राजधानी में एक शॉपिंग मॉल परियोजना के संचालन में हुए भ्र्ष्टाचार और वित्तीय अनियमितता के मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने सीबीआई को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. जस्टिस गिरीश कथपालिया ने यह नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. कोर्ट 27 मई को इस मामले में अगली सुनवाई करेगा. याचिका में शॉपिंग मॉल परियोजना के संचालन में हुए भ्र्ष्टाचार और वित्तीय अनियमितता के मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और आपराधिक दंड कानून के प्राविधानों के तहत प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की गई है.
याचिका में आरोप लगाया गया है कि कई सरकारी अधिकारी, रियल एस्टेट डेवलपर्स, कॉरपोरेट किरायादार और सब रजिस्ट्रार भी करोड़ों रुपए के भूमि घोटाले में शामिल है. याचिका में आरोप लगाया गया है कि पश्चिमी दिल्ली स्थित मॉल के संचालन और प्रबंधन में अवैध और धोखाधड़ी वाली गतिविधियों को अंजाम दिया गया है. मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील विकास पाहवा ने दलील देते हुए कहा कि 6085 वर्ग मीटर के भूखंड के लिए मूल स्थाई पट्टा 2007 में डीडीए ने दिया था.
सरकारी खजाने को हुआ नुकसान
हालांकि जमीन के किराए और रूपांतरण शुल्क सहित 25 करोड़ रुपये से अधिक की बकाया राशि का भुगतान न करने के कारण डीडीए ने जनवरी 2020 में पट्टे को समाप्त कर दिया था. इस बीच इस मॉल के लिए दुकानों की बुकिंग की गई. इससे निवेशकों ने यहां पैसा लगाया. लेकिन पट्टा समाप्त होने की वजह से निवेशकों को नुकसान हुआ. याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि कॉरपोरेट संस्थाओं, उनके निदेशकों, सरकारी अधिकारियों और उप-पट्टेदारों ने डीडीए द्वारा विलेख को समाप्त किए जाने के बावजूद सरकारी खजाने को चुना लगाने और संपत्ति में गैरकानूनी रूप से तीसरे पक्ष के हितों को सुनिश्चित करने की साजिश रची.
याचिका में दावा किया गया है कि 100 करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय धोखाधडी हुई है, जिससे भूमि किराए सहित बकाया राशि का भुगतान न किए जाने से सरकारी खजाने को नुकसान हुआ है. याचिका में यह भी कहा गया है कि इसके बावजूद रियल एस्टेट फर्म के निदेशक ने दूसरों के साथ मिलकर शेल कंपनियों का उपयोग कर रद्द की गई भूमि पर अनधिकृत संचालन जारी रखा.
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

