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Shah Alam II कौन थे, जिन्होंने आज ही के दिन ईस्ट इंडिया कंपनी को ‘सौंप’ दिया था बंगाल, अंग्रेज वसूलने लगे टैक्स

Treaty of Allahabad : सन् 1765 में ईस्ट इंडिया कंपनी को बंगाल का नियंत्रण मिलना भारत में मुगल साम्राज्य और ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के इतिहास में एक महत्वपूर्ण घटना थी. यह निर्णय मुख्य रूप से बक्सर की लड़ाई में देशी शासकों की हार के कारण लेना पड़ा.

Shah Alam II Mughal Emperor
Vijay Ram Edited by Vijay Ram

Shah Alam II Mughal Emperor : क्या आपने शाह आलम द्वितीय के बारे में सुना है?वह भारत पर शासन करने वाले इस्लामिक शासक थे. जिन्होंने औरंगजेब के बाद मुगल सल्तनत को संभाला था. उस दौर में ब्रिटेन से आई ‘ईस्ट इंडिया कंपनी’ भारत में अपने पैर पसारने लगी थी.

वो 12 अगस्त का ही दिन था, जब 1765 में ईस्ट इंडिया कंपनी को पूर्वी प्रांत (बंगाल) से “कर वसूलने का अधिकार” दिया गया था. इसके लिए शाह आलम द्वितीय के साथ ब्रिटिश हुक्मरानों की संधि हुई थी, जिसे “इलाहाबाद की संधि” के रूप में जाना गया. इस संधि पर “शाह आलम द्वितीय”, “बंगाल के नवाब” और “अवध के नवाब” की संयुक्त सेना की बक्सर की लड़ाई में हार के बाद हस्ताक्षर किए गए थे.

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फोटो— अगस्त 1765 में मुगल सम्राट शाह आलम द्वितीय लॉर्ड क्लाइव को दीवानी सौंपते हुए.

1765 में ईस्ट इंडिया कंपनी को बंगाल के दीवान के तौर में जिम्मेदारी मिलना भारत में मुगल साम्राज्य और ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के इतिहास में एक महत्वपूर्ण घटना थी. यह निर्णय मुख्य रूप से बक्सर की लड़ाई में देशी शासकों की हार के कारण लेना पड़ा था, जिसके फलस्वरूप बंगाल पर अंततः ब्रिटिश नियंत्रण स्थापित हो गया.

बक्सर की लड़ाई से मुगल सल्तनत हिली

1764 में लड़ी गई बक्सर की लड़ाई, ईस्ट इंडिया कंपनी और मुगल साम्राज्य, बंगाल के नवाब और अवध के नवाब की संयुक्त सेना के बीच एक बड़ा संघर्ष था. इस लड़ाई में ईस्ट इंडिया कंपनी विजयी हुई, जिसके मुगल साम्राज्य पर दूरगामी परिणाम हुए.

देशी शासकों की विदेशियों से पराजय

बक्सर के युद्ध में देशी शासकों की पराजय ने बंगाल में उनकी स्थिति और अधिकार को कमजोर कर दिया. मुगल साम्राज्य, जो पहले से ही आंतरिक संघर्षों और घटती शक्ति का सामना कर रहा था, ने खुद को ईस्ट इंडिया कंपनी के बढ़ते प्रभाव का मुकाबला करने में असमर्थ पाया. परिणामस्वरूप, मुगल सम्राट शाह आलम द्वितीय और उनके सलाहकारों ने कंपनी को बंगाल पर कुछ हद तक नियंत्रण बनाए रखने के लिए एक संभावित सहयोगी के रूप में देखा.

ईस्ट इंडिया कंपनी के साथ गठबंधन

ईस्ट इंडिया कंपनी की सैन्य शक्ति और राजनीतिक प्रभाव को पहचानते हुए, मुगल सम्राट शाह आलम द्वितीय ने 1765 में एक संधि की, जिसे इलाहाबाद की संधि के रूप में जाना जाता है. इस संधि के अनुसार, मुगल सम्राट ने दीवानी प्रदान की. ईस्ट इंडिया कंपनी को बंगाल, बिहार और उड़ीसा का अधिकार. इसने कंपनी को राजस्व एकत्र करने और इन क्षेत्रों के प्रशासन के लिए प्रभावी रूप से जिम्मेदार बना दिया.

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सबसे प्रभावी राजस्व प्रणाली का होना

ईस्ट इंडिया कंपनी को बंगाल के दीवान के रूप में नियुक्त करने के मुगल साम्राज्य के निर्णय के पीछे एक प्रमुख कारण एक कुशल राजस्व प्रणाली शुरू करने के लिए कंपनी की प्रतिष्ठा थी. मुग़ल साम्राज्य महत्वपूर्ण वित्तीय चुनौतियों और प्रशासनिक अक्षमताओं का सामना कर रहा था, जिसके कारण राजस्व संग्रह में गिरावट आई. दूसरी ओर, ईस्ट इंडिया कंपनी के पास अपने मौजूदा क्षेत्रों में राजस्व संग्रह और प्रशासन के लिए एक अच्छी तरह से स्थापित प्रणाली थी.

भारतीय उपमहाद्वीप पर स्थापित हुआ ब्रिटिश प्रभुत्व

निष्कर्षतः 1765 में बंगाल के दीवान के रूप में ईस्ट इंडिया कंपनी की नियुक्ति मुख्य रूप से बक्सर की लड़ाई में देशी शासकों की हार और उसके बाद मुगल साम्राज्य के पतन का परिणाम थी. कंपनी की सैन्य जीत, साथ ही प्रभावी राजस्व प्रशासन के लिए इसकी प्रतिष्ठा ने इसे मुगल सम्राट शाह आलम द्वितीय के लिए बंगाल पर कुछ नियंत्रण बनाए रखने के लिए एक आकर्षक विकल्प बना दिया. यह निर्णय भारत में ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ, जिससे अंततः उपमहाद्वीप पर ब्रिटिश प्रभुत्व की स्थापना हुई.

— भारत एक्सप्रेस



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