सुप्रीम कोर्ट.
बैंगलोर पैलेस ग्राउंड की 15 एकड़ से अधिक भूमि के लिए 3400 करोड़ रुपये से अधिक के ट्रांसफरेबल डेवलपमेंट राइट्स (टीडीआर) सर्टिफिकेट सौपने के मामले में कर्नाटक सरकार को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिल गई है. कोर्ट ने पिछले आदेशों पर अंतरिम रोक लगा दिया है. जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस एन कोटिश्वर की पीठ ने यह आदेश दिया है. कर्नाटक सरकार की ओर से दायर पुनर्विचार याचिका पर 21 जुलाई से शुरू होने वाले सप्ताह में सुनवाई करेगा.
कोर्ट ने कहा कि सभी टीडीआर प्रमाणपत्र रजिस्ट्री के पास जमा रहेंगे और अगर उन्हें जारी किया जाता है तो उनका उपयोग नही किया जाएगा या किसी तीसरे पक्ष को उसका अधिकार नही मिलेगा. कोर्ट ने कहा कि यदि समीक्षा याचिका खारिज कर दिया जाता है तो अंतरिम निर्देश ऐसे आदेश पारित करने की तिथि से चार सप्ताह तक या तीन न्यायाधीशों द्वारा सुनवाई होने तक लागू रहेंगे.
3400 करोड़ रुपये के टीडीआर मुआवजे का मामला
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक सरकार को मैसूर राजपरिवार को 3400 करोड़ रुपये के हस्तांतरणीय विकास अधिकार यानि टीडीआर तत्काल सौपने का आदेश दिया था. जो बेंगलुरु में सड़क विस्तार के लिए ऐतिहासिक पैलेस ग्राउंड से अधिग्रहित 15 एकड़ से अधिक भूमि के मुआवजे के रूप में है.
मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि जब अधिनियम लागू नहीं होता है तो टीडीआर कैसे दिया जा.सकता है. अधिनियम 2004 का है. हमने सुप्रीम कोर्ट द्वारा पारित आदेश को चुनौती देते हुए सुनवाई को टालने की मांग की है. सिब्बल ने कहा कि कानून के मामले में क्या कानून पूर्वव्यापी रूप से लागू हो सकता है? कोर्ट ने सिब्बल से पूछा कि क्या हम दूसरी पीठ द्वारा लिए गए फैसले के खिलाफ दायर अपील को सुन सकते है क्या?
सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व के आदेशों पर सवाल उठाए
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने बेंगलुरु पैलेस भूमि विवाद के संबंध में राज्य सरकार से टीडीआर सौंपने और 10 दिनों के भीतर टीडीआर प्रमाण पत्र जमा करने का निर्देश दिया था. राज्य सरकार ने 23 जनवरी को एक आपातकालीन कैबिनेट बैठक आयोजित किया गया, जिसमें सड़क चौड़ीकरण प्रस्ताव को छोड़ दिया गया और इस आधार पर एक अध्यादेश जारी किया गया कि इतनी बड़ी राशि का मुआवजा प्रदान करना सरकार पर बोझ होगा. इस तरह से जनता का पैसा खर्च करना संभव नहीं है.
राज्य सरकार ने कहा था कि वह 3400 करोड़ रुपये का टीडीआर मुआवजा नहीं देगी. उन्होंने यह भी कहा था कि अगर हम 1270 वर्ग मीटर अंदर जमीन अंडरपास के लिए इस्तेमाल करते हैं तो हम 49 करोड़ रुपये का टीडीआर दे सकते है. लेकिन हमने महल की जमीन का बिल्कुल भी इस्तेमाल नही किया है. इसलिए टीडीआर जमा करने का कोई कारण नही है. यह जमीन 1994 में अधिग्रहित की गई थी. लेकिन 2024 के मूल्य के हिसाब से मुआवजा मांगा जा रहा है. लेकिन हमारे पास सबूत है कि हमने जमीन का इस्तेमाल नहीं किया है.
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-भारत एक्सप्रेस
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