कांग्रेस के राज्यसभा सांसद और कवि इमरान प्रतापगढ़ी की गिरफ्तारी पर लगी रोक को सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा है. मामले की सुनवाई के कोर्ट ने कविता पर गुजरात पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज करने पर सवाल उठाया है. जस्टिस अभय एस ओका की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि गुजरात हाई कोर्ट ने कविता का अर्थ को ठीक से नही समझा है.
यह कविता किसी धर्म के खिलाफ नही है, बल्कि एक संदेश दिया गया है कि यदि कोई हिंसा में लिप्त है तो हम हिंसा में लिप्त नही होंगे. कविता यही संदेश देती है. यह किसी विशेष समुदाय के खिलाफ नही है. कोर्ट ने गुजरात सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए 3 सप्ताह का समय दे दिया है. कोर्ट ने राज्य सरकार की ओर से पेश वकील से कहा कि अगली बार दिमाग लगाकर अदालत में वापस आना. गुजरात हाई कोर्ट ने इमरान प्रतापगढ़ी के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने से इनकार कर दिया था.
हँसते-हँसते दफना देंगे लाशें
गुजरात हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि चूंकि जांच बहुत प्रारंभिक चरण में है, इसलिए मुझे भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 528 या भारत के संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत अपनी शक्तियों का उपयोग करने बक कोई कारण नजर नही आता. यही कहते हुए कोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया था. इमरान ने गुजरात के जामनगर में आयोजित एक सामूहिक विवाह कार्यक्रम में शामिल होने के बाद X पर वीडियो शेयर किया था, जिसमें लिखा था-उस रब की कसम हँसते-हँसते इतनी लाशें दफना देंगे.
इसके बाद जामनगर पुलिस में शिकायत दर्ज किया गया था. यह एफआईआर तीन फरवरी को एक एडवोकेट के क्लर्क ने दर्ज कराया था. इसमें आरोप लगाया गया था कि यह सामाजिक सद्भाव को बिगाड़ रहा है. कांग्रेस नेता प्रतापगढ़ी पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 196 (धर्म, नस्ल आदि के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना) और 197 (राष्ट्रीय एकता के लिए प्रतिकूल आरोप, दावे) के तहत मामला दर्ज किया गया था.सांसद ने इस एफआईआर के खिलाफ गुजरात हाई कोर्ट का रुख किया था. हाई कोर्ट ने यह कहते हुए इमरान प्रतापगढ़ी की याचिका को खारिज कर दिया है कि चूंकि आवेदक खुद एक सांसद है और कानून बनाने वाली संसद के सदस्य है, इसलिए उन्हें जिम्मेदारी से काम करना चाहिए. हाई कोर्ट ने यह भी कहा था कि कानूनी प्रक्रिया का सम्मान किया जाना चाहिए.
-भारत एक्सप्रेस
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