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कभी दुनिया का चौथा सबसे अमीर देश, आज दाने-दाने को मोहताज; वेनेजुएला के अर्श से फर्श तक की कहानी!

Venezuela Economic Collapse History: 1950 में वेनेजुएला दुनिया का चौथा सबसे अमीर मुल्क था. तब वेनेजुएला की जीडीपी जापान से चार गुना और चीन से 12 गुना ज्यादा था. गलत नीतियां और कमजोर लोकतंत्र ने वेनेजुएला को बर्बाद कर दिया.

Venezuela Economic Collapse History

Venezuela Economic Collapse History: 1950 का साल था. दुनिया द्वितीय विश्वयुद्ध से हुए नुकसान से उबरने की कोशिश कर रही थी. जर्मनी-जापान तबाह हो गए थे. यूरोप के बाकी देशों में भूखमरी, बेरोजगारी और आर्थिक पिछड़ापन लोगों को झकझोर रहा था. तब दुनिया का एक देश अपनी पूरी ताकत से तरक्की कर रहा था. उस देश की आय अधिकतर यूरोपीय देशों से ज्यादा थी. उसकी राजधानी पेरिस को टक्कर दे रही थी. यहां तक की उसकी मुद्रा अमेरिकी डॉलर से भी ज्यादा मजबूत थी. वह देश था वेनेजुएला.

वेनेजुएला 1950 में दुनिया का चौथा सबसे अमीर मुल्क था. तब वेनेजुएला की जीडीपी जापान से चार गुना और चीन से 12 गुना ज्यादा था. उसकी प्रति व्यक्ति आय लगभग ब्रिटेन और फ्रांस के बराबर थी. अपनी आर्थिक मजबूती के कारण वेनेजुएला विदेशी उद्योगपतियों की पहली पसंद बन गया था. ऐसे में फिर सवाल उठता है कि ऐसा क्या हुआ कि जो देश इतना समृद्ध था वह अचानक से चरमरा कैसे गया. जिस देश में तेल की नदियां बहती हों वह देश महंगाई, पलायन, भूख और राजनीतिक संकट में फंस गया.

इस लैटिन अमेरिकी देश की बर्बादी निकोलस मादुरो या उससे पहले राष्ट्रपति रहे ह्यूगो चावेज नहीं हैं, बल्कि यह कहानी उनसे भी पहले शुरू होती है.

“डच डिजीज” से संक्रमित हो गया वेनेजुएला

अर्थशास्त्र में एक टर्म है जिसे “डच डिजीज” कहते हैं. अर्थशास्त्र में यह टर्म तब यूज होता है जब किसी देश को किसी एक प्राकृतिक संसाधन से अचानक बहुत अधिक आय होने लगती है और इसकी वजह से देश के अन्य आर्थिक क्षेत्र कमजोर हो जाते हैं. जिसकी वजह से महंगाई बढ़ जाती है. उद्योगों और एक्सपोर्ट क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा खत्म हो जाती है. जिससे देश में भयंकर बेरोजगारी पैदा हो जाती है. वेनेजुएला के इस बर्बादी में भी यहीं कारण था.

तेल बन गया कमजोरी

20वीं सदी के शुरुआत में वेनेजुएला में तेल के विशाल भंडार पाये गए, जिसने इस देश की किस्मत पलट दिया. 1970 आते-आते वेनेजुएला को तेल से इतनी कमाई हुई कि सरकार ने अन्य सेक्टर्स पर बिल्कुल ध्यान देना बंद कर दिया. सरकार ने सड़कों, इमारतों, स्कूलों और सर्विस सेक्टर पर तो खूब खर्च किया, लेकिन इसी बीच एक ऐसी गलती हो गई जिसने इस देश को बर्बादी के भंवर में फंसा दिया.

सरकार ने तेल पर तो खूब ध्यान दिया, लेकिन अन्य सेक्टर्स जैसे-मैन्युफैक्चरिंग, उद्योगों और खेती पर ध्यान देना बिल्कुल छोड़ दिया. सरकार को लगा कि जब तेल से पैसे आ रही रहे हैं तो बाकी पर मेहनत करने का क्या ही नतीजा होगा. जिसका परिणाम यह हुआ कि दूसरे क्षेत्र कमजोर होते चले गए और वेनेजुएला एक कभी ना खत्म होने वाले भंवर में फंस गया.

