंस डिपार्टमेंट की संस्था जॉइंट पर्सनल रिकवरी एजेंसी युद्ध में फंसे अमेरिकी सैनिकों को वापस लाने का दायित्व निभाती है. इस अमेरिकी एजेंसी की नीति है, “किसी को अमेरिकी सैनिक को दुश्मन के इलाके में नहीं छोड़ा जाएगा.”

US Rescue Mission Iran

अमेरिकी राष्ट्रपति आइजनहावर ने शुरू की पॉलिसी

साल 1955 में अमेरिकी राष्ट्रपति आइजनहावर ने इस पॉलिसी को अमेरिकी आर्म्ड फोर्सेज के कोड ऑफ कंडक्ट में शामिल किया था. जिसके बाद अमेरिकी सेना यह सुनिश्चित करती है कि जंग में उतरने वाले हर अमेरिकी सैनिक की सुरक्षा और उसे वापस लाना उनका दायित्व है. किसी भी सूरत में सैनिकों को पीछे नहीं छोड़ा जाएगा.

“मैं किसी भी सैनिक को पीछे नहीं छोड़ूंगा”

अमेरिकी सेना के सभी जवान चाहे वो एयरफोर्स के हों या मरीन कमांडो सभी की प्रतिज्ञा में एक बेहद ही अहम चीज होती है, जिसमें ये कहा गया है- I WILL NEVER LEAVE A FALLEN COMRADE BEHIND यानी मैं किसी भी सैनिक को पीछे नहीं छोड़ूंगा.

ये भी पढ़ें- बदले की आग में झुलस रहा ईरान! एक झटके में 4 अमेरिकी एयरक्राफ्ट किया तबाह, अब क्या करेंगे ट्रंप?

अमेरिकी सेना अपने इस प्रतिज्ञा को किसी भी परिस्थिति में निभाती है. चाहे वो वियतनाम जंग हो या फिर दूसरा विश्वयुद्ध. हर बार अमेरिकी सेना अपने सैनिकों को दुर्गम से दुर्गम क्षेत्रों से रेस्क्यू की है. ईरान से अमेरिकी पायलट का यह रेस्क्यू भी उसी प्रतिज्ञा का हिस्सा था.

-भारत एक्सप्रेस



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read