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यूनिटेक के संस्थापक रमेश चंद्रा को दिल्ली हाई कोर्ट से मिली नियमित जमानत

दिल्ली हाई कोर्ट ने रमेश चंद्रा को कुछ शर्तों के साथ नियमित जमानत दे दिया है. जस्टिस जसमीत सिंह की बेंच ने यह फैसला दिया है.

Unitech founder Ramesh Chandra

यूनिटेक के संस्थापक रमेश चंद्रा

Edited by Akansha

मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कथित आरोपी और यूनिटेक के संस्थापक रमेश चंद्रा को दिल्ली हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. दिल्ली हाई कोर्ट ने रमेश चंद्रा को कुछ शर्तों के साथ नियमित जमानत दे दिया है. जस्टिस जसमीत सिंह की बेंच ने यह फैसला दिया है. घर खरीदारों के 5826 करोड़ रुपये की हेराफेरी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोपी चंद्रा ईलाज के नाम पर डेढ़ साल से भी अधिक समय से अंतरिम जमानत पर थे.

रमेश चंद्रा को अक्टूबर में किया गया था गिरफ्तार

रमेश चंद्रा को अक्टूबर 2021 में गिरफ्तार किया गया था. जुलाई 2022 में मेडिकल ग्राउंड पर अंतरिम जमानत मिल गया था. जिसे समय-समय पर बढ़ाया गया, क्योंकि उनकी स्थिति में कोई सुधार नही हुआ था. उनके वकील ने इस आधार पर अंतरिम जमानत को बढ़ाने की मांग करते रहे कि उनकी उम्र 85 वर्ष से अधिक है, और उनका स्वास्थ्य खराब है, जिसके लिए निरंतर निगरानी और उपचार की आवश्यकता है. रमेश चंद्रा ने डेढ़ साल तक अंतरिम जमानत पर रहने के बाद जेल अधिकारियों के समक्ष सरेंडर कर दिया था.

कोर्ट ने जेल अधिकारियों को दिया था निर्देश

दिल्ली हाई कोर्ट ने एम्स के मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट और इस तथ्य पर ध्यान दिया कि बीमारी जीवन के लिए खतरा नहीं है और जेल में ईलाज संभव है. हालांकि कोर्ट ने जेल अधिकारियों को निर्देश दिया था कि ईलाज के लिए रमेश चंद्रा का समय-समय पर और सप्ताह में कम से कम दो बार मूल्यांकन किया जाए. बता दें कि साल 2017 से जेल में बंद चंद्रा भाइयों पर घर खरीदने वालों के पैसे हड़पने का आरोप है. संजय चंद्रा उनके भाई अन्य चंद्रा यूनिटेक के पूर्व प्रमोटर और मालिक है.

ईडी ने कोर्ट में किया था ये दावा

संजय चंद्रा की पत्नी प्रीति चंद्रा और कार्नोस्टी समूह के एक कार्यकारी राजेश मलिक को भी गिरफ्तार किया गया था. ईडी ने सुप्रीम कोर्ट में दावा किया था कि चंद्रा बंधु जेल के अधिकारियों की मिली भगत से तिहाड़ जेल के भीतर से आपना व्यवसाय चला रहे हैं. जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने मुंबई के तजोला जेल स्थानांतरित कर दिया था. आरोप सामने आने के बाद ईडी ने कार्रवाई करते हुए शिवालिक समूह, त्रिकार समूह, यूनिटेक समूह और कार्नोस्टी समूह के 35 ठिकानों पर मुंबई और दिल्ली में छापेमारी की थी. ईडी के मुताबिक इस मामले में कुल 7638.43 करोड़ रुपए की अपराध से हासिल रकम का पता चला था.

-भारत एक्सप्रेस 


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