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ज्ञानवापी केस में मुस्लिम पक्ष को सुप्रीम कोर्ट से झटका, कोर्ट ने नोटिस जारी कर मांगा जवाब; इस तारीख को होगी अगली सुनवाई

Gyanvapi Case: काशी विश्वनाथ मंदिर से सटे ज्ञानवापी परिसर से संबंधित जिला अदालत और सिविल जज की अदालत में लंबित मुकदमों को इलाहाबाद हाईकोर्ट में ट्रांसफर करने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है.

Gyanvapi Case

ज्ञानवापी केस में मुस्लिम पक्ष को सुप्रीम कोर्ट से झटका.

Dipesh Thakur Edited by Dipesh Thakur

Gyanvapi Case: काशी विश्वनाथ मंदिर से सटे ज्ञानवापी परिसर से संबंधित जिला अदालत और सिविल जज की अदालत में लंबित मुकदमों को इलाहाबाद हाईकोर्ट में ट्रांसफर करने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. कोर्ट 17 दिसंबर को इस मामले में अगली सुनवाई करेगा. जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की बेच ने कहा कि ज्ञानवापी से संबंधित सभी अर्जियों पर एक साथ सुनवाई करेंगे.

हिंदू पक्ष के वकील ने कोर्ट से क्या मांग की

वहीं सुनवाई के दौरान हिंदू पक्ष की ओर से पेश वकील ने कहा कि कुछ याचिकाएं जिला जज के सामने है तो कुछ सिविल जज के सामने है. ऐसे में एक ही मामले पर अलग-अलग अदालतों से अलग-अलग आदेश आ रहे है. हमारी मांग है कि ज्ञानवापी से जुड़ी सभी याचिकाओं को एक साथ जोड़कर इलाहाबाद हाईकोर्ट में तीन जजों की बेंच के सामने ट्रांसफर कर दिए जाए. ज्ञानवापी परिसर में दर्शन, पूजा का अधिकार मांगने वाली चार महिला याचिकाकर्ताओं ने दाखिल सभी मुकदमों को इलाहाबाद हाईकोर्ट में ट्रांसफर की मांग की है. ज्ञानवापी परिसर से जुड़े 15 मुकदमों को हाई कोर्ट में ट्रांसफर की मांग की गई है. जिनमे जिला अदालत में 9 और सिविल जज की अदालत में 6 मुक़दमे लंबित है.

याचिकाकर्ता की क्या है मांग

याचिकाकर्ताओं की मांग है कि सभी याचिकाओं पर हाई कोर्ट एक साथ सुनवाई करें. मुकदमों में ऐतिहासिक तथ्य पुरातत्व और संवैधानिक अधिकारों के मुद्दे शामिल है. एक ही अदालत में सुनवाई से विरोधाभासी आदेशों की संभावना कम है. इससे पहले ज्ञानवापी श्रृंगार गौरी केस की सुनवाई में ही रही देरी को लेकर हिंदू पक्ष की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी. याचिका में ज्ञानवापी से जुड़े सभी मामले हाई कोर्ट में ट्रांसफर करने और अयोध्या के रामजन्म भूमि के तर्ज पर तीन जजों की बेंच में सुनवाई की गुहार लगाई गई थी. याचिकाकर्ता के वकील ने कहा था कि 11 महीने से ज्ञानवापी मामले की सुनवाई में देरी हुई है. इसका असर मुकदमों पर पड़ा है और इसलिए हिंदू पक्ष की तरफ से जिला अदालत में पक्ष रखा गया कि 1991 मूल वाद सहित ज्ञानवापी से जुड़े सभी मामलों की सुनवाई एक साथ होनी चाहिए थी.

याचिका में क्या किया गया था दावा

बता दें चार हिंदू महिलाओं ने ज्ञानवापी मस्जिद के वजुखाने में मिली शिवलिंग जैसी संरचना की वैज्ञानिक जांच कराने की मांग की थी. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण से यह जांच कराने की मांग की थी. 18 अगस्त 2021 को पांच महिलाओं ने सिविल जज के सामने एक याचिका दायर किया था. महिलाओं की मांग पर जज रवि कुमार दिवाकर ने मस्जिद परिसर का सर्वे कराने का आदेश दिया था. याचिका में दावा किया था कि काशी विश्वनाथ का जो मूल मंदिर था, उसे 2050 साल पहले राजा विक्रमादित्य ने बनाया था. 1669 में औरंगजेब ने इसे तोड़ दिया और इसकी जगह ज्ञानवापी मस्जिद बनवा दी. इस मस्जिद को बनाने में मंदिर के अवशेषों का ही इस्तेमाल किया गया.



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