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दिल्ली हाईकोर्ट ने लंदन स्थित भारतीय हाई कमीशन को दिया निर्देश- भारतीय मूल के इंग्लिश नागरिक के शव को भारत भेजने के लिए जारी करे NOC

मृतक अल्फी रिचर्ड वाट्स के पिता ने हाल ही में अपने बेटे के पार्थिव शरीर के स्थानांतरण के संबंध में दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था.

delhi high court

दिल्ली हाईकोर्ट.

Vikash Jha Edited by Vikash Jha

लंदन में भारतीय उच्चायोग को दिवंगत अल्फी रिचर्ड वाट्स की पत्नी को दिल्ली हाईकोर्ट ने एनओसी जारी करने का निर्देश दिया है. अल्फी रिचर्ड वाट्स के पार्थिव शरीर को यूनाइटेड किंगडम से हैदराबाद स्थानांतरित करने के लिए यह एनओसी जरूरत है. यह निर्णय प्रत्यावर्तन प्रक्रिया को सुविधाजनक बनाता है और यह सुनिश्चित करता है कि मृतक को उसके परिवार की इच्छा के अनुसार दफनाया जा सके.

मृतक अल्फी रिचर्ड वाट्स के पिता ने हाल ही में अपने बेटे के पार्थिव शरीर के स्थानांतरण के संबंध में दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था. उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि स्थानीय सांसद और काउंटी पार्षद सहित यूनाइटेड किंगडम के अधिकारियों ने इस प्रक्रिया का पूरा समर्थन किया है और इसे सुविधाजनक बनाया है, लेकिन लंदन में भारतीय उच्चायोग से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) की कमी के कारण स्थानांतरण में बाधा आ रही है.

29 जुलाई, 2024 को एनओसी देने से इनकार कर दिया गया था क्योंकि वॉट्स की स्थिति ब्रिटिश नागरिक होने के कारण और उनके पास ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया (ओसीआई) कार्ड नहीं था. न्यायालय के हस्तक्षेप की मांग करने वाली याचिका का उद्देश्य इस मुद्दे को हल करना और प्रत्यावर्तन को सक्षम बनाना है.

न्यायमूर्ति संजीव नरूला ने 16 अगस्त के आदेश में कहा लंदन में भारतीय उच्चायोग के कांसुलर अनुभाग द्वारा पारित 29 जुलाई, 2024 का संचार जिसमें पार्थिव शरीर के हस्तांतरण के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र देने से इनकार किया गया था को रद्द किया जाता है. लंदन में भारतीय उच्चायोग को निर्देश दिया गया है कि वह दिवंगत अल्फी रिचर्ड वाट्स के पार्थिव शरीर को यूनाइटेड किंगडम से हैदराबाद स्थानांतरित करने के लिए याचिकाकर्ता की पुत्रवधू/शेरोन अल्फांसो को अनापत्ति प्रमाण-पत्र जारी करे.

मृतक के पिता की ओर से पेश वकील अविनाश मैथ्यूज ने कहा कि दुनिया भर में विभिन्न भारतीय राजनयिक पदों द्वारा लागू दिशा-निर्देशों में असंगति के कारण मृत्यु के समय मृतक के स्थान के आधार पर मनमाना व्यवहार किया जाता है. वे कहते हैं कि महत्वपूर्ण कांसुलर सेवाएं, जो मानव सम्मान और पारिवारिक अधिकारों का अभिन्न अंग हैं मृतक की राष्ट्रीयता या पीआईओ या ओसीआई कार्ड जैसे विशिष्ट दस्तावेजों के आधार पर भिन्न नहीं होनी चाहिए.

यह विशेष रूप से तब प्रासंगिक है जब इसमें महत्वपूर्ण भारतीय मूल या संबंध शामिल हों। याचिकाकर्ता ऐसी सेवाओं के लिए अधिक समान और न्यायसंगत दृष्टिकोण चाहता है.

याचिकाकर्ता ने इस बात पर प्रकाश डाला कि सिंगापुर और यूएसए की तुलना में यूनाइटेड किंगडम में भारतीय उच्चायोग द्वारा लागू किए गए भिन्न दिशा-निर्देश, कांसुलर सेवाओं की स्थिरता और औचित्य के बारे में महत्वपूर्ण चिंताएं पैदा करते हैं. यह विसंगति वैश्विक स्तर पर ऐसे संवेदनशील मामलों से निपटने में न्यायसंगत उपचार सुनिश्चित करने के लिए एक समान दृष्टिकोण की आवश्यकता को रेखांकित करती है. याचिकाकर्ता ने बताया कि लंदन में भारतीय उच्चायोग को पार्थिव शरीर को वापस भेजने के लिए ओसीआई कार्ड की आवश्यकता होती है.

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-भारत एक्सप्रेस



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