वेनेजुएला को झटका तब लगा जब अरब क्षेत्र में भी तेल के बड़े कुएं मिलने शुरू हो गए. उधर रूस और अमेरिका में भी तेल के बड़े भंडार मिल गए. जिसकी वजह से वेनेजुएला को तेल से होने वाले मुनाफे में कमी आनी शुरू हो गई. जैसे ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें गिरी, पूरा वेनेजुएला हिल जाता. लेकिन वेनेजुएला की सरकार ने खर्च कम करने के बजाय और अधिक खर्च करना शुरू कर दिया. सरकार की कमाई कम होती चली गई लेकिन सरकार सब्सिडी और लोकलुभावन योजनाओं पर खर्च करती रही.

फिर आया 18 फरवरी 1983 का दिन. इसे वेनेजुएला के इतिहास में ब्लैक फ्राइडे भी कहा जाता है. सरकार को उस दिन अपनी मुद्रा के मूल्य को कम करना पड़ा. वेनेजुएला की मुद्रा बोलिवर की कीमत धाराशायी हो गई. लोगों की बचक आधी रह गई और लोगों का सरकार पर से भरोसा खत्म हो गया. यह वहीं मोड़ था जिसने वेनेजुएला को आज इस स्थिति में जाने पर मजबूर कर दिया.

कमजोर लोकतंत्र, करप्ट सिस्टम ने तोड़ दिया

डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो पर तानाशाही का आरोप लगाते हुए गिरफ्तार किया. उनका कहना है कि वेनेजुएला की ये हालत तानाशाहों की वजह से हुआ, लेकिन यह पूरी तरह सच नहीं है. वेनेजुएला में लंबे समय तक लोकतांत्रिक सरकारें रहीं. लेकिन यह सच है कि वेनेजुएला में लोकतंत्र कभी मजबूत नहीं रहा. रही सही कसर करप्ट सिस्टम ने बर्बाद कर दिया. राजनीतिक पार्टियां सिस्टम को सुधारने के बजाय संसाधनों के बंटवारे में फंस गईं.

लोग जब अपने अधिकारों को लेकर सड़कों पर उतरते तो सरकारें तेल के पैसों से उनको दबा देतीं. लेकिन जब पैसा धीरे-धीरे खत्म होता गया तो जनता बिफर पड़ी.

27 फरवरी 1989 को जनता सड़कों पर उतरकर दंगा करने लगी. कभी लैटिन का पेरिस कहा जाने वाला काराकास दंगों की आग में जल गया. दंगे में करीब 2000 लोगों की मौतें हुई. सरकार को करीब 2 हजार करोड़ का नुकसान हुआ. इस दंगे ने संकेत दे दिया कि देश अंदर से खोखला होकर टूट रहा है.

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2014 के बाद बदतर हुए हालात

साल 2014 के बाद वेनेजुएला का सबसे बुरा दौर शुरू होता है. तेल की कीमतें गिर गईं थी. सरकार के पास ना तो पैसे थे और ना ही आय के दूसरे स्रोत. सालों से मुद्रा नियंत्रण और आयात पर निर्भर वेनेजुएला के पास अपने लोगों के लिए जरूरी सामान मुहैया कराने तक पैसे नहीं थे. दुकानों से सामान खत्म होने लगे.

इस हालात से निपटने के लिए सरकार ने एक ऐसा कदम उठाया, जिसने वेनेजुएला को अंदर से तोड़ दिया. सरकार ने आर्थिक सुधार के बजाय बड़े पैमाने पर नोट छापने शुरू कर दिये. कुछ ही सालों में वेनेजुएला हाइपरइन्फ्लेशन की चपेट में आ गया. जिसकी वजह से देश में उद्योग धंधे चौपट हो गए. लोगों के पास बोरी भर के नोट तो रहता था, लेकिन उससे वो खाने तक का सामान नहीं खरीद पाते थे.

जिस तेल ने वेनेजुएला को अमीर बनाया. उसी तेल ने वेनेजुएला को बर्बाद कर दिया.

-भारत एक्सप्रेस



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