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दिल्ली हाई कोर्ट ने आत्महत्या के लिए उकसाने के एक मामले में गिरफ्तारी को अवैध करार दिया

दिल्ली हाई कोर्ट ने आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में गिरफ्तारी को अवैध करार दिया. कोर्ट ने कहा कि गिरफ्तारी के आधार नहीं बताए गए, जो संविधान और कानून का उल्लंघन है.

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Prashant Rai Edited by Prashant Rai

दिल्ली हाई कोर्ट ने आत्महत्या के लिए उकसाने के एक मामले में गिरफ्तारी को अवैध करार दिया है. कोर्ट ने कहा कि गिरफ्तारी के दौरान आरोपी को इसके आधार नहीं बताए गए, जो संविधान और कानून का उल्लंघन है.

जस्टिस विकास महाजन ने कहा कि आरोपी की गिरफ्तारी संविधान के अनुच्छेद 22(1) और सीआरपीसी की धारा 50 का उल्लंघन करती है. गिरफ्तारी सीट के अवलोकन से पता चला कि उसमें “निष्पक्ष जांच” को आधार बताया गया, लेकिन गिरफ्तारी के स्पष्ट कारण दर्ज नहीं थे.

मामले का विवरण

यह मामला आईपीसी की धारा 306 (आत्महत्या के लिए उकसाना) और 34 (सामान्य इरादा) के तहत दर्ज किया गया था. शिकायतकर्ता ने अपने चचेरे भाई (मृतक) का एक वीडियो रिकॉर्ड किया था, जिसमें उसने आरोपी गगन और अन्य के खिलाफ छेड़खानी के आरोप लगाए थे और बताया था कि इसी कारण उसने जहर खा लिया.

कोर्ट ने गिरफ्तारी को अवैध ठहराते हुए कहा कि जांच अधिकारी को गिरफ्तारी के समय या गिरफ्तारी सीट जारी करते समय आरोपी को लिखित रूप में गिरफ्तारी का आधार देना आवश्यक है. याचिकाकर्ता 8 अगस्त 2024 से हिरासत में था और चार्जशीट पहले ही दाखिल की जा चुकी थी, इसलिए उसकी और हिरासत की जरूरत नहीं थी.

कोर्ट ने कहा कि इस अपराध के लिए कोई न्यूनतम सजा निर्धारित नहीं है. इसके अलावा, आरोपी का कोई पिछला आपराधिक इतिहास भी नहीं था. इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने आरोपी को रिहा करने का आदेश दिया.


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-भारत एक्सप्रेस



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