Delhi High Court on Dowry Death: दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि महिलाओं को अपने वैवाहिक घरों में कष्ट सहना चाहिए, क्योंकि विवाह के बाद यही सही काम है, यह मानसिकता अपराधियों को प्रोत्साहित करती है. अदालत ने दहेज हत्या के एक मामले में पति को जमानत देने से इनकार करते हुए यह टिप्पणी की. जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा यह मानसिकता अपराधियों को प्रोत्साहित करती है और इसका फायदा उठाती है, जिसमें पति भी शामिल है जो अपनी पत्नी की हत्या कर देता है.
अदालत ने कहा इस स्थिति का फायदा उठाते हुए कि पीड़ित पत्नी के पास जाने के लिए कोई और जगह नहीं है, क्योंकि उसके माता-पिता भी उसे यातना और शारीरिक शोषण के बावजूद उसके साथ रहने की सलाह दे रहे हैं. वर्तमान मामले जैसे मामलों में, उदारतापूर्वक जमानत देने से ऐसी प्रथाओं और अपराधों को बढ़ावा मिल सकता है.
महिलाओं को अभी भी परेशान किया जाता है
अदालत ने कहा कि यद्यपि धारा 304बी लगभग 40 वर्षों से अस्तित्व में है, फिर भी न्यायालय ऐसे मामलों से दुखी हैं, जिनमें महिलाओं को अभी भी परेशान किया जाता है, प्रताड़ित किया जाता है और उनकी हत्या की जाती है. केवल इसलिए क्योंकि उनका विवाह ऐसे परिवार में हुआ है, जो वैवाहिक संबंध के कारण अधिकार के रूप में धन और दहेज की मांग करता रहता है. इसके अलावा अदालत ने कहा कि पीड़ितों के परिवार अक्सर अपने बयानों में उल्लेख करते हैं कि उनकी बेटियों ने दहेज की मांग पूरी न होने के कारण प्रताड़ित किए जाने और अपनी जान को खतरा होने की शिकायत की थी.
हालांकि अदालत ने कहा कि सामाजिक दबाव और सामाजिक कलंक के डर के कारण, परिवार अक्सर अपनी बेटियों को अपने वैवाहिक घरों में रहने और समायोजित होने का प्रयास जारी रखने का सुझाव देते हैं या मजबूर करते हैं, जहां बाद में उन्हें मार दिया जाता है या आत्महत्या के लिए मजबूर किया जाता है.
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आरोप है कि उसने अपनी पत्नी की शादी के करीब दो महीने बाद हत्या कर दी. जस्टिस शर्मा ने पति के इस तर्क को खारिज कर दिया कि दहेज की मांग के कारण पीड़िता की मौत के पीछे उसके खिलाफ कोई सबूत नहीं है. जस्टिस ने उसके इस तर्क पर भी आपत्ति जताई कि वह बहुत नशे में था और उसने अचानक उसकी हत्या कर दी क्योंकि उनके बीच विवाद हुआ था.
अदालत ने कहा पति ने शराब के नशे में धुत होकर उसे मार डाला, न केवल अस्वीकार्य है बल्कि चौंकाने वाला भी है. कानून किसी भी व्यक्ति को दूसरे की हत्या करने का अधिकार नहीं देता.
-भारत एक्सप्रेस
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